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कही-सुनी ( 23 MAY-21) : सरकार की साख पर आंच

samvet srijan

(रवि भोई की कलम से)


छत्तीसगढ़ में बेलगाम अफसरों की हरकतों से सरकार की किरकिरी हो रही है। सरकार के जिम्मेदार अफसरों ने सरकार की छवि सुधारने की कोशिश तो की, पर भाजपा को, सरकार को घेरने का मौका भी दे दिया । पहला मामला महासमुंद जिले का है , जहां जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। कहते हैं जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग में गड़बड़ी की लिखित जानकारी अफसर ने कलेक्टर को दी थी।लेकिन मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। महिला एवं बाल अधिकारी के सड़क पर आने से अफसरों के कान खड़े हुए। इन सबसे सिविल सेवा आचरण से लेकर कलेक्टर के एक्शन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव रीना बाबा कंगाले ने संचालक दिव्या मिश्रा की अध्यक्षता में जाँच टीम बनाकर आग को ठंडा करने का काम किया, लेकिन सरकार और विभाग की साख पर आंच तो आ ही गई। दूसरा मामला जशपुर के बगीचा सब डिवीजन का है , जहां के एक तहसीलदार ने अपने महिला एसडीएम पर बेगारी कराने का खुलेआम आरोप लगाया। एसडीएम और तहसीलदार बदल दिए गए हैं, क्या इससे मामला शांत हो जाएगा या फिर सिस्टम सुधर जाएगा ? जांजगीर जिले में एक कांस्टेबल की मौत पर उसके परिजनों ने एक एसपी पर उंगुली उठाई है। राज्य के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने जाँच के आदेश दिए हैं। इन घटनाओं से सरकार की साख पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ रहा है। सवाल यह भी है कि अफसर ही बेलगाम हो जायेंगे तो सिस्टम कैसे चलेगा ?

डॉ. रमन पर कांग्रेस का वार

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह लगातार छत्तीसगढ़ कांग्रेस के निशाने पर हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारियों के मुकाबले कांग्रेस के नेता डॉ. रमन सिंह पर ज्यादा हमलावर दिखते हैं। रमन सिंह सोशल मीडिया के जरिये भूपेश सरकार के कामकाज में मीन-मेख निकालते रहते हैं , शायद यही वजह है कि वे भाजपा के दूसरे नेताओं के मुकाबले कांग्रेस की आँख पर ज्यादा चढ़े होते हैं। कांग्रेस का लक्ष्य कुछ भी हो, इससे रमन सिंह की राजनीतिक चमक बनी है और पार्टी में वजूद भी। अब टूल किट के मुद्दे पर कांग्रेस ने डॉ. रमन सिंह और भाजपा प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा के खिलाफ रायपुर के सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज करवाया। भाजपा नेताओं ने एफआईआर के खिलाफ एक दिन का धरना दिया। अब गिरफ्तारी का प्लान है। कोरोनाकाल में शांत पड़ी भाजपा को इससे जनता के बीच अपनी ताकत दिखाने और कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल गया। वहीँ कांग्रेस के दांव से भाजपा हाईकमान के सामने डॉ. रमन सिंह की कीमत और कद दोनों ही बढ़ गया। डॉ. रमन सिंह अभी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। राष्ट्रीय पदाधिकारी के खिलाफ कांग्रेस वार करेगी तो निश्चित भाजपा हमलावर होगी। कहा जा रहा है कि टूल किट के बहाने छत्तीसगढ़ में आने वाले कुछ दिनों तक तो राजनीतिक गर्मी बनी रहेगी।

बस्तर के विधायक नाराज

कहते हैं कांग्रेस के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी से बस्तर के आदिवासी विधायक काफी खफा हैं। बताया जाता है छत्तीसगढ़ के रहने वाले राष्ट्रीय पदाधिकारी की रीति-नीति आदिवासी विधायकों को नहीं भा रहा है। चर्चा है कि मंत्री पद के दावेदार और वरिष्ठ विधायक ज्यादा नाराज हैं। कहा जाता है फिलहाल तो राष्ट्रीय पदाधिकारी की बस्तर इलाके में तूती बोल रही है। राष्ट्रीय पदाधिकारी जिसको चाहते हैं पद मिलता है , यह सीनियर विधायकों को नागवार लग रहा है। बस्तर से अभी कवासी लखमा मंत्री और मनोज मांडवी विधानसभा उपाध्यक्ष हैं। बस्तर के ही मोहन मरकाम छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। बस्तर के सभी 12 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। बस्तर इलाके में एक ही अनारक्षित सीट है, शेष सभी ट्राइबल सीटें हैं।

