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नवरात्रि 2021: इन दो देवियों के साथ ‘शनि’ देव की पूजा का बन रहा है विशेष योग, इन राशियों पर बरस सकती है कृपा

पंचांग के अनुसार 9 अक्टूबर 2021, शनिवार को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है. इस तिथि में मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी. तृतीया की तिथि का समापन प्रात: 7 बजकर 51 मिनट पर होगा, इसके बाद चतुर्थी की तिथि आरंभ होगी. इस तिथि में मां कूष्मांडा की पूजा की जाएगी. एक ही दिन में दो तिथियों के पड़ने के कारण इस दिन दो देवियों की पूजा का योग बना हुआ है. लेकिन इसके साथ ही साथ शनि देव की पूजा का भी विशेष संयोग बना हुआ है.

मां चंद्राघंटा की पूजा (Chandraghanta Puja)

नवरात्रि की तृतीय तिथि मां चंद्रघंटा को समर्पित है. धर्म की रक्षा और असरों का वध करने के लिए मां दुर्गा ने मां चंद्रघंटा का रूप धारण किया था. पौराणिक कथाओं के अनुसार मां चंद्रघंटा को शांतिदायक और कल्याणकारी बताया गया है. मां चंद्रघंटा के मस्तिष्क पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है. इसीलिए इन्हें मां चंद्रघंटा कहा जाता है. मां चंद्रघंटा का रूप रंग स्वर्ण के समान है. मां चंद्रघंटा देवी के दस हाथ हैं. इनके हाथों में शस्त्र-अस्त्र विभूषित हैं और मां चंद्रघंटा सिंह पर सवार हैं. मां चंद्रघंटा की पूजा अलौकिक ज्ञान की प्राप्ति में सहायक है. इसके साथ ही साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है.

मां चंद्रघंटा का मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:।।

मां कूष्मांडा की पूजा (Kushmanda Devi Puja)

शास्त्रों में मां कूष्मांडा की पूजा आयु, यश, बल और स्वास्थ्य में वृद्धि करने वाली मानी गई है. मां कूष्मांडा की विधि पूवर्क पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं. मां कूष्मांडा संसार को अनेक कष्टों और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं. इस दिन दुर्गा चालीसा और मां दुर्गा की आरती करने से मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कूष्मांडा देवी को अष्टभुजा भी कहा जाता है. मां की आठ भुजाएं हैं. मां ने अपने हाथों में धनुष-बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमंडल धारण किया हुआ है. वहीं एक और हाथ में मां के हाथों में सिद्धियों और निधियों से युक्त जप की माला भी है. कूष्मांडा देवी की सवारी सिंह है.

मां कूष्मांडा का मंत्र

ॐ देवी कूष्माण्डायै नम:॥

शनि देव की पूजा (Shani Dev)

शनिवार का दिन शनि देव की पूजा लिए उत्तम माना गया है. शनि देव को शांत रखने से परेशानियों से मुक्ति मिलती है. कार्यो में आने वाली बाधा दूर होती है. वही जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैया चल रही है. उन्हें भी राहत मिलती है. शनिवार के दिन शनि चालीसा, शनि मंत्र और शनि आरती से लाभ मिलता है. इसके साथ ही शनि देव से जुड़ी चीजों का दान करने से भी शनि देव प्रसन्न होते हैं. पूजा और दान करने से मिथुन, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों को विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है.

शनि का मंत्र

ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥

 

 

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