कही-सुनी ( 08 MARCH-26) : अफीम की खेती में भाजपा नेता का हाथ

रवि भोई की कलम से
दुर्ग जिले में एक भाजपा नेता द्वारा अफीम की खेती किए जाने का मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भाजपा नेता के अफीम की खेती वाली जगह पर ही पहुंच गए। अफीम की खेती का मामला तूल पकड़ने के बाद भाजपा ने अपने नेता को निलंबित कर दिया है, पर इस घटना से कई सवाल खड़े हो गए हैं। अफीम की खेती गैर कानूनी होने के बाद भी सत्तारूढ़ दल के एक पदाधिकारी ने पार्टी की साख की चिंता नहीं की। राज्य के मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों के इस भाजपा नेता के कई फोटो अब वायरल होने लगे हैं। इस घटना से एक बात तो साफ़ हो गई कि सत्तारूढ़ दल का चोला ओढ़कर कुछ लोग अपना हित साध रहे हैं और पार्टी के नीति-निर्धारक जमीनी हकीकत जाने बिना पद बांट रहे हैं। दूसरा पार्टी में जमीनी कार्यकर्ताओं की जगह परिक्रमा करने वालों को नवाजने की परंपरा चल पड़ी है। छत्तीसगढ़ में नशाखोरी चरम पर है,पुलिस की धरपकड़ के बाद भी थम नहीं रहा है, ऐसे में भाजपा के नेता का नशे की खेती में संलिप्तता से आने वाले दिनों के लिए कांग्रेस को बड़ा मुद्दा मिल गया है।
लक्ष्मी वर्मा के राज्यसभा जाने से किसे फायदा
भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ से महिला नेत्री लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा भेज रही है। लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा भेजने में जातीय समीकरण ज्यादा नजर आ रहा है। बताते हैं भाजपा राज्य में साहू के साथ कुर्मी को साधकर अगले चुनाव में संतुलन बनाने की रणनीति पर काम किया है। साहू और कुर्मी ओबीसी वर्ग में राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। भाजपा ने सरकार में साहू और कुर्मी दोनों को प्रतिनिधित्व दिया है। साहू समाज से उपमुख्यमंत्री अरुण साव हैं तो कुर्मी समाज से मंत्री टंकराम वर्मा। माना जा रहा है कि भूपेश बघेल के कारण कुर्मी समाज का झुकाव कांग्रेस की तरफ कुछ बढ़ा, इसे बैलेंस करने के लिए भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा के रूप में कुर्मी समाज के प्रतिनिधि को राज्यसभा भेज कर रणनीतिक चाल चली है। मंत्री टंकराम वर्मा और लक्ष्मी वर्मा दोनों ही बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के निवासी हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में लक्ष्मी वर्मा बलौदाबाजार सीट से भाजपा की टिकट मांग रही थीं। कहा जा रहा है कि लक्ष्मी वर्मा के राज्यसभा जाने से टंकराम वर्मा का रास्ता निष्कंटक हो गया। करीब तीन दशक से भाजपा से जुड़ीं लक्ष्मी वर्मा रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं।
फूलोदेवी की उम्मीदवारी से सधे कई निशाने
कांग्रेस ने फूलोदेवी नेताम को राज्यसभा के लिए दोबारा उम्मीदवार बनाकर एक तीर से कई निशाना साध लिया। फूलोदेवी नेताम की उम्मीदवारी से राज्य के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं में कोई गिला-शिकवा नहीं दिखा, वहीं फूलोदेवी की उम्मीदवारी से ट्राइबल और महिला कोटा भी फुलफिल हो गया। राज्यसभा में कांग्रेस के 27 मेंबर में पांच महिलाएं ही हैं। इनमें एक मात्र ट्राइबल फूलोदेवी नेताम ही हैं। इस कारण हाईकमान ने फूलोदेवी के नाम पर मुहर लगा दी, फिर छत्तीसगढ़ से भाजपा ने महिला उम्मीदवार के तौर पर लक्ष्मी वर्मा का नाम पहले ही घोषित कर दिया था। इस कारण भी कांग्रेस को महिला उम्मीदवार पर दांव चलना पड़ा। छत्तीसगढ़ विधानसभा में दलीय स्थिति के आधार पर कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट मिलनी तय है। इस कारण फूलोदेवी नेताम और लक्ष्मी वर्मा का राज्यसभा में निर्विरोध जाना तय है।