प्रधानमंत्री और जांजगीर कलेक्टर

प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने 20 मई को कोरोना की स्थिति की समीक्षा के लिए देश के कुछ कलेक्टरों की वर्चुअल बैठक की। बैठक लाइव था, इसमें छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा, कोरबा,रायगढ़, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा के कलेक्टरों ने हिस्सा लिया।बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मुख्य सचिव अमिताभ जैन और दूसरे अधिकारी भी थे। प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के पांच कलेक्टरों में से जांजगीर-चांपा के कलेक्टर यशवंत कुमार से ही चर्चा की। यशवंत कुमार ने प्रधानमंत्री को जिले में कोविड की स्थिति के साथ बचाव और प्रबंधन की जानकारी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने कलेक्टर को कोरोना संक्रमण रोकने के बारे में कुछ सुझाव दिए । सुझाव और सलाह देना प्रधानमंत्री जी का विशेषाधिकार है। कुछ लोगों ने प्रचारित कर दिया कि जांजगीर-चांपा के कलेक्टर प्रधानमंत्री के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यशवंत कुमार की छवि को प्रभावित करने के लिए कुछ लोगों ने ऐसा किया। मामला कुछ भी हो, दुष्प्रचार करने वालों ने तो छत्तीसगढ़ की साख की चिंता नहीं की ।

खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में नान आईएएस एमडी

कहते हैं राज्य बनने के बाद पहली दफा छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की एमडी नान आईएएस होंगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने इंडियन पोस्टल सर्विस की अफसर रेखा शुक्ला को छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रबंध संचालक के पद पर पदस्थ किया है। रेखा शुक्ला को होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नालॉजी एण्ड एप्लाइंट न्यूट्रीशन विभाग का प्रभार भी दिया गया है। वे अभी तक इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड नई दिल्ली में महाप्रबंधक के तौर पर सेवाएं दे रही थीं। रेखा शुक्ला, स्वास्थ्य, स्कूल और तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.आलोक शुक्ला की पत्नी हैं। रेखा शुक्ला की सेवाएं राज्य सरकार ने दो साल या रिटायरमेंट के पहले तक के लिए प्रतिनियुक्ति पर ली हैं। छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में रेखा शुक्ला की पोस्टिंग के बाद आइएएस राजेश राणा राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन संघ मर्यादित के प्रबंध संचालक रह जाएंगे।

सप्लायर्स के जलवे

कहते हैं राज्य के कुछ मंत्री सप्लायर्स पर कुछ ज्यादा ही निर्भर हो गए हैं। चर्चा है कि एक मंत्री के बंगले में सप्लायर्स के लिए बाकायदा चैंबर बनवा दिया गया है। कहा जाता है जिस विभाग के मंत्री के बंगले में सप्लायर्स के लिए चैंबर बनवाया गया है , उस मंत्री के विभाग को भारत सरकार से सहायता और अनुदान की राशि खूब मिलती है। इस कारण इस विभाग में सप्लायर्स मधुमक्खी की तरह मंडराते रहते हैं , लेकिन विभाग के पुराने सप्लायर्स नए लोगों को फटकने नहीं देते। पुराने सप्लायर्स की अफसरों से भी सेटिंग हैं। माना जाता है विभाग में आने वाला नया अफसर सिस्टम में फिट नहीं होता है तो बाहर हो जाता है या बाहर कर दिया जाता है। ऐसे में सप्लायर्स के जलवे होना स्वाभाविक बात है।

मंत्री का पावरफुल पीए

कहते हैं राज्य के एक मंत्री का विशेष सहायक इतना पावरफुल हैं कि उसके बिना विभाग का कोई काम आगे नहीं बढ़ता। माना जाता है कि पहली बार मंत्री बने नेता को सरकारी कामकाज के लिए अफसरों या अपने सहायकों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है। इसका कुछ लोग फायदा भी उठा लेते हैं। चर्चा है कि विशेष सहायक को आए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं , पर मंत्री जी का भरोसा जीतकर अपनी मनमर्जी चलाना शुरू कर दिया है। कहा तो यह भी जा रहा है कि दुखी लोगों ने पीए साहब की कुछ हरकतों का स्टिंग कर लिया है और इस्तेमाल के लिए सही वक्त और मौके के इंतजार में हैं।


(लेखक, पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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