Maa Shailputri Puja: नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानें विधि, प्रिय भोग और शक्तिशाली मंत्र

Maa Shailputri Puja Vidhi: शारदीय नवरात्रि के साथ मां दुर्गा की नौ शक्तियों की आराधना शुरू हो जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से मां शैलपुत्री की आराधना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है।
मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत शांत और सौम्य माना गया है। माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है, जबकि उनका वाहन वृषभ है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण माता को शैलपुत्री कहा जाता है। ‘शैल’ का अर्थ पर्वत होता है।
कैसे करें मां शैलपुत्री की पूजा?
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद पूजा स्थान पर चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
सबसे पहले कलश और मां शैलपुत्री का ध्यान करें। इसके बाद मां को जल, अक्षत, रोली और कुमकुम अर्पित करें। माता को सफेद या पीले पुष्प चढ़ाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
इसके बाद मां को फल, प्रसाद और अपनी श्रद्धानुसार भोग अर्पित करें। पूजा के दौरान मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप करें। अंत में मां की आरती करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
मां शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं?
मां शैलपुत्री को देसी घी का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा फल, दूध से बनी मिठाई और श्रद्धानुसार सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। मान्यता है कि मां को घी का भोग लगाने से आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां शैलपुत्री का विशेष मंत्र
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप श्रद्धा के साथ करें—
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
इसके अलावा मां के ध्यान के लिए यह मंत्र भी पढ़ा जा सकता है—
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना से भक्तों को शक्ति, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के पहले दिन मां का ध्यान कर श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मन में सकारात्मकता आती है। भक्त अपनी मनोकामना मां के सामने रखते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
नोट: पूजा की विधि और मंत्रों के उच्चारण में परंपरा के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। श्रद्धा और शुद्ध भाव से मां की आराधना करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।




