Navratri Day 7 : आज चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें भोग, मंत्र और देवी का स्वरूप

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन का खास महत्व बताया गया है। देवी का सातवां स्वरूप कालिका यानी काले रंग है। मां कालरात्रि को शुभंकरी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना करने से साधक को विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है। मां के इस स्वरूप से सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो सकती है। इसीलिए तंत्र-मंत्र के साधक मां कालरात्रि की विशेष रूप से पूजा करते हैं। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और देवी का स्वरूप
मां कालरात्रि का स्वरूप कैसा है?
‘एक वेधी जपाकरर्णपूरा नग्ना खरास्थित, लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभयुक्तशरीरिणी।
वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकारी।’
दुर्गा मां का सातवां स्वरूप कालिका यानी काले रंग का है। मां कालरात्रि के विशाल केश हैं जो चारों दिशाओं में फैले हुए हैं। उनकी चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं। मान्यता है की देवी भगवान शिव के अर्ध्दनारीशवर रूप को दर्शाती हैं। माता की चार भुजाएं हैं जिनमें से खड्ग, कांटा और गले में माला मौजूद है। मां कालरात्रि के नेत्रों से अग्नि की वर्षा होती है। मां का एक हाथ ऊपर की ओर वर मुद्रा में है और दूसरा हाथ नीचे अभय मुद्रा में है। माता कालरात्रि के तीन नेत्र और सवारी गदर्भ है। देवी को शुभंकरी, महायोगीश्वरी और महायोगिनी के नाम से भी जाना जाता है।
मां कालरात्रि मंत्र
ओम कालरात्र्यै नम:।
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।
मां कालरात्रि की पूजा विधि
0 चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात साफ वस्त्र धारण करें। फिर, पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें।
0 एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें और उस पर लाल कंबल का आसन बिछाएं। माता कालरात्रि की प्रतिमा या मूर्ति आसन पर रखें।
0 देवी के सामने घी का दीपक अवश्य जलाएं और उन्हें रोली, अक्षत, गुड़हल के फूल आदि जरूर अर्पित करें।
0 सभी सामग्री मां कालरात्रि को अर्पित करने के पश्चात विधि-विधान से आरती व पूजा करें। साथ ही, पूरे परिवार के साथ माता के जयकारे लगाने चाहिए।
0 मां कालरात्रि की आरती में कपूर जरूर शामिल करना चाहिए और उन्हें गुड़ का भोग लगाएं। इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए।
0 मां कालरात्रि की पूजा में उनके मंत्रों का जाप अवश्य करें। साथ ही, दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं।
मां कालरात्रि का भोग
चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ और इससे बनी चीजों का भोग लगाना उत्तम माना गया है। आप चाहें तो देवी को मालपुए का भोग भी लगा सकते हैं। मान्यता है की ऐसा करने से मां कालरात्रि अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण कर सकती हैं।





