साहित्य अकादेमी में गूंजी छत्तीसगढ़ी बोलियों की आवाज, शकुंतला तरार ने रखे संरक्षण के मुद्दे
रायपुर। साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली एवं संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकार शकुंतला तरार ने छत्तीसगढ़ की लोक बोलियों के संरक्षण, संवर्धन और विस्तार पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि “भाषा जहां माथे का मुकुट होती है, वहीं बोलियाँ उस मुकुट में जड़ी रत्नों के समान होती हैं, जो उसकी सुंदरता और मजबूती को बढ़ाती हैं।” शकुंतला तरार वर्ष 2014 से लगातार अकादेमी के मंच पर छत्तीसगढ़ी और विभिन्न लोक बोलियों का प्रतिनिधित्व करती आ रही हैं और इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। शिक्षा में स्थानीय बोलियों का महत्व अपने वक्तव्य में उन्होंने बताया कि Ministry of Tribal Affairs द्वारा छत्तीसगढ़ के आदिवासी […]



