नगरीय प्रशासन द्वारा तीसरी बार फिर जारी किया गया महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक के प्रॉक्सी प्रतिनिधि के रोक के संबंध में आदेश
० आदेश के बावजूद अधिकारियों द्वारा गंभीरतापूर्वक कार्यवाही नहीं की जा रही
० सरकार व सत्ताधारी पार्टी का दबाव आदेश के पालन में अड़चन
दिलीप गुप्ता
सरायपाली। महिलाओं के सशक्तिकरण व उनको राजनीतिक रूप से मजबूत किये जाने वी उनके कार्यों में उनके परिजनों के हस्तक्षेप को रोके जाने हेतु नगरीय प्रशासन द्वारा तीसरी बार आदेश जारी किया गया है । यह आदेश राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप व आदेश पुनः जारी किया गया । संचनालय द्वारा एक ही विषय को लेकर तीसरी बार आदेश जारी किया जाना ही यह दर्शाता है कि संबंधित अधिकारियों व विभाग द्वारा जारी आदेश को मूल भावनाओं के अनुरूप आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है ।यह कृत्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ ही अपने उच्च अधिकारियों के आदेश व निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जाना भी है जो एक गंभीर व चिंताजनक भी है ।
देश में आधी आबादी के नाम से पहचाने जाने वाली महिला आबादी को सक्रिय राजनीति , सामाजिक व अन्य गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाये जाने हेतु आरक्षण की सुविधाएं भी प्रदान की गई है ताकि वे प्रत्येक क्षेत्र में खासकर चुने हुवे जनप्रतिनिधियों के रूप में अपने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में सक्रिय भागीदारी निभा सके । जिससे उनके सक्रियता से वे अनुभव व कार्य किए जाने की क्षमता के साथ साथ मानसिक, सामाजिक व राजनैतिक क्षेत्र में पहचान बना कर अपने अपने क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास भी कर सके । पुरुषों के साथ वे कंधे से कंधे मिलकर बराबर चल सकें । किंतु सरकार व महिलाओं की इस भावनाओं व उद्देश्यों को स्वयं चुने हुवे महिलाएं , महिलाओं के परिजन व संबंधित अधिकारियों द्वारा ही पलीता लगाया जा रहा है जिससे सरकार के महिला सशक्तीकरण की भावनाओं को आघात लग रहा है ।
इस संबंध में संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा क्र./शा-1/विविध/7062/2025/12541 दिनांक 3-2-26 को पुनः एक पत्र राज्य के समस्त आयुक्त नगर पालिक निगम व समस्त मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद्/नगर पंचायत को पत्र जारी करते हुवे कहा गया है कि नगरी निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार /नातेदार को प्रॉक्सी प्रतिनिधि/लायज़न पर्सन के नियुक्ति पर रोक के संबंध में शासन के पत्र क्र. VIGI-2904/2/2025-UAD दिनांक 12.12.2025 के तहत समस्त नगरीय निकायों को निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार / नातेदार को प्रॉक्सी प्रतिनिधि/लायज़न पर्सन के नियुक्ति पर रोक हेतु निर्देशित किया गया है। उपरोक्त संबंध में अपने निकायों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार/नातेदार जो नामांकित जनप्रतिनिधि हैं, के संबंध में जानकारी निर्धारित प्रपत्र-01 में अविलंब क्षेत्रीय संयुक्त संचालक को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किये जाने हेतु आदेशित किया गया है ।
ज्ञातव्य हो कि प्रपत्र 01 एक तह का प्रोफार्मा होता है जो पत्र के साथ संलग्न किया जाता है । इस पत्र में संबंधित महिला जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों /नातेदारों व परिजनों के नामों की जानकारी दी जानी होती है ताकि सरकार व विभागों के पास उनकी जानकारी उपलब्ध हो सके ।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा महिलाओं के कार्यों में उनके पति , पुत्र व अन्य परिजनों द्वारा लगातार किए जा रहे हस्तक्षेप को संज्ञान में लेते हुवे सरकारवको इसे रोके जाने हेतु आदेशित किया गया था। सरकार व संचनालय द्वारा पूर्व में इस संबंध में पहली बार पत्र क्रमांक 4426/3946/18/2010 दिनांक 20/08/2010 तथा viji 2904/2/2025/UAD दिनांक 12/12/2025 के तहत दो बार इस दूषित प्रॉक्सी प्रचलन को रोके जाने हेतु आदेश जारी किया गया था । संचनालय द्वारा विगत 13/2/2026 को पुनः तीसरी बार आदेश जारी करने के पीछे यह स्पष्ट उद्देश्य है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा पूर्व में दिये गये विभागीय आदेशों व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देशों का शब्दशः पालन नहीं किया गया । अब अभी कुछ दिनों पूर्व किए गये आदेश का पालन किया जायेगा या होगा इसकी कोई गारंटी विभाग या सरकार लेगी यह आने वाला समय बतायेगा ।
ज्ञातव्य हो कि आज भी सरायपाली के अनुविभागीय क्षेत्र में नगरपालिका , ग्रामपंचायतों , जनपद पंचायतों व जिला जनपद में चुने हुवे महिला जनप्रतिनिधियों को स्थानीय स्तर पर आयोजित शासकीय , सामाजिक , धार्मिक , खेलकूद , सांस्कृतिक कार्यक्रमों , बैठकों व अन्य गतिविधियों में नाम तो इन महिलाओ का होता है पर कार्यक्रमों में महिलाओं के स्थान पर उनके पति , पुत्र व अन्य परिजन ” प्रतिनिधि ” के रूप में शामिल होते हैं । कार्यक्रमों में उनका सम्मान , स्वागत , भाषण भी इसी नाम से किया जाता है ।
अभी एक विभाग द्वारा संभागीय स्तर पर विभिन्न स्थानों पर रजत जयंती के अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था जिनमें अधिकांश कार्यक्रमों में यही लोग ” प्रतिनिधि ” के रूप में शामिल हुवे थे । यहां तक कि उनकी वाहनों , नेम प्लेटो , बैनरों , फ्लेक्सो , आमंत्रण , निमंत्रण पत्रों व अखबारों में आने वाले विज्ञापनों में भी संबंधित महिलाओं के “प्रतिनिधि ” के रूप में इनका नाम प्रकाशित होते दिखाई देता है । स्वयं महिलाएं ऐसे कार्यक्रमों में न आती हैं न उन्हें आने दिया जाता है । ऐसे में महिला सशक्तीकरण का उद्देश्य कैसे सफल होगा । सबसे गंभीर सवाल यह है कि 2-2 बार इस प्रक्रिया को रोके जाने हेतु आदेश पारित किये जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा इसे गंभीरता से रोक न लगाकर स्वयं लगातार गलती कर रहे हैं । विभिन्न विभागो द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में स्वयं इन प्रतिनिधियों पर रोक लगाए जाने के स्थान पर उनका बाकायदा स्वागत , सत्कार , भाषण ,सम्मान आदि किया जाता है । जब अधिकारियों द्वारा ही शासकीय आदेशों की धज्जियां उड़ाई जायेगी तो कथित प्रॉक्सी/ लायजन पर्सन/पति /पुत्र/ नातेदार /रिश्तेदार प्रतिनिधियों पर शासन के मंशानुसार रोक कैसे लग पाएगी व निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों का मान , सम्मान , अनुभव , सक्रियता व महिला सशक्तीकरण का उद्देश्य कैसे सफल हो पायेगा।





