#संपादकीय

कही-सुनी (15 FEB-26) : मार्च के बाद संघ में बड़े फेरबदल के आसार

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रवि भोई की कलम से

चर्चा है कि मार्च में आरएसएस की वार्षिक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद बड़े स्तर पर फेरबदल के आसार हैं। कई राज्यों के संगठन महामंत्री बदले जाएंगे और कुछ नए प्रचारकों को भाजपा में भेजा जा सकता है। आरएसएस की वार्षिक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा हर साल मार्च में होती है। 2026 में हरियाणा के समालखा में आयोजित होने की संभावना है। इस महत्वपूर्ण बैठक में संघ के 2025-2026 के कार्यों की समीक्षा और 2026-2027 की कार्ययोजना पर विचार होगा। कहा जा रहा है कि इस बैठक में प्रांत प्रचारक की जगह क्षेत्रीय प्रचारक और विभाग प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक बनाने के प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लिए जा सकते हैं। इसके अलावा भाजपा में नए प्रचारकों को भेजने और पुराने लोगों की वापसी का भी निर्णय हो सकता है। संगठन में रिक्त पदों को भरने पर भी विचार होगा। पिछले साल आरएसएस की वार्षिक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 21 से 23 मार्च 2025 तक बेंगलुरु में हुई थी। इस बैठक में संघ के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि भाग लेते हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों की जरुरत को पहचाना

छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने राज्य के किसानों की जरुरत को ध्यान में रखकर होली के पहले धान खरीदी की अंतर राशि एक मुश्त होली के पहले देने का फैसला किया है। आमतौर पर छत्तीसगढ़ के गांवों में होली के बाद शादी का सीजन शुरू होता है। खासतौर से किसानों के यहां शादी का लग्न होली के बाद शुरू होता है। इस वक्त तक उनका उपज बिक जाता है और उसका भुगतान भी मिल जाता है। देखा जाता है कि किसानों को उपज का जितना मूल्य मिलता है, उसका अधिकांश हिस्सा दवाई, खाद और अन्य उधारी चुकाने में चला जाता है। शादी-विवाह के लिए उन्हें साहूकारों या अन्य लोगों का मुंह ताकना होता है, उनसे उधारी लेकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते है। धान के मूल्य की अंतर राशि होली के पहले मिल जाने से गांवों में किसानों के पास शादी-विवाह के लिए उधार की जरुरत नहीं पड़ेगी। एक मुश्त राशि का इस्तेमाल अपने बच्चों की शादी में खर्च कर सकेंगे। सरकार ने जरुरत के अनुसार किसानों को फंड उपलब्ध कराकर इस साल उनके शुभ काम में भागीदार बनेगी।

भूपेश बघेल के बेटे का राजनीति में दस्तक

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल पिछले दिनों दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले। खड़गे से मुलाक़ात को चैतन्य बघेल की राजनीति में दस्तक के रूप में देखा जा रहा है। चैतन्य बघेल शराब घोटाले के आरोप में कुछ महीने जेल में बिता चुके हैं। जेल से जमानत पर रिहा होने पर चैतन्य बघेल का भव्य जुलुस भी निकला था। वैसे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्रियों के पुत्रों का राजनीति में प्रवेश की परंपरा रही है। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी एक बार विधायक रहे और अब कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी चला रहे हैं। डॉ रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह एक बार राजनांदगांव से सांसद रहे। अभी भाजपा में सक्रिय हैं। अब देखना यह है कि भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल भी राजनीति की राह पकड़कर किस लक्ष्य पर पहुँचते हैं। छत्तीसगढ़ से वास्ता रखने वाले और संयुक्त मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे श्यामाचरण शुक्ल के पुत्र अमितेश शुक्ल छत्तीसगढ़ में मंत्री रहे और मोतीलाल वोरा के पुत्र अरुण वोरा विधायक।

आईएफएस मनीष कश्यप को गुस्सा क्यों आया ?

