राजिम कुंभ कल्प के 13वें दिन मुख्य मंच पर बिखरी लोकसंस्कृति की छटा, “चोला माटी के हे राम” सुनकर दर्शक हुए भावुक
राजिम। राजिम कुंभ कल्प के 13वें दिन मुख्य मंच पर लोककला, पंडवानी और छत्तीसगढ़ी गीतों की ऐसी अविरल धारा बही कि दर्शक देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पंडवानी गायिका प्रभा यादव की वेदमती शैली की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने द्रौपदी विवाह प्रसंग को “वृंदावन बिहारी लाल की जय” के उद्घोष और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की संगत के साथ किया।
इसके बाद नवोदय विद्यालय पांडुका के छात्र-छात्राओं ने बारामासी गीत प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की झलक दिखाई। “खन-खन बैला के घुंघरू बाजे रे” गीत पर आधारित नृत्य ने पशु-प्रेम और ग्रामीण संस्कृति को मंच पर साकार कर दिया। छत्तीसगढ़ की पूनम विराट तिवारी और उनकी पुत्री दिव्या तिवारी ने “अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार” प्रस्तुत कर प्रदेश की गौरवगाथा सुनाई। “जय बोलो नारायण”, “गणपति के चरण मनाबो” और लोकप्रिय गीत “महुआ झरे रे” पर दर्शक झूम उठे। “मटके रे मोर आंखी” और “चंदा-चंदा पूनम के चंदा” ने तालियों की गड़गड़ाहट बटोरी।

पूनम विराट और दिव्या तिवारी ने अंतिम प्रस्तुति “चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा” की दी। इस गीत के माध्यम से यह समझा गया कि जब शरीर नश्वर है, तब हमें सांसारिक मोह-माया में उलझने के बजाय सत्कर्म, भक्ति, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। मुख्यमंच पर कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति छॉलीवुड अभिनेत्री उपासना वैष्णव और हास्य कलाकार पप्पू चंद्राकर ने दी। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोट-पोट कर दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय, राजिम विधायक रोहित साहू, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि ने आंनद लिया और कलाकारों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन पतंजल मिश्रा, निरंजन साहू, दुर्गेश तिवारी और मनोज सेन ने किया।





