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मध्यान्ह भोजन बनानी वाली महिलाएं हड़ताल पर, कहा- कम मानदेय में घर चलाना हुआ मुश्किल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाली रसोइयां अपनी मजदूरी 66 रुपये से बढ़ाकर 350 – 400 रुपये प्रतिदिन करने की मांग को लेकर नया रायपुर के तूता में 22 दिनों से हड़ताल पर हैं। आंदोलन में 95% महिलाएं हैं, जो समूहों में धरना दे रही हैं। रसोइयों का कहना है कि कम मानदेय में घर चलाना मुश्किल हो गया है।

इस आंदोलन की खास बात यह है कि रसोइयां समूहों में प्रदर्शन स्थल तक पहुंच रही हैं। एक समूह करीब तीन दिनों तक धरना स्थल पर रहता है, फिर दूसरे जिलों से आई रसोइयां उनकी जगह ले लेती हैं। फिलहाल कई रसोइयां अपने-अपने गांवों में हैं और जैसे ही उनकी बारी आएगी, वे नया रायपुर पहुंचकर आंदोलन में शामिल होंगी। इससे साफ है कि विरोध संख्या का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की रसोइयों की साझा पीड़ा है।

प्रदर्शनकारी रसोइयों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी नौकरी अस्थायी है और सामाजिक सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। कई महिलाओं ने स्वास्थ्य समस्याओं का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि ग्रामीण इलाकों में गैस सुविधा न होने के कारण लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ता है, जिससे धुएं के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं।

रसोइयों ने साफ किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।