कही-सुनी (08 FEB-2026) : सीधी भर्ती वाले आईपीएस खफा
रवि भोई की कलम से
कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में सीधी भर्ती वाले आईपीएस कई जिलों में पदोन्नत आईपीएस अफसरों को पुलिस अधीक्षक बनाए जाने से खफा हैं। राज्य में 33 जिले हैं, जिनमें से 16 जिलों में पदोन्नत आईपीएस एसपी हैं। इनमें डीआईजी रैंक वाले सात पदोन्नत आईपीएस जिले की कमान संभाले हुए हैं। कहा जा रहा है कि राज्य के पहले पुलिस कमिश्नर पदोन्नत आईपीएस को बनाए जाने का दर्द भी सीधी भर्ती वाले अफसरों को है। खबर है कि राज्य के कई जिलों में पदोन्नत आईपीएस अफसरों को एसपी और एसएसपी बनाए जाने को लेकर सोशल मीडिया में पोस्ट भी वायरल हो रहा है। भाजपा सरकार में बिलासपुर,दुर्ग, रायगढ़ जैसे जिलों में पदोन्नत आईपीएस एसएसपी हैं। नवनिर्मित रायपुर ग्रामीण जिले का एसपी भी पदोन्नत अफसर को बनाया गया है। कहा जा रहा है कि कई जिलों में पदोन्नत अफसरों को एसपी बनाए जाने से सीधी भर्ती वाले आईपीएस के एसपी बनने का मौका थम सा गया है। 2020 और 2021 के सीधी भर्ती वाले आईपीएस एसपी बनने की कतार में हैं और उन्हें मौका नहीं मिल पा रहा है। चर्चा है कि रिटायर पदोन्नत आईपीएस अफसरों को संविदा नियुक्ति देकर ओएसडी बनाए जाने का फैसला भी सीधी भर्ती वालों को रास नहीं आ रहा है। विष्णुदेव साय की सरकार ने एक रिटायर पदोन्नत आईपीएस अफसर को स्टेट फारेंसिक लेबोरेटरी का प्रमुख बना दिया है। सुनने में आ रहा है कि पिछली सरकारों में सीधी भर्ती वाले आईपीएस अफसरों को ज्यादा तव्वजो मिलता था। अधिकांश जिलों की कमान उन्हीं के पास रहती थी और संविदा की बात होती थी, तो ज्यादातर बाजी उन्हीं के हाथ लगती थी। विष्णुदेव साय की सरकार ने मामला एकदम उल्टा कर दिया है।
क्या बजट सत्र में दिखेंगे लखमा ?
कोंटा से कांग्रेस के विधायक कवासी लखमा जेल से छूट गए हैं। कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिली है। शर्त यह भी है कि कवासी लखमा को जमानत अवधि में छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा, ऐसे में चर्चा शुरू हो गई है क्या कवासी लखमा छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में शामिल हो पाएंगे। विधानसभा का बजट सत्र 23 फ़रवरी से शुरू होने जा रहा है। बताते हैं कि जेल से छूटने के बाद कवासी लखमा पिछले दिनों विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह से मिले थे। खबर है कि विधानसभा अध्यक्ष ने उनके मामले में विचार का आश्वासन दिया है, लेकिन पक्ष में फैसला का कोई संकेत नहीं दिया है। माना जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष कानूनविदों से राय लेकर ही कोई फैसला करेंगे। गेंद विधानसभा अध्यक्ष के पाले में है। वैसे कवासी लखमा की रिहाई के वक्त उनके समर्थकों ने ताकत दिखाई और गाजे-बाजे के साथ उनकी अगवानी की। अब असल परीक्षा तो विधानसभा में मौजूदगी की है। विधानसभा सत्र में शरीक हो पाएंगे, तो अपनी बात कह पाएंगे और विधायक होने का मान भी मिलेगा।
कांग्रेस में एक अनार सौ बीमार
