अंबिकापुर हिरण मौत मामला: अवैध जू संचालन पर उठे सवाल, उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

रायपुर। Ambikapur स्थित Sanjay Vatika में 15 हिरणों की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कुत्तों के हमले में मारे गए इन वन्यजीवों में संरक्षित प्रजातियों के 2 चौसिंगा, 7 चीतल और 6 बार्किंग डियर शामिल हैं। इस घटना को लेकर रायपुर निवासी Nitin Singhvi ने वन विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सिंघवी ने आरोप लगाया है कि संजय वाटिका को “रेस्क्यू सेंटर” बताकर अधिकारियों द्वारा वास्तविक स्थिति छिपाई जा रही है। उनका कहना है कि वन्यजीव (संरक्षण) कानून के तहत रेस्क्यू सेंटर के लिए भी Central Zoo Authority की मान्यता अनिवार्य है, जो यहां नहीं ली गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह केवल रेस्क्यू सेंटर है, तो यहां वन्यजीवों की संख्या 30 से अधिक कैसे हो गई और संरक्षित प्रजातियों को लंबे समय तक क्यों रखा गया। साथ ही, वहां नीलगाय जैसे अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।
सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा टिकट लेकर इस स्थान को अवैध रूप से जू की तरह संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
मामले को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने राज्य के अन्य स्थानों पर भी सवाल उठाए। Barnawapara Wildlife Sanctuary, Udanti Sitanadi Tiger Reserve और सरगुजा क्षेत्र में संचालित विभिन्न रेस्क्यू और ब्रीडिंग सेंटरों की वैधता पर भी उन्होंने प्रश्न खड़े किए।
सिंघवी ने मांग की है कि प्रदेश में संचालित सभी ऐसे केंद्रों की जांच की जाए और बिना मान्यता के चल रहे संस्थानों को बंद कर वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाए। साथ ही, उन्होंने वन विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य में कितने स्थानों पर अवैध रूप से जू या रेस्क्यू सेंटर संचालित हो रहे हैं।





