शंकराचार्य जी का अपमान सनातनी परंपराओं पर आघात – डॉ. महंत
० सत्ता के अहंकार में डूबी भाजपा सरकार माफी मांगे – डॉ. चरणदास महंत
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए दुर्व्यवहार और उन्हें संगम स्नान से रोके जाने की घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इस कृत्य को भारतीय संत परंपरा का अपमान और लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया है।
डॉ. महंत ने एक जारी बयान में कहा कि, मैं स्वयं एक कबीरपंथी हूँ और हमारे संस्कारों में संतों का स्थान सर्वोपरि है। कबीर साहब ने सिखाया है कि‘‘साधु भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं। लेकिन बड़े खेद का विषय है कि वर्तमान सरकार धन और बल के अहंकार में संतों का सत्कार भूल गई है। जो संत सत्ता की कमियों पर सवाल उठाते हैं, उन्हें कभी सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाता है तो कभी पुलिस बल के जरिए प्रताड़ित किया जाता है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, सरकार केवल उन संतों को पलकों पर बैठाती है जो उनके राजनीतिक एजेंडे का समर्थन करते हैं। जो अपनी परंपरा और धर्म की रक्षा के लिए स्वतंत्र आवाज उठाते हैं उन्हें अपमानित किया जाता है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, शंकराचार्य जी को पालकी से स्नान के लिए जाने से रोकना सदियों पुरानी परंपराओं को कुचलने जैसा है।आज की सत्ता खुद को भगवान से भी बड़ा समझने लगी है। एक संत का स्थान राजा के सिंहासन से हमेशा ऊपर होता है, लेकिन पुलिस के जरिए संतों और बटुकों के साथ जो धक्का-मुक्की की गई, वह पराकाष्ठा है।
डॉ. चरण दास महंत ने मांग की है कि, उत्तर प्रदेश प्रशासन और केंद्र सरकार इस शर्मनाक घटना के लिए अविलंब माफी मांगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातनी परंपराओं और संतों के सम्मान के साथ कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।