अप्रैल में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के सांसद केटीएस तुलसी और फूलोदेवी नेताम का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। दोनों ही सांसद कांग्रेस के हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा की दलीय स्थिति के आधार पर एक सीट भाजपा और एक कांग्रेस को मिलेगी। बताते हैं कांग्रेस के कोटे से राज्यसभा में जाने के लिए कई नेता लगे हैं। कांग्रेस में ऐसे कई दिग्गज नेता हैं, जो विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव भी हार गए, ऐसे कई नेताओं की नजर राज्यसभा पर है। पूर्व मंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम समेत कई नेता राज्यसभा की दौड़ में बताए जा रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज भी अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। अब सवाल है कि कांग्रेस छत्तीसगढ़ के किसी नेता को राज्यसभा भेजती है या फिर दिल्ली के किसी बड़े नेता को ताज पहनाती है। कांग्रेस के कोटे से अभी तीन राज्यसभा सांसद छत्तीसगढ़ से बाहर के हैं। माना जा रहा है कि इस बार कांग्रेस से छत्तीसगढ़ के किसी कांग्रेस नेता को ही राज्यसभा भेजेगी। किसी आदिवासी नेता को मौका मिलता है या सामान्य या ओबीसी, यह देखना है।
कल्पना वर्मा प्रकरण से पुलिस की साख पर आंच
लव ट्रैप में फंसाकर वसूली के आरोपों में घिरी डीएसपी कल्पना वर्मा को छत्तीसगढ़ सरकार ने निलंबित तो कर दिया, पर इस प्रकरण से छत्तीसगढ़ पुलिस की साख पर दाग लग है, वह कैसे साफ़ होगा, यह बड़ा सवाल है। पुलिस का काम लोगों को सुरक्षा देना और संकट से उबारना है, पर पुलिस के अधिकारी ही अपराध में लिप्त हो जाएंगे या लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर देंगे, तो फिर लोग पुलिस पर विश्वास कैसे करेंगे ? कल्पना वर्मा के खिलाफ जाँच अधिकारी ने 1400 पन्नों की रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता, पद का दुरुपयोग और संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस में कल्पना वर्मा का पहला मामला नहीं है। एक पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी ने एक आईजी स्तर के अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इसकी भी जाँच चल रही है। लोगों को इस मामले की जाँच रिपोर्ट का इंतजार है। इसके पहले भी एक बड़े अफसर पर एक महिला सिपाही ने उत्पीड़न का आरोप लगाया था और मामला विशाखा कमेटी में गई थी। विशाखा कमेटी ने बड़े अफसर के खिलाफ रिपोर्ट दी थी, पर सरकार ने रिपोर्ट को वजन नहीं दिया और बड़े साहब को प्रमोशन दे दिया।
मंत्री का भाई ही मंत्री
कहते हैं राज्य के एक मंत्री जी अपने भाई पर आँख मूँद कर भरोसा कर रहे हैं। यहाँ तक की मंत्री जी ने अपने भाई को फाइलिंग का पासवर्ड तक दे दिया है। खबर है कि मंत्री जी से काम करवाने के लिए पहले भाई से संपर्क करना होता है। मंत्री जी पहली बार विधायक बने हैं। बताते हैं कि मंत्री जी कुछ महीने पहले अपने बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में आ गए थे। संगठन कार्रवाई करते-करते रह गया। इससे मंत्री जी के हौसले और बुलंद हो गए।
रील वाले मंत्री जी
प्रदेश में आजकल विष्णुदेव साय सरकार के एक मंत्री जी रील वाले मंत्री जी के नाम से पहचाने जाने लगे हैं। बताते हैं मंत्री जी हेलिकॉप्टर या फिर कार से उतरते और लोगों से मिलते रील बनवा लेते हैं और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर डाल देते हैं। चर्चा है कि मंत्री जी का फोकस काम की जगह रील बनवाने पर होता है। बताते हैं मंत्री जी रील बनाने के लिए बाकायदा एक टीम रखी है। यह टीम मंत्री जी के साथ ही रहता है।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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