गुरु घासीदास नेशनल पार्क में घायल लकड़बग्घे की मौत, इलाज में देरी पर उठे सवाल

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां एक घायल लकड़बग्घा की समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण मौत हो गई। इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, बिहारपुर क्षेत्र के मकराद्वारी इलाके में यह लकड़बग्घा घायल और बीमार अवस्था में जंगल में भटकता हुआ पाया गया। आशंका जताई जा रही है कि जंगल में लगी आग के कारण वह अपने प्राकृतिक आवास से बाहर आ गया था। कमजोर हालत में होने के बावजूद उसे समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
बताया जा रहा है कि वन्यजीव चिकित्सक के अवकाश पर होने के बावजूद पार्क प्रबंधन ने किसी वैकल्पिक डॉक्टर की व्यवस्था नहीं की। परिणामस्वरूप, इलाज के अभाव में लकड़बग्घे ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी एक तेंदुआ की कुएं में गिरने के बाद समय पर रेस्क्यू और उपचार नहीं मिलने से मौत हो चुकी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं पार्क में वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही हैं।
घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय नागरिकों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित इलाज और रेस्क्यू किया जाता, तो इन बेजुबान जानवरों की जान बचाई जा सकती थी।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल में आग, घायल जानवरों की अनदेखी और इलाज में देरी गंभीर लापरवाही के अंतर्गत आते हैं। इससे न केवल वन्यजीवों की जान जाती है, बल्कि जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नेशनल पार्क में वन्यजीवों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता है।





