#प्रदेश

साइंस कॉलेज में “विज्ञान, नवाचार एवं सतत विकास में अंतर्विषयक मार्गों की खोज” आयोजित राष्ट्रीय सम्मलेन का हुआ समापन

Advertisement Carousel

रायपुर।शासकीय एन.पी.जी. विज्ञान महाविद्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “विज्ञान, नवाचार एवं सतत विकास में अंतर्विषयक मार्गों की खोज” का समापन देशभर से आए शोधार्थियों एवं विद्वानों की उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक हुआ।

सम्मेलन के दूसरे दिन का आरंभ मणिपाल विश्वविद्यालय की डॉ. नीतू भटनागर के प्रेरणादायक व्याख्यान से हुआ, जिसका विषय “पर्यावरणीय सुधार एवं ऊर्जा भंडारण के लिए सतत समाधान” था। उन्होंने पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने तथा ऊर्जा के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने में सतत विकास लक्ष्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (ASET), एमिटी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, रायपुर के रसायन शास्त्र के प्रोफेसर डॉ. के. एस. पटेल ने Cucurbitaceae, Brassicaceae एवं Pedaliaceae कुलों के बीजों में तेल की मात्रा के विश्लेषण पर एक रोचक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बीज तेलों के विविध उपयोगों को महत्वपूर्ण खाद्य संसाधन तथा संभावित नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के रूप में रेखांकित किया।

तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता डॉ. विमल कनुंगो, डॉ. आर. दीवान एवं डॉ. नमिता ब्रह्मे द्वारा की गई। इन सत्रों में भौतिक एवं रासायनिक विज्ञान के क्षेत्रों में 15 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एवं आयुष विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा उपस्थित रहे, जबकि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के विशिष्ट प्राध्यापक डॉ. के. के. घोष विशेष अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। डॉ. पी. के. पात्रा ने विभिन्न विज्ञान क्षेत्रों के बीच अंतर्विषयक एवं बहुविषयक संवाद में वैज्ञानिक सम्मेलनों के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. के. के. घोष ने वर्तमान समय में सम्मेलन की थीम की प्रासंगिकता की सराहना की तथा इसमें अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने वाले सभी संसाधन व्यक्तियों की प्रशंसा की। महाविद्यालय के जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष ओमकार बैस भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमिताभ बनर्जी ने समापन भाषण दिया तथा आयोजकों, प्रतिभागियों एवं संकाय सदस्यों के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ।

यह सम्मेलन विज्ञान एवं सतत विकास के क्षेत्रों में शैक्षणिक आदान-प्रदान, नवाचार एवं अंतर्विषयक सहयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ।

सम्मेलन में संयोजक डॉ. संजय घोष एवं डॉ. वर्षा करंजगांवकर; सह-संयोजक डॉ. प्रीति मिश्रा एवं डॉ. सुनीता पात्रा; आयोजन सचिव डॉ. सरोज शर्मा; संयुक्त सचिव योगेश्वरी पाल, डॉ. सुलोचना हबलानी, डॉ. संगीता वाजपेयी, डॉ. सविता सिंह, डॉ. एन.बी. सिंह तथा महाविद्यालय के सभी संकाय सदस्य सक्रिय रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।