#संपादकीय

कही-सुनी (18 JAN-26) : भाजपा में तीसरी पीढ़ी के नेताओं को तैयार करने का अभियान

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रवि भोई की कलम से

चर्चा है कि नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही भाजपा के भीतर तीसरी पीढ़ी के नेताओं की फौज तैयार की जाएगी। माना जा रहा है कि नितिन नबीन की टीम में 50 साल की आयु वर्ग के नेता ज्यादा होंगे। इससे साफ़ है कि भाजपा की दूसरी पंक्ति के नेता छंट जाएंगे। कहा जा रहा है कि इसका प्रभाव छत्तीसगढ़ पर भी पड़ेगा। राष्ट्रीय संगठन में छत्तीसगढ़ के युवा चेहरों को मौका मिल सकता है, वहीं 2028 के विधानसभा चुनाव में पुराने और पहली और दूसरी पंक्ति के नेताओं की छंटनी हो जाएगी। भाजपा के भीतर जबरदस्त पीढ़ीगत बदलाव होने वाला है। तय माना जा रहा है कि 20 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नितिन नबीन की ताजपोशी हो जाएगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में भाग लेने और साक्षी बनने के लिए भाजपा के कई नेता दिल्ली जा रहे हैं। कुछ पहले से ही दिल्ली पहुँच गए हैं।

एक और आईपीएस को मिलेगी संविदा नियुक्ति

चर्चा है कि रिटायर्ड आईपीएस सुशीलचंद्र द्विवेदी और बी एस ध्रुव के बाद अब कमलोचन कश्यप को भी जल्द संविदा नियुक्ति मिल जाएगी। बताते हैं कि कमलोचन कश्यप को पुलिस मुख्यालय में ओएसडी बनाया जाएगा। इसके लिए राज्य मंत्रिमंडल ने एक पद स्वीकृत कर दिया है। कमलोचन कश्यप 31 दिसंबर 2025 को डीआईजी के पद से सेवानिवृत हुए हैं। कहा जा रहा है कि सेवानिवृति के बाद कमलोचन कश्यप के अलावा एस आर भगत और जे आर ठाकुर ने भी संविदा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। दोनों से कमलोचन कश्यप आगे निकल गए। रिटायर्ड पुलिस अफसरों को संविदा नियुक्ति देने के पीछे सरकार की जो भी मंशा हो, पर पुलिस का ही एक वर्ग रिटायर्ड अफसरों को संविदा नियुक्ति देने के खिलाफ है। पुलिस में संविदा नियुक्ति कोई नई नहीं है। कांग्रेस राज में डीएम अवस्थी और संजय पिल्लै जैसे अफसरों को संविदा नियुक्ति दी गई थी, तो विष्णुदेव साय के राज में राजेश मिश्रा को संविदा नियुक्ति मिली थी। भाजपा के राज में डीजीपी के पद पर अशोक जुनेजा को दो बार एक्सटेंशन मिला।

वसूली में लगे मंत्री के पीए

कहते हैं छत्तीसगढ़ के एक मंत्री के पीए साहब वसूली में लग गए हैं। अब पीए साहब वसूली कर अपनी जेब भर रहे हैं या मंत्री जी का कोष बढ़ा रहे हैं, चर्चा का विषय है। मंत्री जी पहली बार विधायक और मंत्री बने हैं। पिछले दिनों राज्य के दो मंत्रियों ने अपने-अपने ओएसडी और पीए को हटाया। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। बताते हैं कि एक मंत्री जी अपने पीए साहब के माध्यम से ही सारा लेनदेन करते थे, पीए साहब ने मंत्री जी को ही गच्चा देने में लगे थे। मंत्री जी को इस बात की जानकारी मिली तो फिर कार्रवाई की और अपने स्टाफ से हटा दिया। एक मंत्री जी के ओएसडी साहब मंत्री जी से ही काफी आगे चल रहे थे। इसकी भनक लगते ही मंत्री जी ने ओएसडी की छुट्टी कर दी। बताते हैं पीए-पीएस और ओएसडी की कार्यप्रणाली से मंत्रियों की ख़राब होती छवि को देखकर भाजपा संगठन स्तर पर कुछ कंट्रोल करने की कोशिश की गई है। पर राज्य के कुछ मंत्रियों ने पीए-पीएस के साथ गठबंधन कर लिया है।

तीन आईपीएस का प्रमोशन लटका

कहते हैं राज्य के तीन आईपीएस अफसरों का प्रमोशन लटक गया है। विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में बात बन नहीं पाई। खबर है कि इनमें एक आईपीएस का आईजी से एडीजी, एक का डीआईजी से आईजी प्रमोशन होना है और एक को सुपर टाइम स्केल मिलना है। कांग्रेस राज में ये अफसर सुर्ख़ियों में और अच्छे पदों पर तैनात थे। खबर है कि इन अफसरों पर कुछ आरोपों के चलते पुलिस के ही एक आला अफसर प्रमोशन के पक्ष में नहीं हैं , इसलिए मामला गड़बड़ा गया है। बताते हैं आमतौर पर पहली जनवरी को आईपीएस अफसरों का प्रमोशन हो जाता है , इन अफसरों के प्रमोशन के लिए डीपीसी हो जाने के बाद अब तक बैठक का विवरण ही जारी नहीं हुआ है। बैठक का विवरण जारी होने के बाद वस्तुस्थिति सामने आएगी।

कौन होगा रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर

रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम 23 जनवरी से लागू हो जाएगा। इसके लिए सोमवार या मंगलवार को अधिसूचना जारी कर दी जाएगी, पर सबसे बड़ा सवाल कौन होगा रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर ? रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। पहले पुलिस कमिश्नर के लिए अमरेश मिश्रा, संजीव शुक्ला, रामगोपाल गर्ग, दीपक झा समेत कई नाम चल रहे हैं। यह तो तय है कि रायपुर का पुलिस कमिश्नर आईजी स्तर का अफसर बनेगा। पहले पुलिस कमिश्नर को अपने दफ्तर से लेकर स्टाफ तक चयन करना पड़ेगा। बताते हैं कि रायपुर के पुलिस कमिश्नर के अधीन रायपुर शहर ही रहेगा। अब देखते हैं पुलिस कमिश्नर सिस्टम से रायपुर में कानून-व्यवस्था में कितना सुधार आता है और अपराधों में कितना लगाम लगता है।

फिलहाल चलते रहेंगे दीपक बैज

कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस में अब जो कुछ बदलाव होगा, वह अप्रैल के बाद ही होगा। बीच में प्रदेश अध्यक्ष बदलने की सुगबुगाहट चल रही थी और हवा में कुछ नाम भी तैरने लगे थे। अब माना जा रहा है पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम विधानसभा के चुनाव निपटने के बाद छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक बदलाव होगा। कांग्रेस ने जमीनी लड़ाई के लिए जिला अध्यक्ष के साथ ब्लाक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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