रायपुर की सबसे प्राचीन रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, पुरानी बस्ती में हर्षोल्लास से मनाया गया भगवान जगन्नाथ का महापर्व

रायपुर। राजधानी रायपुर के टुरी हटरी, पुरानी बस्ती स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई। रायपुर की सबसे प्राचीन मानी जाने वाली इस रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने परिवार सहित शामिल होकर महाप्रभु के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
सुबह हवन-पूजन, दोपहर भंडारा और शाम को निकली भव्य रथयात्रा
रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत प्रातःकाल से ही भक्तों की भीड़ के साथ हुई। सुबह 9 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन और भगवान जगन्नाथ की विशेष आरती संपन्न हुई। इसके बाद दोपहर में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद एवं भंडारे का आयोजन किया गया। अपराह्न 3:30 बजे भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
करीब ढाई सौ वर्षों पुरानी है यह परंपरा
जानकारों के अनुसार, पुरानी बस्ती की यह रथयात्रा रायपुर महानगर की सबसे प्राचीन रथयात्रा है, जिसका इतिहास लगभग 250 वर्षों से भी अधिक पुराना है। यही कारण है कि हर वर्ष इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।
‘भगवान जगन्नाथ स्वयं भक्तों के द्वार तक आते हैं’
महामंडलेश्वर राजेश्री महंत रामसुंदर दास जी महाराज ने रथयात्रा के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को प्रतिवर्ष भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ विश्व के ऐसे एकमात्र देवता हैं, जो अपने भक्तों को दर्शन देने स्वयं रथ पर सवार होकर उनके बीच आते हैं। यही कारण है कि उन्हें ‘जगत के नाथ’ यानी जगन्नाथ कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, समानता, सेवा और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने वाला महापर्व भी है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
रथयात्रा में दाऊ महेंद्र अग्रवाल, सुरेश शुक्ला, अजय तिवारी, विजय पाली, रामकृष्ण पाली, तोयनिधि वैष्णव, बृजभूषण द्विवेदी, अनिल बरोड़िया, प्रशांत ठेंगड़ी, राहुल उपाध्याय, तिलक दास , राम छबिदास , राम प्रिय दास , राम लोचन दास , मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव, हर्ष दुबे सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।





