अदालतों से मणिपुर के कांगला फोर्ट तक : फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने स्थापित किया 200वां विशाल राष्ट्रीय ध्वज
० 23 जनवरी को ‘राष्ट्रीय ध्वज दिवस’ घोषित करने का प्रस्ताव
इंफाल। अपनी महान विरासत और देशभक्ति के अद्भुत संगम को दर्शाते हुए फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने आज मणिपुर की राजधानी इम्फाल स्थित ऐतिहासिक कांगला फोर्ट में अपना 200वां विशाल राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया। यह अवसर दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धियों का प्रतीक है। पहला, दिल्ली उच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक निर्णय के 30 वर्ष, जिसने नागरिकों को सम्मानपूर्वक राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार दिया और दूसरा सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के 22 वर्ष, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के अंतर्गत राष्ट्रीय ध्वज फहराने को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई।
200वें ध्वज की स्थापना के लिए कांगला फोर्ट का चयन प्रतीकात्मक है, क्योंकि 21 जनवरी 1972 को ही मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। मणिपुर के राजाओं की प्राचीन सत्ता और मैतेई पहचान के आध्यात्मिक केंद्र रहे इस किले पर अब तिरंगा राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में लहराएगा और यहां आने वाले हजारों पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारत के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता रहेगा।
आज का यह कार्यक्रम फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवीन जिन्दल की मेहनत और उनके लंबे संघर्ष को याद करने का एक खास मौका है। अमेरिका से भारत लौटने के बाद श्री जिन्दल ने उस समय लागू प्रतिबंधात्मक भारतीय ध्वज आचार संहिता को चुनौती दी थी, जिसके तहत आम नागरिकों को केवल विशेष अवसरों पर ही राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति थी। श्री जिन्दल शुरू से मानते रहे हैं कि तिरंगा हर भारतीय के गौरव, सम्मान और अभिव्यक्ति का प्रतीक है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को उसे प्रतिदिन फहराने का अधिकार मिलना चाहिए। उनके इसी संकल्प और कानूनी संघर्ष के परिणामस्वरूप आज देशवासियों को गर्व और सम्मान के साथ साल के 365 दिन तिरंगा फहराने का अधिकार प्राप्त है।
उनके एक दशक लंबे कानूनी संघर्ष के परिणामस्वरूप 23 जनवरी, 2004 को सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सम्मान के साथ तिरंगा फहराना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” का हिस्सा है।
नवीन जिन्दल ने अपने संदेश में कहा कि तिरंगा भारत की एकता और सफलता का प्रतीक है। राष्ट्रीय ध्वज से हमारा गहरा भावनात्मक जुड़ाव है।
उन्होंने कहा, “हर सुबह जब मैं अपनी जैकेट पर तिरंगे की पिन लगाता हूं तो मुझे देश के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का एहसास होता है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तिरंगा का मतलब आराम नहीं, बल्कि युवाओं को हर दिन अपने अधिकारों और कर्तव्यों को निभाने के लिए प्रेरित करना है।
फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया इस महत्वपूर्ण अवसर पर 23 जनवरी को आधिकारिक तौर पर ‘राष्ट्रीय ध्वज दिवस’ के रूप में मान्यता देने की पुरजोर पैरवी कर रहा है। अपने “अधिकार से जिम्मेदारी” पहल के माध्यम से फाउंडेशन अपने मिशन का विस्तार कर रहा है, जिसमें शामिल हैं:
• जन-शिक्षा: युवाओं की आकांक्षाओं के साथ तिरंगे को जोड़ना।
• पर्यावरण संरक्षण: ध्वज के सम्मानजनक उपयोग, उचित निपटान और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना।
• राष्ट्रीय गौरव: नागरिकों को राष्ट्र निर्माण के प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के रूप में साल भर ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित करना।
फाउंडेशन देशवासियों का आह्वान करता है कि वे तिरंगे से जुड़े संवैधानिक मूल्यों को अपनाएं। वे ध्वज फहराने के “अधिकार” तक सीमित न रहें, बल्कि उन मूल्यों को जीने की “जिम्मेदारी” भी निभाएं।
फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के बारे में
नवीन जिन्दल और श्रीमती शालू जिन्दल द्वारा स्थापित फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक भारतीयों को गर्व के साथ तिरंगा प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। विशाल ध्वजों की स्थापना और राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियानों के माध्यम से फ्लैग फाउंडेशन सभी भारतीय नागरिकों में राष्ट्रवाद और गौरव की भावना पैदा करने के लिए समर्पित है।





