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अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 – भारत की नौसैनिक शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन,राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सलामी ली

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विशाखापत्तनम। विशाखापत्तनम (सिटी ऑफ डेस्टिनी) के समुद्री तट पर आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) में भारत ने अपनी बढ़ती नौसैनिक ताकत और समुद्री कूटनीति का शानदार प्रदर्शन किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बंगाल की खाड़ी में स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस सुमेधा पर सवार होकर समुद्र में खड़े अंतरराष्ट्रीय बेड़े का निरीक्षण किया। इस अवसर पर भारतीय नौसेना के साथ मित्र देशों के कुल 71 जहाज और पनडुब्बियां शामिल रहीं।

आकाश में 50 से अधिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टरों ने फ्लाई-पास्ट कर राष्ट्रपति को सलामी दी, जिनमें प्रमुख थे:

मिग-29के – कैरियर बेस्ड फाइटर

एलसीए तेजस – हल्का लड़ाकू विमान

पी-8आई पोसिडॉन – समुद्री टोही विमान

सी-किंग हेलिकॉप्टर – नौसैनिक हेलिकॉप्टर

साथ ही, भारतीय नौसेना के विशेष बल मार्कोस (MARCOS) ने समुद्र के बीच विशेष युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया।

समुद्री सुरक्षा और सतर्कता

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारतीय नौसेना देश के समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए सतर्क है और वैश्विक समुद्री व्यापार में स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नौसेना दुनिया की अन्य नौसेनाओं के साथ विश्वास और सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

समुद्री कूटनीति का महत्वपूर्ण मंच

यह आयोजन केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की समुद्री कूटनीति का एक बड़ा मंच भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महासागर विजन’ के तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक सुरक्षा प्रदाता की भूमिका मजबूत कर रहा है।

इस दौरान मिलन-2026 जैसे बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास और हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी भी आयोजित हो रहे हैं।

65 देशों की नौसेनाओं की भागीदारी

करीब 75 देशों और 65 नौसेनाओं की मौजूदगी भारत के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है। भारतीय नौसेना अब केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था को आकार देने वाली प्रभावशाली कूटनीतिक शक्ति बन चुकी है।

फ्लीट रिव्यू की परंपरा

भारत में फ्लीट रिव्यू की शुरुआत 1953 में हुई थी, जब प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 33 भारतीय जहाजों का निरीक्षण किया था। 2016 में भी विशाखापत्तनम में यह आयोजन हुआ था।

इस बार का IFR विशेष इसलिए है क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े नौसैनिक आयोजनों में से एक मिलन-2026 के साथ आयोजित हो रहा है, जो भारत की समुद्री रणनीतिक क्षमता और वैश्विक साझेदारी को नई ऊँचाई देता है।