भगवान श्री राजीवलोचन : प्रतिदिन तीन बार बदलता है स्वरूप, सुबह बाल्य, दोपहर युवा तथा शाम को प्रौढ़ावस्था में होते है दर्शन
राजिम। पवित्र तीन नदियों के संगम तट पर स्थित राजिम को हरि और हर की नगरी कहा जाता हैं। इनके अनन्य नाम सुनने को मिलते हैं जैसे कमलक्षेत्र, पद्मावतीपुरी, देवपुरी, छोटा काशी, राजीव नगर, राजिम इत्यादि। प्रचलित कथा के अनुसार बताया जाता है कि सत्ययुग में राजा रत्नाकर हुए। उन्होंने सौ यज्ञ किया जैसे ही यज्ञ करते राक्षस गण आकर उसमें व्यवधान डाल देते थे। साधु संतो को प्रताड़ित करते थे और यज्ञ सम्पन्न होने में विघन डालते। राजन बहुत दुखी हो गये और भगवान विष्णु को याद करने लगे। उसी समय विष्णु जी बैकुंठ लोक छोड़कर त्रिकूट पर्वत में गज और ग्राहा की लड़ाई को शांत कराने के लिए […]



