छत्तीसगढ़ में नया धर्म स्वातंत्र्य कानून पर राज्यपाल ने किए हस्ताक्षर ,धर्मांतरण पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज नया धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू हो गया है। राज्यपाल रमेन डेका ने धर्मांतरण रोकने वाले विधेयक पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद अब प्रदेश में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कानून के तहत अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माने तक बढ़ सकती है। सामूहिक धर्मांतरण की स्थिति में सजा और भी कठोर होगी, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना तय किया गया है।
धर्मांतरण कानून पर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि उम्मीद है कि कानून का उपयोग किसी निर्दोष पर नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले तीन साल से OBC और अनुसूचित जाति के लिए बनाए गए आरक्षण विधेयक पर हस्ताक्षर क्यों नहीं हुए। वहीं, विधायक पुरंदर मिश्रा ने कानून पारित होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब धर्मांतरण रुकेगा। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि धर्मांतरण रोकने के प्रयास में कांग्रेस नहीं चाहती कि भारत विश्वगुरु बने।
साथ ही दीपक बैज ने शिक्षा व्यवस्था पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की नाकामियों की वजह से नर्सरी में बच्चों के एडमिशन का सिस्टम खत्म हो गया है और गरीब बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी का “गांव चलो अभियान” कांग्रेस के अभियान की नकल है और प्रदेश की जनता इस समय बेरोजगारी और अन्य मुद्दों से परेशान है।
विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि धर्म परिवर्तन महिमामंडन, झूठ बोलकर, बल, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से कराया गया तो अवैध माना जाएगा। अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी। प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान है। विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा, पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति दूसरे धर्म में शादी करता है, तो विवाह संपन्न करने वाले फादर, प्रीस्ट, मौलवी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति विवाह की तारीख से आठ दिन पहले घोषणापत्र सक्षम प्राधिकारी के सामने प्रस्तुत करेंगे। सक्षम प्राधिकारी तय करेगा कि विवाह धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा है, और आवश्यक होने पर इसे अवैध घोषित किया जा सकेगा।




