रायगढ़ में फिर गई हाथी शावक की जान: मांड नदी में डूबा मासूम, 5 महीने में 9वीं मौत से वन विभाग पर उठे सवाल

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक बार फिर हाथी शावक की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खरसिया वन परिक्षेत्र के गुर्दा गांव के पास मांड नदी में एक हाथी शावक का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। जनवरी 2026 से अब तक जिले में 9 हाथी शावकों की मौत हो चुकी है, जिससे वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने मांड नदी में शावक का शव तैरता देख इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से शव को नदी से बाहर निकाला। प्रारंभिक जांच में शावक की मौत डूबने से होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
नदी पार करने के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, पिछले कई दिनों से गुर्दा और आसपास के क्षेत्रों में 50 से अधिक हाथियों का बड़ा दल विचरण कर रहा है। माना जा रहा है कि मृत शावक इसी दल का हिस्सा था और नदी पार करने के दौरान हादसे का शिकार हो गया।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि केवल मई महीने में ही डूबने से चार हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। वहीं इस वर्ष अब तक रायगढ़ जिले में 9 हाथी शावकों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन विभाग की निगरानी, ट्रैकिंग और संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के बढ़ते विचरण क्षेत्र, जल स्रोतों के आसपास पर्याप्त निगरानी की कमी और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा उपायों के अभाव के कारण ऐसे हादसे बढ़ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर हाथियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी रणनीति लागू करने की मांग की है।
फिलहाल वन विभाग की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है, लेकिन लगातार हो रही शावकों की मौतें यह संकेत दे रही हैं कि हाथी संरक्षण को लेकर मौजूदा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।