चुनाव ड्यूटी से मैडम परेशान
कहते हैं मंत्रालय में पदस्थ एक सीनियर महिला अफसर को चुनाव ड्यूटी नहीं भा रहा है। कहा जा रहा है कि मैडम मानकर चल रही थी कि सीनियर लेवल पर पहुँचने के बाद चुनाव कार्य में उनका नंबर नहीं लगने वाला, लेकिन चुनाव आयोग ने अगले कुछ महीनों में पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के लिए मैडम को आव्जर्वर के लिए सूचीबद्ध कर लिया। बताते हैं दूसरे सेवा में कार्यरत मैडम के पति की भी चुनाव डयूटी लग गई है। अब दोनों की चुनाव ड्यूटी से मैडम की परेशानी स्वाभाविक है। खबर है कि मैडम चुनाव ड्यूटी कैंसल कराने की जुगत में तो हैं, पर नतीजा क्या निकलता है, यह देखना होगा।
कौन बनेगा सिंचाई विभाग का ईएनसी
बताया जा रहा है जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता (ईएनसी) इंद्रजीत उइके को अब एक्सटेंशन देने की संभावना कम ही है। करीब-करीब छह साल तक जल संसाधन विभाग के मुखिया की भूमिका में रहने के बाद 31 मार्च को विदा हो जाएंगे। इंद्रजीत उइके को भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार ने ईएनसी बनाया था। वे भूपेश राज में चले और सत्ता बदलने के बाद भी पद पर बने रहे। भाजपा की साय सरकार में उन्हें एक्सटेंशन भी मिल गया। विभाग में वरिष्ठ अफसरों के सॉर्टेज का उइके साहब को खूब लाभ मिला। अब सरकार ने प्रमोशन पॉलिसी में बदलाव कर सीनियर लेवल पर पद भरने का फैसला किया है, फिर भी ईएनसी स्तर पर एक चीफ इंजीनियर स्तर के अफसर को प्रभारी बनाना पड़ेगा। प्रभारी ईएनसी के लिए मक्सी कुजूर का नाम चर्चा में है। कुजूर साहब अभी मंत्रालय में जल संसाधन विभाग के ओएसडी हैं और अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारी हैं। जल्द ही चीफ इंजीनियर के पद पर पदोन्नत होने वाले हैं, उसके बाद विभाग को संभालेंगे। अब देखते हैं प्रमोशन कब तक होता है। अभी जल संसाधन विभाग महानदी जल विवाद को सुलझाने में लगा है। जस्टिस बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ओडिशा के बाद छत्तीसगढ़ के दौरे पर है।
कृषि विभाग के विभीषण
कृषि विभाग के एक अफसर को विभीषण कहा जा रहा है। कहते हैं कृषि विभाग के ये अफसर अपने ही मातहतों और वरिष्ठों के खिलाफ विधानसभा में ध्यानाकर्षण और सवाल लगाते हैं। अफसर की इस रणनीति से विभाग के अन्य स्टाफ उनके आगे-पीछे होता रहता है और विभाग में साहब की तूती बोलती है। बताते हैं जो अफसर या मातहत उनके आगे-पीछे नहीं होते परेशान रहते हैं। विधानसभा के ध्यानाकर्षण और सवालों के जवाब बनाने में उलझे रहते हैं। कहते हैं विभाग की ही पोल-पट्टी खोलने वाले अफसर को एक बड़े अफसर का संरक्षण भी मिला हुआ है। इस कारण उनका हौसला और भी बुलंद रहता है।
राजीव श्रीवास्तव का पुनर्वास
भाजपा-कांग्रेस करने वाले रिटायर्ड डीजी राजीव श्रीवास्तव को साय सरकार में राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण का सदस्य बनाया गया है। 1987 बैच के आईपीएस श्रीवास्तव रिटायमेंट के महज 15 दिन पहले डीजी प्रमोट हुए। रिटायरमेंट के बाद भाजपा ज्वाइन कर लिया। कांग्रेस की सरकार आई तो भाजपा को छोड़ दिया और सरकार बदली तो फिर भाजपा के हो गए। राजीव श्रीवास्तव राज्य पुलिस सेवा से डीजी के पद पर पहुंचने वाले छत्तीसगढ़ के पहले अफसर हैं। रिटायर्ड आईएएस आरपीएस त्यागी भी भाजपा से जुड़े हैं, तो रिटायर्ड आईएफएस राकेश चतुर्वेदी का भी भाजपा नेताओं से नाता है। अब देखते हैं इनको कब सरकारी पद मिलता है।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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