#संपादकीय

कही-सुनी (04JAN-26) : छत्तीसगढ़ में कहां है पुलिस का इकबाल ?

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रवि भोई की कलम से

छत्तीसगढ़ के तमनार में उपद्रवियों ने महिला टीआई और सिपाही के साथ जिस तरह शर्मनाक हरकत की, उससे लगता है राज्य में पुलिस का इकबाल खत्म हो गया है। तमनार जिला मुख्यालय रायगढ़ से ज्यादा दूर नहीं है ,जब उपद्रवी हरकत कर रहे थे और अनियंत्रित हो रहे थे तो रायगढ़ से तत्काल अतिरिक्त फ़ोर्स क्यों नहीं भेजा गया और स्थिति को नियंत्रित क्यों नहीं किया गया। पुलिस के साथ अत्याचार होगा, तो आम नागरिक का क्या हाल होगा, यह सोचनीय विषय है। छत्तीसगढ़ में पुलिस वाले लोगों के गुस्से का शिकार बन रहे हैं, तो इसके पीछे के कारणों का भी अध्ययन करना चाहिए। इसका भी आंकलन किया जाना चाहिए कि क्या राज्य में पुलिस की जमीनी पकड़ खत्म हो गई है। जब लोग अपनी मांगों को लेकर करीब एक पखवाड़े से धरने से बैठे थे , तो पुलिस आगे की स्थिति को क्यों नहीं भांप पाई। इसी छत्तीसगढ़ में कुछ साल पहले उपद्रवियों ने कलेक्ट्रेट को आग के हवाले करने का काम कर चुके हैं। सरगुजा इलाके में थाने पर हमला जैसा कृत्य हो चुका है। इसके बाद भी पुलिस राज्य में बदलते हालात और नजरिए को क्यों समझने में विफल हो रही है ? यह अच्छी बात है कि राज्य में नक्सलवाद का सफाया हो रहा है, पर जातीय संघर्ष या गुटीय संघर्ष का बढ़ना अच्छी बात नहीं है। वर्षों पहले छत्तीसगढ़ को शांति का टापू कहा जाता था, वहां ऐसी घटनाएं चिंतनीय हैं और प्रदेश के हित में नहीं हैं। प्रदेश में हिंसा के साथ अन्य अपराध भी बढ़ रहे हैं। नशीली और मादक पदार्थों की आवाजाही बढ़ रही है, इस ओर सरकार को ध्यान देना होगा। प्रदेश के विकास के लिए राज्य में कानून -व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए। कानून-व्यवस्था ठीक रहेगी तो ही उद्योग आएंगे और लोगों को रोजगार मिलेगा। सरकार को पुलिस के मामले में तदर्थवाद छोड़ना होगा और सख्त फैसले लेने होंगे, तभी सरकार की छवि चमकेगी और राज्य की साख मजबूत होगी।

जीपीएम में एसपी की पोस्टिंग में देरी पर सवाल

छत्तीसगढ़ के गोरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के पुलिस अधीक्षक सुरजन राम भगत 31 दिसंबर 2025 को रिटायर हो गए। सरकार ने 2 जनवरी 2026 की देर रात गोरेला-पेंड्रा-मरवाही के एसपी पद पर मनोज कुमार खिलारी की पोस्टिंग की। जीपीएम के एसपी का रिटायरमेंट पहले से तय था, तो सरकार को वहां एसपी पोस्टिंग में दो दिन कैसे लग गए,यह चर्चा का विषय है। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या गृह विभाग एस आर भगत के रिटायरमेंट की तारीख को भूल गया था या फिर सरकार को जीपीएम के लायक एसपी तलाश करने में दो दिन लग गए। खबर है कि सरकार जीपीएम में किसी सीधी भर्ती वाले आईपीएस को एसपी बनाना चाहती थी, पर सीधी भर्ती वाले नजर में नहीं चढ़े, इस कारण प्रमोटी और एक बटालियन के कमांडेंट को जीपीएम का कप्तान बनाकर भेजना पड़ा। एस आर भगत भी प्रमोटी आईपीएस थे। एसपी जिले की पुलिस का नेतृत्व करता है और आमतौर पर जिले में नेतृत्वकर्ता के पद को खाली नहीं छोड़ा जाता।

