‘री-नीट से पहले शॉर्ट फिल्म ‘तमाशा’ रिलीज: एग्जाम प्रेशर और सिस्टम की खामियों पर केंद्रित है कहानी

रायपुर। देश में आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली ‘री-नीट’ परीक्षा से ठीक पहले, नीट परीक्षा व्यवस्था और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को केंद्र में रखकर बनाई गई नॉन-कमर्शियल शॉर्ट फिल्म ‘तमाशा’ को रिलीज कर दिया गया है। यह फिल्म किसी व्यक्ति विशेष पर केंद्रित न होकर पूरी तरह से विषय-वस्तु पर आधारित है, जो वर्तमान समय में प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर मध्यवर्गीय परिवारों और छात्रों के संघर्ष की कड़वी हकीकत को सामने लाती है।
यह फिल्म एक नए दौर के सिनेमा का भी प्रतिनिधित्व करती है, जहां विभिन्न आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्लेटफॉर्म्स और टूल्स के साथ-साथ इंसानी संवेदनशीलता और रचनात्मकता का एक अनूठा समन्वय देखने को मिलता है।
यदा कदा यूट्यूब चैनल पर रिलीज शॉर्ट फिल्म ‘तमाशा’ मुख्य रूप से इस बात को रेखांकित करती है कि किस तरह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी -एनटीए की परीक्षा प्रणाली और समाज की उम्मीदें मिलकर एक छात्र के जीवन को तनावपूर्ण बना देती हैं। कहानी में ‘नव्या’ नाम की एक नीट एस्पिरेंट और उसके पिता ‘रमेश’ के माध्यम से उस मानसिक द्वंद्व को दिखाया गया है, जिससे परीक्षा के दिनों में हर परिवार गुजरता है।
फिल्म में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या नाटकीय तत्वों से बचते हुए पूरी तरह से वास्तविक मुद्दों को उठाया गया है। परीक्षा केंद्रों के बाहर की अव्यवस्था, सुरक्षा जांच और सख्त ड्रेस कोड के नाम पर परीक्षार्थियों के साथ होने वाला व्यवहार, जैसे कि कपड़ों की आस्तीन काटना या उन्हें नंगे पैर परीक्षा हॉल में भेजने जैसी संवेदनशील और सामयिक घटनाओं को फिल्म में प्रमुखता से शामिल किया गया है। यह कंटेंट 21 जून को होने वाली री-नीट परीक्षा के वर्तमान परिदृश्य में माता-पिता और नीति-निर्माताओं के सामने कई जरूरी सवाल खड़े करता है।
यह फिल्म पूरी तरह से गैर-व्यावसायिक (Non-Commercial) और सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। फिल्म से संबंधित आधिकारिक विवरणी इस प्रकार है:
शीर्षक: तमाशा (शॉर्ट फिल्म)
श्रेणी: नॉन-कमर्शियल (सामाजिक-सामयिक विषय)
प्रस्तुति: यदा कदा पब्लिकेशंस, रायपुर
निर्देशन, लेखन एवं संपादन: केवल कृष्ण
पार्श्व संगीत: अमित प्रधान
विशेष सहयोग: देवेंद्र शुक्ला





