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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026: “नेक्स्ट जेनरेशन GST 2.0” पर वैश्विक मंथन

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रायपुर। मैट्स विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज़ द्वारा 23–24 मार्च 2026 को “नेक्स्ट जेनरेशन GST 2.0: इसके वैश्विक प्रभाव” विषय पर द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सिविल लाइंस स्थित न्यू कन्वेंशन हॉल एवं सर्किट हाउस में गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ।

सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भाग लेकर आधुनिक कर प्रणाली, वैश्विक आर्थिक प्रभावों और नीतिगत दृष्टिकोणों पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना एवं राष्ट्रगान के साथ हुई। संयोजक डॉ. उमेश गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इस अवसर पर कुलाधिपति गजराज पगारिया, कुलपति प्रो. (डॉ.) के.पी. यादव, डायरेक्टर जनरल Priyesh Pagariya, रजिस्ट्रार Gokulananda Panda, विशिष्ट अतिथि शैलेंद्र देशमुख, मुख्य वक्ता वैभव क्षत्रिय तथा मुख्य अतिथि टंकराम वर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में GST 2.0 को राष्ट्रीय एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह प्रणाली कर ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पारदर्शिता और निवेश को भी बढ़ावा देगी।

सम्मेलन के दौरान स्मारिका का विमोचन किया गया तथा अतिथियों को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया। उद्योग जगत से जुड़े सुरेश केसवानी का ऑनलाइन व्याख्यान भी आयोजित हुआ, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।

तकनीकी सत्रों में गहन विमर्श

प्रथम दिन के तकनीकी सत्रों में डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव और डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। डॉ. M.D. Yousuf का ऑनलाइन कीनोट व्याख्यान विशेष आकर्षण रहा।

दूसरे दिन डॉ. देवाशीष मुखर्जी और डॉ. अशोक कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में सत्र आयोजित हुए। डॉ. N.K. Rajagopal और डॉ. संतोष कुमार वर्मा ने GST 2.0 के वैश्विक प्रभावों पर अपने विचार साझा किए। वहीं डॉ. अशोक कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में एक अन्य सत्र में विषयगत चर्चा हुई।

समापन सत्र में विशेषज्ञों के विचार

समापन सत्र में अशोक कुमार अग्रवाल, प्रो. डॉ. संजीव पराशर और मुख्य अतिथि विजय कुमार गोयल ने सम्मेलन की शैक्षणिक प्रासंगिकता और GST 2.0 के भविष्य पर अपने विचार व्यक्त किए।

अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और अतिथियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मेलन शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच सार्थक संवाद और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।