आज का पंचांग 21 जनवरी :आज चैत्र कृष्ण तृतीया तिथि, जानें पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का समय

शनिवार, 21 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल तृतीया के अवसर पर ‘मत्स्य जयंती’ और ‘गणगौर पूजा’ का पावन पर्व मनाया जाएगा। आज भगवान विष्णु के प्रथम अवतार का पूजन और माता पार्वती व भगवान शिव की आराधना सौभाग्य और सुख-समृद्धि लेकर आती है। आज चंद्रदेव मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में रहेंगे, जिसके स्वामी केतु हैं। अश्विनी नक्षत्र के प्रभाव से आज आपमें गजब की फुर्ती और आत्मविश्वास बना रहेगा, जो जीवन के सही संचालन में सहायक होगा।
आज इन्द्र योग का संयोग है, जो बड़ी इच्छाएं पूरी करने और कार्यों में सफलता दिलाने के लिए शुभ है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा पूरी सहजता से करें। आज के दिन अपनी तेज बुद्धि का सही दिशा में उपयोग करें और यदि मन में थोड़ा गुस्सा आए, तो उसे केवल सुधार के संकेत के रूप में देखें। शुभ कार्यों के लिए दोपहर 12:04 से 12:53 बजे तक के अभिजीत मुहूर्त का लाभ उठाएं। सुबह राहुकाल के समय सावधानी रखना ठीक रहेगा।
महत्वपूर्ण विवरण
तिथि शुक्ल तृतीया – रात्रि 11:56 बजे तक, फिर चतुर्थी
योग इन्द्र – सायं 07:01 बजे तक
करण तैतिल – दोपहर 01:14 बजे तक
करण गरज – रात्रि 11:56 बजे तक
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय प्रातः 06:24 बजे
सूर्यास्त का समय सायं 06:33 बजे
चंद्रोदय का समय प्रातः 07:35 बजे
चंद्रास्त का समय रात्रि 09:06 बजे
सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: मीन राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: मेष राशि में स्थित हैं
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक
अमृत काल सायं 05:58 बजे से सायं 07:27 बजे तक
आज के अशुभ समय
राहुकाल प्रातः 09:26 बजे से प्रातः 10:57 बजे तक
गुलिकाल प्रातः 06:24 बजे से प्रातः 07:55 बजे तक
यमगण्ड दोपहर 02:00 बजे से सायं 03:31 बजे तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव अश्विनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
अश्विनी नक्षत्र: 22 मार्च रात्रि 12:37 बजे तक
स्थान: 0° मेष राशि से 13°20’ मेष राशि तक
नक्षत्र स्वामी: केतु
राशि स्वामी: मंगलदेव
देवता: अश्विनी कुमार (देवताओं के चिकित्सक)
प्रतीक: घोड़े का सिर
सामान्य विशेषताएं: आकर्षक, सुंदर, आभूषण-प्रेमी, तेज बुद्धि, शांत, साहसी, बलवान, स्वस्थ, फुर्तीला, आत्मविश्वासी, खेल-प्रेमी, आक्रामक, क्रोधी।
मत्स्य जयंती और गणगौर पूजा 2026
मत्स्य जयंती मुहूर्त: दोपहर 01:41 से शाम 04:07 तक (अवधि: 02 घंटे 26 मिनट)
तृतीया तिथि प्रारंभ: 21 मार्च, 2026 को रात 02:30 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 21 मार्च, 2026 को रात 11:56 बजे
मत्स्य जयंती का महत्व
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के प्रथम अवतार ‘मत्स्य अवतार’ के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। सत्य युग में जब जल प्रलय की स्थिति बनी, तब श्री हरि ने मछली का रूप धारण कर राजा सत्यव्रत, प्रजापतियों और सप्तऋषियों की रक्षा की थी। यह पावन दिन अक्सर चैत्र नवरात्रि और गणगौर उत्सव के साथ आता है। इस अवसर पर विष्णु मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और भक्त पूरी सहजता से भगवान के इस सुरक्षाकारी रूप का स्मरण करते हैं।
गणगौर पूजा का उत्सव
राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में गणगौर का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यहाँ ‘गण’ भगवान शिव के लिए और ‘गौर’ माता पार्वती के लिए प्रयुक्त होता है। इस दिन अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए ईसर जी और गौरा माता की आराधना करती हैं। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन केवल एक बार दूध पीकर व्रत रखने से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है।
महिलाएं मिट्टी से गौरा जी की सुंदर प्रतिमाएं बनाकर उनका श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक गीतों के साथ विधि-विधान से पूजन करती हैं। यह उत्सव अटूट विश्वास और परिवार के कल्याण की भावना को दर्शाता है।





