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Chaitra Navratri 2026 3rd Day Puja : आज नवरात्रि का तीसरा दिन, मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए जानें पूजा विधि और भोग मंत्र

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चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि मां चंद्रघंटा का रुप अत्यंत शांत, सौम्य और ममतामयी माना जाता है। जो अपने भक्तों को सुख समृद्धि और शांति प्रदान करता है। इस दिन विशेष पूजा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा से भौतिक सुखों में वृद्धि होती है। साथ ही समाज में आपका प्रभाव बढ़ता है। आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग, मंत्र और आरती विस्तार से।

मां चंद्रघंटा पूजा विधि
1) सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे और स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2) इस दिन मां चंद्रघंटा को लाल या पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
3) अब सबसे पहले मां चंद्रघंटा को कुमकुम का तिलक करें और कुछ अक्षत भी लगाएं।
4) मां चंद्रघंटा को पीले रंग को फूल अर्पित करें और हाथ जोड़कर मां से अपने मन की मुराद बोलें।
5) मां चंद्रघंटा को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाया जाता है। आप केसर युक्त खीर का भी भोग लगा सकते हैं।
6) पूजा के दौरान मां के मंत्रों का जप करें। इसके बाद मां को भोग लगाएं।
7) साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ जरुर करें और अंत में मां चंद्रघंटा की आरती करें।

मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग
मां चंद्रघंटा को पीले रंग की चीजों का भोग लगाया जाता है। पीले रंग की मिठाई। केसर से बनी खीर का भोग लगाना सर्वोत्तम माना जाता है। इसके अलावा पंचमेवा का भोग जरुर लगाना चाहिए। माता के भोग में मिसरी जरुर शामिल करें।

मां चंद्रघण्‍टा का पूजा मंत्र
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
रंग, गदा, त्रिशूल,चापचर,पदम् कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥

इस मंत्र का जप कम से कम 7, 21, 51 या 108 बार जरुर करें।