बोर्ड परीक्षा में बड़ा बदलाव: अब एआई की निगरानी में होगी 12वीं की कॉपी जांच
अलीगढ़। Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। इस बार उत्तर पुस्तिकाओं की जांच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की निगरानी में की जाएगी। उत्तर प्रदेश सहित देशभर के मूल्यांकन केंद्रों पर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
ऐसे होगी कॉपियों की जांच
नई प्रणाली के तहत परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी कॉपियां पहले स्कैन की जाएंगी। प्रत्येक उत्तर पुस्तिका को एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिससे परीक्षार्थी की पहचान गोपनीय रहेगी। इसके बाद स्कैन की गई कॉपियां सुरक्षित सर्वर के माध्यम से सीधे परीक्षक की स्क्रीन पर उपलब्ध होंगी।
परीक्षक को लॉग-इन आईडी और पासवर्ड के जरिए सिस्टम में प्रवेश कर प्रश्नवार अंक दर्ज करने होंगे। फिलहाल यह व्यवस्था केवल 12वीं कक्षा के लिए लागू की गई है, जबकि 10वीं की कॉपियों की जांच पहले की तरह ऑफलाइन पद्धति से ही होगी।
एआई रखेगा मूल्यांकन पर नजर
सीबीएसई ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मार्किंग स्कीम और मॉडल आंसर पहले से ही सिस्टम में अपलोड कर दिए हैं। एआई आधारित मॉड्यूल मूल्यांकन के पैटर्न की निगरानी करेगा और असामान्य अंकन पर अलर्ट जारी कर सकेगा।
यदि किसी प्रश्न में अंक असामान्य रूप से कम या अधिक दिए जाते हैं, तो सिस्टम तुरंत संकेत देगा। साथ ही कुल अंकों का जोड़ स्वतः हो जाएगा, जिससे गणना संबंधी मानवीय त्रुटियों की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
क्यों जरूरी था बदलाव?
अब तक ऑफलाइन जांच में यह शिकायत मिलती रही कि समान उत्तर पर अलग-अलग परीक्षक अलग अंक दे देते थे। कुछ स्टेप-वाइज अंक देते थे, जबकि कुछ केवल अंतिम उत्तर पर ही अंक प्रदान करते थे। इससे आंशिक रूप से सही उत्तर लिखने वाले छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता था।
नई प्रणाली में प्रत्येक सही प्रक्रिया पर अंक देना अनिवार्य होगा, जिससे मूल्यांकन अधिक समान और निष्पक्ष होने की संभावना है।
रिजल्ट पर पड़ेगा असर
उत्तर प्रदेश में सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों की संख्या देश में सबसे अधिक है। अलीगढ़ मंडल सहित प्रदेश भर में हर वर्ष हजारों विद्यार्थी 12वीं की परीक्षा में शामिल होते हैं।
स्कूल प्रबंधन से जुड़े शिक्षाविदों का मानना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को उनके वास्तविक प्रदर्शन के अनुसार अंक मिल सकेंगे। इससे परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और पुनर्मूल्यांकन संबंधी शिकायतों में कमी आ सकती है।
विशेषज्ञ इसे डिजिटल मूल्यांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में अन्य कक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में भी लागू किया जा सकता है।





