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जेआरडी टाटा से रतन टाटा तक, टाटा की एयर इंडिया बदलाव की ओर बढ़ रही है

टाटा की एयरइंडिया बदलाव की ओर बढ़ रही है। ये बदलाव न केवल फ्लाइट्स के टेकऑफ में, बल्कि अब क्रू मेंबर्स के मेकओवर में भी देखने को मिलेगा। वर्ल्ड क्लास एयरलाइंस बनने की दिशा में बढ़ रही एयरइंडिया ने अपने क्रू मेंबर्स के ग्रूमिंग के लिए नई गाइडलाइंस जारी की है। इसमें फ्लाइट अटेंडेंट के पहनावे, मेकअप, लुक्स, वेट को लेकर एयर इंडिया ने क्या करें और क्या न करें की पूरी लिस्ट जारी की है। हालांकि ये पहली बार नहीं है, टाटा अपनी एयरइंडिया के क्रू मेंबर्स के लुक्स और पहनावे को लेकर हमेशा से सजग रहा है। अगर इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो जेआरडी टाटा जब एयरलाइंस का संचालन करते थे, उस वक्त भी क्रू मेंबर्स के पहनावे का खास ख्याल रखते थे।

जेआरडी टाटा को साल 1929 में पायलट का लाइसेंस मिला

जेआरडी टाटा देश के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें साल 1929 में पायलट का लाइसेंस मिला। साल 1932 में उन्होंने टाटा एयरलाइस की शुरुआत की। एयरलाइंस के क्रू मेंबर्स के ड्रेस का खास ख्याल रखा गया। उस दौर में भी टाटा एयरलाइंस के क्रू मेंबर्स वेस्टर्न कंपने पहनते थे। एयर होस्टेस ब्लेजर के साथ स्कर्ट पहनती थीं। आपको बता दें कि उस समय अधिकांश एयर होस्टेस या तो यूरोपीय मूल की होती थीं या फिर एंग्लो इंडियन होती थीं। क्रू मेंबर्स के ड्रेस और ग्रूमिंग को लेकर जेआरडी टाटा का मामना था कि उन्हें अपने मेकअप और कपड़ों को लेकर कुछ आजादी होनी चाहिए। उनकी ड्रेसिंग उनके व्यक्तित्व को दर्शाने वाली होनी चाहिए। क्रू मेंबर्स को अपनी ग्रूमिंग के समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आकर्षक और हास्यास्पद के बीच उन्हें रेखा कहां खींचनी है।

साल 1953 में एयर इंडिया के क्रू मेंबर्स का पहनावा फिर से बदल दिया गया

साल 1953 में जब एयरलाइन सरकार के पास लौटी तो एयर इंडिया के क्रू मेंबर्स का पहनावा फिर से बदल दिया गया। एयर होस्टेस स्कर्ट के बजाए साड़ी और घाघरा-चोली पहनने लगीं। फ्लाइट अटेंडेंट की ड्रेसिंग ऐसी रखी गई, जिससे भारतीय परंपरा की झलक दिखे। धीरे-धीरे साड़ी और वेस्टर्न दोनों का विक्लप दिया जाने लगा। न केवल कपड़े बल्कि एयर होस्टेस को अपने मेकअप, हेयरस्टाइल का खास ख्याल रखना पड़ता है।

 

 

 

 

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