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तारा कोल ब्लॉक पर खनिज निगम का बड़ा स्पष्टीकरण, अभी सिर्फ नीलामी हुई है; वन-पर्यावरण मंजूरी के बाद ही शुरू होगा खनन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर उठ रहे सवालों और विपक्ष के विरोध के बीच छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने स्थिति स्पष्ट की है। निगम ने कहा है कि फिलहाल ब्लॉक की सिर्फ प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी पूरी हुई है। इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित कंपनी को तत्काल खनन शुरू करने की अनुमति मिल गई है।

निगम के मुताबिक, वास्तविक खनन शुरू होने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरणीय मंजूरी, वन स्वीकृति समेत कई जरूरी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

9 कंपनियों ने लगाई थी बोली

तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में कुल 9 बोलियां प्राप्त हुई थीं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक CG Syn&Gas and Chemicals Limited को मिला है।

हालांकि सफल बोलीदाता को नीलामी में सफल होने के साथ ही खनन की स्वत: अनुमति नहीं मिलती। खनन शुरू करने से पहले सभी आवश्यक मंजूरियां लेना अनिवार्य होगा।

वन और पर्यावरण मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

खनिज निगम के अनुसार, खनन शुरू करने से पहले वन स्वीकृति के निर्धारित चरणों को पूरा करना होगा। इसके साथ ही पर्यावरणीय प्रभावों का तय मानकों के अनुसार आकलन किया जाएगा।

निगम ने स्पष्ट किया कि जरूरी वैधानिक मंजूरियां मिलने से पहले न तो पेड़ों की कटाई की जा सकती है और न ही वास्तविक खनन गतिविधि शुरू हो सकती है।

नीलामी और खनन की अनुमति अलग-अलग चरण

निगम ने यह भी साफ किया है कि कोल ब्लॉक की नीलामी, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति और वास्तविक खनन की अनुमति तीन अलग-अलग चरण हैं। इसलिए नीलामी पूरी होने को खनन शुरू होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

2011 में हुआ था तारा ब्लॉक का आवंटन

हसदेव-अरण्य क्षेत्र में कोयला ब्लॉकों का मामला नया नहीं है। तारा कोल ब्लॉक का आवंटन वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अन्य कोल ब्लॉकों के साथ इसका पूर्व आवंटन भी निरस्त हो गया था।

निगम ने हसदेव-अरण्य क्षेत्र के अन्य कोल ब्लॉकों की पुरानी स्वीकृति प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया है। उसके मुताबिक, परसा ईस्ट और केते बासन (PEKB) समेत कई ब्लॉकों से जुड़े वन एवं पर्यावरणीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूर्व में आगे बढ़ी थी।

मोरगा कोल ब्लॉक का मामला भी उठा

खनिज निगम ने कहा कि हसदेव-अरण्य में कोयला संसाधनों के उपयोग का मुद्दा केवल तारा ब्लॉक तक सीमित नहीं है। मोरगा कोल ब्लॉक का आवंटन भी एक लंबित विषय है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार की ओर से इसे छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पक्ष में आवंटित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय से अनुरोध किए जाने की बात भी निगम ने कही है।

ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर

निगम के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में तारा कोल ब्लॉक की केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है और अभी खनन शुरू नहीं हुआ है। सफल बोलीदाता को सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी।

निगम ने कहा कि आगे की पूरी प्रक्रिया में ऊर्जा सुरक्षा, राज्य की विकास जरूरतों, वन एवं पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों के बीच संतुलन को प्राथमिकता दी जाएगी।