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जेल से निकलकर चैतन्य बघेल ने किया भावुक पोस्ट, जेल में बिताए 168 दिनों में किया आत्ममंथन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे ने जमानत मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक और विचारोत्तेजक ट्वीट साझा किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने जेल में बिताए 168 दिनों को आत्ममंथन, अध्ययन और माटी की सेवा की चेतना से जोड़ते हुए इसे अपने जीवन का निर्णायक दौर बताया है।

उन्होंने लिखा कि 18 जुलाई 2025, उनका 38वां जन्मदिन उनके जीवन का सबसे खास दिन बन गया, क्योंकि इसी दिन से उनका वह सफर शुरू हुआ जिसने उन्हें राजनीति, राजनीतिक षड्यंत्रों और सत्ता के असली चेहरे से रूबरू कराया। पिता के मुख्यमंत्री रहने के बावजूद खुद को राजनीति से दूर रखने वाले व्यक्ति को इन 168 दिनों ने राजनीति की कठोर सच्चाइयों से परिचित कराया।

“सलाखों के भीतर मिली सोचने की आज़ादी”

ट्वीट में उन्होंने बताया कि जेल के दौरान उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की दृढ़ता, जवाहरलाल नेहरू की शालीनता और महात्मा गांधी के सत्य व अहिंसा के सिद्धांतों को पढ़ा और समझा। उन्होंने लिखा कि इन किताबों ने उन्हें चारदीवारी के भीतर रहते हुए भी अपनी मिट्टी की सेवा पर सोचने की आज़ादी दी।

“मिट्टी की सेवा की कीमत चुकानी पड़ती है”

उन्होंने स्वीकार किया कि जो भी जल-जंगल-जमीन और छत्तीसगढ़ी अस्मिता की बात करता है, उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ती है — प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से। यह कीमत उन्होंने और उनके परिवार ने भी चुकाई, लेकिन जेल की चारदीवारी उन्हें झुकना नहीं सिखा पाई।

“संविधान के आगे हर षड्यंत्र विफल होता है”

अपने संदेश में उन्होंने क़ानून और संविधान पर भरोसा जताते हुए कहा कि चाहे षड्यंत्र कितना भी जटिल क्यों न हो, अंततः उसे संविधान के आगे झुकना ही पड़ता है।

बेटे विवांश के जन्मदिन पर भावुक समापन

उन्होंने लिखा कि यह 168 दिनों का सफर उनके जन्मदिन से शुरू होकर आज उनके बेटे विवांश के जन्मदिन पर समाप्त हो रहा है। हालांकि जेल का यह अध्याय खत्म हो गया है, लेकिन इससे मिली सीख और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा की प्रेरणा उनके साथ हमेशा रहेगी।

ट्वीट के अंत में उन्होंने लिखा—

“जय हिन्द, जय छत्तीसगढ़ महतारी