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ईरान–रूस युद्धाभ्यास के बीच पश्चिम एशिया में बढ़ी हलचल, अमेरिकी विमानवाहक पोत की तैनाती से तनाव गहरा

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तेहरान। ईरान ने गुरुवार को रूस के साथ अपना वार्षिक सैन्य युद्ध अभ्यास किया। यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी विमानवाहक पोत पश्चिम एशिया के करीब पहुंच रहा है। दोनों देशों के बीच यह सैन्य सहयोग ऐसे माहौल में हुआ है, जब तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव फिर बढ़ता दिख रहा है।

अमेरिका और ईरान दोनों ने संकेत दिए हैं कि यदि परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता विफल रहती है, तो स्थिति टकराव की ओर बढ़ सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के साथ समझौते की उम्मीद रखते हैं, हालांकि वार्ताएं लंबे समय से ठप पड़ी हैं। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका और इस्राइल की उन मांगों पर चर्चा से इनकार किया है, जिनमें मिसाइल कार्यक्रम में कटौती और सशस्त्र समूहों से संबंध तोड़ने की बात शामिल है। हाल के हफ्तों में हुई अप्रत्यक्ष वार्ताओं में भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

आंतरिक चुनौतियों के बीच सख्त रुख

पिछले वर्ष इस्राइल और अमेरिका के साथ 12 दिनों तक चले संघर्ष और जनवरी में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दमन के बाद ईरान की सरकार दबाव में बताई जा रही है। इसके बावजूद, ईरान ने चेतावनी दी है कि उस पर किसी भी हमले की स्थिति में व्यापक क्षेत्रीय युद्ध छिड़ सकता है।

हॉर्मुज की खाड़ी में सैन्य गतिविधि

ईरान ने इस सप्ताह हॉर्मुज की खाड़ी में लाइव-फायर युद्धाभ्यास भी किया। यह संकीर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के व्यापारिक तेल का लगभग एक-पांचवां हिस्सा यहीं से गुजरता है।

अमेरिकी तैनाती में बढ़ोतरी

अमेरिका ने क्षेत्र में अतिरिक्त युद्धपोत और विमान तैनात किए हैं। USS Gerald R. Ford नामक विमानवाहक पोत भूमध्य सागर के मुहाने के पास तैनात बताया जा रहा है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका ने हमले का निर्णय ले लिया है, लेकिन इस तैनाती से उसकी सैन्य क्षमता मजबूत हुई है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अब तक ईरान पर हमले का आदेश नहीं दिया है। वे जून में बाधित हुई परमाणु वार्ता को फिर से शुरू करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इस बीच, क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।