2015 बैच के आईएफएस और मनेन्द्रगढ़ के डीएफओ मनीष कश्यप को आखिरकार इतना गुस्सा क्यों आ गया कि उन्होंने अपने वरिष्ठ अफसर को गाली दे दी और पद की प्रतिष्ठा का ख्याल भी नहीं रखा। सरकार ने अमर्यादित आचरण के लिए आईएफएस मनीष कश्यप को सस्पेंड कर दिया। यह अलग बात है कि सरकार ने मनीष को घटना के करीब एक पखवाड़े बाद सस्पेंड किया। घटना 23 जनवरी की है और उनका निलंबन आदेश 9 फ़रवरी को निकला। मनीष कश्यप दूसरी बार सस्पेंड हुए हैं। उन्हें भूपेश बघेल राज में लोक सुराज अभियान के दौरान सस्पेंड किया गया था। वन विभाग के जिस सचिव के साथ मनीष कश्यप ने दुर्व्यवहार किया वे उनसे करीब 17 साल वरिष्ठ हैं और उन्हीं की सेवा के हैं। खबर है कि वरिष्ठ अफसर के एक वाक्य ने आईएफएस मनीष कश्यप का पारा गर्म कर दिया और वे आपा खो बैठे। वरिष्ठता का सम्मान भूल गए। निलंबन के बाद लोग मनीष कश्यप की पिछली घटनाओं को भी याद करने लगे हैं। पर सरकार के सचिव को मातहत द्वारा गाली देने की घटना ने मशीनरी की पोल खोल दी है। चर्चा है कि मनीष कश्यप को स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल की पसंद पर मनेन्द्रगढ़ का डीएफओ बनाया गया था। सुंनने में आ रहा है कि जब मनीष कश्यप को मनेन्द्रगढ़ का डीएफओ बनाया गया था, तब कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उनका विरोध किया था। बाद में गांवों में उनके महुआ बचाओ अभियान और अन्य कामों से उन्हें सराहना मिलने पर विरोध दब गया।

छत्तीसगढ़ में कब बनाया जाएगा पूर्णकालिक डीजीपी

अरुणदेव गौतम को राज्य के कार्यवाहक डीजीपी बने एक साल से भी ज्यादा समय हो गया है पर अब तक पूर्णकालिक डीजीपी की कोई सुगबुगाहट नहीं है। लगता है पूर्णकालिक डीजीपी के लिए यूपीएससी से आया पैनल रद्दी की टोकरी में चला गया। अरुणदेव गौतम 4 फ़रवरी 2025 से छत्तीसगढ़ के कार्यवाहक डीजीपी हैं। 2026 के फरवरी महीने के 15 तारीख़ आने के बाद भी पूर्णकालिक डीजीपी के लिए कोई हलचल नहीं है। नक्सल प्रभावित राज्य होने के साथ अब छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था की समस्या भी निर्मित होने लगी है। तमनार की घटना हो या फिर अन्य जगहों की, पुलिस की रणनीति पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। राज्य में नक्सल समस्या के समाधान के लिए 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद नक्सल समस्या के सफाए की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मानकर चला जा रहा है कि छत्तीसगढ़ अगले कुछ महीनों में माओवादियों के चुंगल से मुक्त हो जाएगा। एक बड़े लक्ष्य को हासिल करने के उत्साह में क्या जरुरी चीजों को तदर्थवाद पर चलाना ठीक है।

भतपहरी के खिलाफ ननकीराम का मोर्चा

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने इस बार लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ननकीराम कंवर राज्य के कई अफसरों के खिलाफ शिकायत कर चुके हैं। ननकीराम कंवर ने राज्य के मुख्य सचिव विकासशील और लोक निर्माण विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह को पत्र लिखकर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। ननकीराम कंवर की चिट्ठी रद्दी की टोकरी में जाती है या रफ्तार पकड़ती है, यह समय बताएगा ? पर ननकीराम कंवर की चिट्टी से लोक निर्माण विभाग सुर्ख़ियों में आ गया है। भूपेश बघेल की सरकार में विजय कुमार भतपहरी को लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता से हटाकर मंत्रालय में ओएसडी बना दिया गया था। विष्णुदेव साय की सरकार में विजय कुमार भतपहरी के दिन फिर लौट आए।

अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 21 फ़रवरी को ?

माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 21 फ़रवरी को हो जाएगा। मतदाता सूची का प्रकाशन हो जाने के बाद राज्य में एसआईआर का काम पूरा हो जाएगा। माना जा रहा है कि एसआईआर का कार्य पूर्ण होने के बाद राज्य के चार पांच कलेक्टर बदले जा सकते हैं। बलौदाबाजार-भाटापारा के कलेक्टर दीपक सोनी की जगह कौन आईएएस जाता है, इस पर सबकी नजर है। दीपक सोनी भारत सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय में जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा अपनी पसंद के किसी आईएएस को बलौदाबाजार-भाटापारा का कलेक्टर बनवाकर ले जा सकते हैं। बलौदाबाजार टंकराम वर्मा का विधानसभा क्षेत्र है। तमनार मामले में रायगढ़ एसपी के तबादले के बाद कलेक्टर को भी बदलने की चर्चा है। माना जा रहा है कि रायगढ़ का कलेक्टर मंत्री ओ पी चौधरी की पसंद का ही अफसर होगा। कुछ बड़े जिलों के कलेक्टर बदले जाने की भी सुगबुगाहट है। मंत्रालय स्तर पर अफसरों के विभागों में हेरफेर अब विधानसभा के बजट सत्र के बाद आसार नजर आ रहा है।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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