बेबस मंत्री

कहते हैं छत्तीसगढ़ के एक कैबिनेट मंत्री अपने जिले के एक थाने के प्रभारी को हटाना चाहते हैं। बताते हैं कि इसके लिए उन्होंने गृहमंत्री के नाम नोटशीट भी लिखा, पर उनका काम नहीं हुआ। थानेदार भारी पड़ गया। मंत्री की नोटशीट पर कार्रवाई नहीं हुई। अब मंत्री अपना दुखड़ा रो रहे हैं, तो थानेदार सीना ठोंककर कह रहा है, उसका कोई बाल बांका नहीं कर सकता। जानकार बता रहे हैं थानेदार तो मंत्री जी का नोटशीट लेकर घूम रहा है और लोगों को बता रहा है, वे कितने पावरफुल हैं। अब मंत्री जी की ये हालत है, आम जनता के क्या हाल होंगे ? वैसे मंत्री जी पहली बार विधायक बने हैं, पर सत्ता के करीब रहने का उन्हें पुराना अनुभव है। अब मंत्री जी की थानेदार से क्या दुश्मनी है, लोगों को समझ में नहीं आ रहा है, पर थानेदार के सामने मंत्री जी के बौना होने की खबर सुर्ख़ियों और चर्चा में है।

कौन बनेगा रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर

विष्णुदेव साय की सरकार ने 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का फैसला कर लिया है, ऐसे में चर्चा होने लगी है कि रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर कौन बनेगा ? हवा में कई नाम तैर रहे हैं। रायपुर के आईजी अमरेश मिश्रा का नाम है, तो बिलासपुर के आईजी संजीव शुक्ला का नाम भी कुछ लोग चला रहे हैं। बस्तर के आईजी सुंदरराज पी का नाम भी कमिश्नर के रूप में लिया जा रहा है। बताते हैं अमरेश मिश्रा रायपुर के आईजी हैं और पहले रायपुर के एसपी रह चुके हैं। इस कारण उनका पलड़ा भारी है। एक बात तो साफ़ है कि रायपुर का पुलिस कमिश्नर आईजी स्तर का आईपीएस ही बनेगा। खबर है कि डीसीपी के लिए भूपेश बघेल की सरकार में चर्चित रहे एक अफसर का नाम चल रहा है। यह अफसर काफी दिनों से लूप लाइन में हैं, अब उन्होंने भाजपा और संघ के नेताओं को साध लिया है। भूपेश बघेल के राज में यह अफसर रायपुर शहर में काम कर चुके हैं।

चैतन्य बघेल को मिली जमानत

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शराब घोटाले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। चैतन्य बघेल करीब साढ़े पांच महीने जेल में बंद रहे। चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन 18 जुलाई को ईडी ने गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों ही केस में चैतन्य को जमानत दे दी है। शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री कवासी लखमा,रिटायर्ड आईएएस अफसर अनिल टुटेजा,निरंजन दास और अन्य अभी जेल में हैं। कवासी लखमा चैतन्य से पहले जेल में हैं। अफसर रानू साहू और सौम्या चौरसिया को ईडी के केस में जमानत के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। शराब मामले में तो सौम्या चौरसिया फिर जेल में है। शराब कांड में कई अफसर उलझे हुए हैं। हल्ला है कि नौकरी जाने के साथ उन्हें जेल की चक्की भी पीसनी पड़ेगी। एक आबकारी अफसर काफी दिनों से बचे हुए थे, पिछले दिनों उन पर भी गाज गिर गई और उनकी भी नौकरी पर आ बनी है। चर्चा है कि उन्हें भी जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट

पिछले हफ्ते कई आईएएस अफसरों के प्रमोशन के बाद अब मंत्रालय और जिलों में प्रशासनिक फेरबदल की भारी सुगबुगाहट है। माना जा रहा है कि कई वरिष्ठ आईएएस अफसरों के साथ जूनियर अफसरों की पोस्टिंग में हेरफेर होगी। माना जा रहा है कि कुछ विभागों में मंत्रियों और सचिवों के बीच पटरी नहीं बैठ पा रही है, उसे ठीक करने की कोशिश की जाएगी। खबर यह भी है कि मुख्य सचिव अपने स्तर से टीम का गठन करेंगे। हल्ला है कि आधे दर्जन से ज्यादा विभाग प्रभावित हो सकते हैं और उन विभागों के सचिव बदल सकते हैं।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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