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राजिम कुंभ कल्प में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग दे रहा आधुनिक खेती की जानकारी

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० पाम फल ने खींचा किसानों का ध्यान, कृषि स्टॉल पर उमड़ रही जिज्ञासुओं की भीड़

राजिम। राजिम कुंभ कल्प मेला में इस वर्ष कृषि एवं उद्यानिकी विभाग का स्टॉल किसानों और मेलार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। तिलहन, दलहन और सब्जी फसलों की प्रदर्शनी के साथ पाम (ऑयल पाम) की खेती संबंधी जानकारी ने लोगों को खासा उत्सुक किया है। पाम के फल को पहली बार करीब से देखकर कई लोग अचंभित नजर आए और इसके व्यावसायिक लाभ की जानकारी लेते दिखे।

ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी युगल किशोर साहू ने बताया कि पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा प्रति हेक्टेयर विभिन्न मदों में अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसमें फेंसिंग हेतु 54,485 रुपये, अंतरवर्ती फसल के लिए 10,250 रुपये, रखरखाव हेतु 6,550 रुपये तथा ड्रिप सिंचाई के लिए 22,765 रुपये तक का शासकीय अनुदान दिया जाता है। हालांकि एक एकड़ में बोरिंग के लिए अनुदान का प्रावधान नहीं है। वर्तमान में छुरा ब्लॉक में लगभग 11 एकड़ क्षेत्र में पाम की खेती की जा रही है।

अधिकारी ने बताया कि पाम का पौधा कंपनियों द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है तथा उत्पादित फल को कंपनी 17 रुपये प्रति किलो के समर्थन मूल्य पर खरीदती है। पाम के पौधे में लगभग चार वर्ष बाद फल लगना शुरू होता है, इसलिए किसान प्रारंभिक वर्षों में दलहन, तिलहन एवं सब्जियों की अंतरवर्ती खेती कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। पाम से खाद्य तेल (एडिबल ऑयल) का उत्पादन होता है, जिससे इसकी बाजार में निरंतर मांग बनी रहती है।
विभाग द्वारा स्टॉल में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जैविक खेती प्रोत्साहन एवं कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा किसानों के कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी जा रही है। साथ ही किसानों को ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिस्टम पर अनुदान, फलदार पौधों के रोपण संबंधी योजनाओं से अवगत कराया जा रहा है। मेला परिसर में लगे इस स्टॉल के माध्यम से किसान आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर प्रेरित हो रहे हैं।