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Harish Rana Euthanasia: AIIMS में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया जारी, धीरे-धीरे हटाए जा रहे जीवन रक्षक उपकरण

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दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में गाजियाबाद निवासी हरीश राणा के मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की प्रक्रिया जारी है। मेडिकल टीम की निगरानी में चरणबद्ध तरीके से जीवन रक्षक उपकरण हटाए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, हरीश राणा को अब किसी प्रकार का ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया जा रहा है। अब तक उन्हें ट्यूब के माध्यम से पोषण और हाइड्रेशन दिया जा रहा था, जिसे भी बंद कर दिया गया है। बताया गया है कि मंगलवार से पानी देना भी रोक दिया जाएगा, जो इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि पोषण और हाइड्रेशन की ट्यूब को हटाया नहीं जाएगा, बल्कि उसे कैप कर दिया जाएगा।

सोमवार को एम्स में डॉक्टरों की एक विशेष बैठक हुई, जिसमें पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। 5 से 9 विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है और हर कदम को कानूनी दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू किया जा रहा है।

इस पूरे मामले में भारत का सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। हालांकि एम्स प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर कोई बयान जारी नहीं किया है।

क्या है पूरा मामला

हरीश राणा 2013 में एक हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल हो गए थे। चौथी मंजिल से गिरने के कारण उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया हो गया, जिससे उनके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वे लंबे समय से बिस्तर पर थे।

असहनीय पीड़ा और शारीरिक अक्षमता को देखते हुए उनके परिवार ने पहले हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की मांग की, जिसे 2025 में खारिज कर दिया गया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 11 मार्च 2026 को कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी।

फिलहाल एम्स में यह प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील माहौल में जारी है, जहां चिकित्सा, कानून और मानवीय पहलुओं के बीच संतुलन बनाकर हर कदम उठाया जा रहा है।