वट सावित्री व्रत 2026: जानिए पूजा विधि, महत्व और स्कंद पुराण में बताए गए मंत्र

वट सावित्री व्रत सुहागन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे, तभी से यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत ज्येष्ठ मास में रखा जाता है और महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।
🌼 वट सावित्री व्रत पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
सास-ससुर के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
वट वृक्ष के नीचे बैठकर पंचदेवता का आह्वान करें।
यह मंत्र बोलें —
“ॐ नमो ब्रह्मणा सह सावित्री इहागच्छ इह तिष्ठ सुप्रतिष्ठिता भव।”
गंगाजल, अक्षत, सिंदूर, तिल, फूल, माला, नैवेद्य और पान अर्पित करें।
आम सहित अन्य फलों पर जल अर्पित करें और आम पति को प्रसाद स्वरूप खिलाएं।
कच्चे सूत से वट वृक्ष की 7, 21 या 108 परिक्रमा करें।
व्रत का पारण काले चने से करना शुभ माना गया है।
📿 वट सावित्री व्रत संकल्प मंत्र
“मम वैधव्यादि-सकलदोषपरिहारार्थं ब्रह्मसावित्रीप्रीत्यर्थं सत्यवत्सावित्रीप्रीत्यर्थं च वटसावित्रीव्रतमहं करिष्ये।”
🙏 सावित्री को अर्घ्य देने का मंत्र
“अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते ।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते ॥”
🌳 वट वृक्ष प्रार्थना मंत्र
“वट सिंचामि ते मूलं सलिलैरमृतोपमैः ।
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा ॥”
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए वट सावित्री व्रत से महिलाओं को अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।




