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SCO के जरिए भारत ने चीन को दो बार झुकाया

आज से शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन यानी SCO की बैठक शुरू हो रही है। PM मोदी आज दोपहर उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर पहुंचने वाले हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। एशिया के चार ताकतवर देशों के प्रमुखों के एक मंच पर आने की वजह से SCO सुर्खियों में है।

भारत को अगले साल SCO सम्मेलन के साथ ही G-20 की भी मेजबानी करनी है। इसलिए भारतीय अधिकारियों ने समरकंद में होने वाले SCO सम्मेलन के नजदीक आते ही चीन को साफ तौर पर कह दिया कि प्रधानमंत्री इस सम्मेलन में तभी हिस्सा लेंगे, जब वह LAC पर अप्रैल 2020 से ही तैनात अपनी सेनाओं को पहले की स्थिति में वापस बुला लेगा।

इस मैसेज का असर भी हुआ और SCO बैठक से ठीक एक हफ्ते पहले ही 8 सितंबर को चीन ने अपनी सेना को LAC में पूर्वी लद्दाख के हॉट-स्प्रिंग्स-गोर्गा इलाके, जिसे पैट्रोलिंग पॉइंट 15 भी कहा जाता है, से हटाना शुरू कर दिया।

SCOया शंघाई सहयोग संगठन क्या है?

ये पहला मौका है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कोविड के दौर के बाद अपने मुल्क से बाहर निकल रहे हैं।इसके साथ ही यूक्रेन युद्ध के बाद ये पहला मौका होगा जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे।ऐसे में यह जिज्ञासा लोगों के जेहन में हो रही है कि आखिर एससीओ है क्या, इसका गठन कब हुआ, इसके उद्देश्य क्या हैं और भारत को इससे क्या हासिल होगा? चलिए हम आपको एक-एक कर बताते हैं।

दरअसल इस साल जून में BRICS सम्मेलन के लिए PM मोदी चीन नहीं गए थे, जबकि कुछ दिनों बाद वह अमेरिकी अगुआई वाले QUAD देशों की बैठक में हिस्सा लेने टोक्यो चले गए थे। लिहाजा चीन नहीं चाहता था कि SCO सम्मेलन में मोदी की गैरमौजूदगी से इस संगठन के आपसी मनमुटाव का संदेश दुनिया में जाए। BRICS ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका समेत 5 देशों का संगठन है।

  • SCO से जुड़ने में भारत का एक प्रमुख लक्ष्य इसके सेंट्रल एशियाई रिपब्लिक यानी CARs के 4 सदस्यों- कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से आर्थिक संबंध मजबूत करना है।
  • इन देशों के साथ कनेक्टिविटी की कमी और चीन के इस इलाके में दबदबे की वजह से भारत के लिए ऐसा करने में मुश्किलें आती रही हैं।
  • 2017 में SCO से जुड़ने के बाद इन सेंट्रल एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापार में तेजी आई है। 2017-18 में भारत का इन चार देशों से व्यापार 11 हजार करोड़ रुपए का था, जो 2019-20 में बढ़कर 21 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया।
  • इस दौरान भारतीय सरकारी और प्राइवेट कंपनियों ने इन देशों में गोल्ड माइनिंग, यूरेनियम, बिजली और एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट्स में निवेश भी किया।
  • सेंट्रल एशिया में दुनिया के कच्चे तेल और गैस का करीब 45% भंडार मौजूद है, जिसका उपयोग ही नहीं हुआ है। इसलिए भी ये देश भारत की एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए आने वालों सालों में अहम हैं।
  • भारत की नजरें SCO के ताजा सम्मेलन के दौरान इन सेंट्रल एशियाई देशों के साथ अपने संबंध और मजबूत करने पर रहेंगी।

भारत-पाक के शामिल होने से हो जाएंगे 8 सदस्य

भारत-पाकिस्तान के सदस्य बनने के बाद एससीओ की सदस्य संख्या आठ हो जाएगी। वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि परमानेंट मेंबर बनने के बाद भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्ते भी सुधरेंगे। भारत-पाकिस्तान संगठन के संविधान का सख्ती से पालन करेंगे।

भारत को मिलेगा फायदा

यह दुनिया का पहला मिलिट्री, पॉलिटिकली और इकोनॉमिकली को-ऑपेरशन वाला ऑर्गनाइजेशन है। इसमें शामिल होने के यह मायने हैं कि अगर कोई देश इन मेंबर कंट्रीज में से किसी पर सैन्य हमला करता है तो ऑर्गनाइजेशन के सभी देश मिलकर उसका जवाब देंगे। बाहर का देश अगर हमला करे तो ऑर्गनाइजेशन पर हमला माना जाएगा।अगर पाकिस्तान भारत पर हमला कर दे तो उसके खिलाफ बाकी देश भारत की मदद करेंगे। हालांकि, यह तभी होगा जब कोई देश डायरेक्ट किसी दूसरे देश पर अटैक करे। आतंकी घटनाओं और घुसपैठ के मामलों में मदद नहीं की जाएगी।

 

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