कही-सुनी (15 MARCH-26) : यूपीएससी को खबर नहीं, छत्तीसगढ़ का डीजीपी कौन ?

रवि भोई की कलम से
कहते हैं कि यूपीएससी ने पिछले दिनों राज्य के मुख्य सचिव विकासशील को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के डीजीपी के बारे में खोज-खबर ली है। यूपीएससी ने कई महीने पहले छत्तीसगढ़ के डीजीपी के लिए दो नामों का पैनल राज्य सरकार को भेजा था, पर सरकार ने पैनल में से किसी को डीजीपी बनाने की जगह 1992 बैच के आईपीएस अरुण देव गौतम को प्रभारी डीजीपी बनाए हुए है। गौतम साहब को कार्यकारी डीजीपी बने साल भर से ज्यादा हो गया है। बताते हैं अब यूपीएससी ने सरकार से छत्तीसगढ़ के डीजीपी का नाम मांगा है। साथ ही यह भी पूछा है कि उसके द्वारा भेजे गए पैनल में से किसे डीजीपी बनाया गया बताएं। बताते हैं यूपीएससी ने डीजीपी के लिए पैनल में अरुण देव गौतम और हिमांशु गुप्ता का नाम भेजा था, पर डीजीपी के दावेदार पवनदेव और जीपी सिंह का नाम न होने से पेंच फंस गया। इस पेंच के कारण मामला लटका तो लटक ही गया है। अरुणदेव गौतम जुलाई 2027 में रिटायर होंगे। अब उन्हें डीजीपी बनाया जाता है, तो न्यूनतम दो साल तक डीजीपी बनाए रखने की बाध्यता के कारण अब उन्हें डीजीपी बनाया जाता है तो वे 2028 में रिटायर होंगे। 1992 बैच के आईपीएस पवनदेव का कार्यकाल जुलाई 2028 तक है। इसके बाद 1994 बैच के जीपी सिंह और हिमांशु गुप्ता 2029 में रिटायर होंगे। जीपी सिंह सुप्रीम कोर्ट से बहाल होकर आए हैं, पर सालभर हो गया है सरकार ने उन्हें अब तक कोई प्रभार नहीं दिया है। हिमांशु गुप्ता जेल के डीजी हैं। अरुणदेव गौतम प्रभारी डीजीपी के साथ होमगार्ड के डीजी हैं। पवनदेव पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के एमडी हैं।
क्या बंश गोपाल सिंह फिर बनेंगे कुलपति ?
चर्चा है कि पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर के दो बार कुलपति रह चुके डॉ बंश गोपाल सिंह अब अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति की दौड़ में हैं। बताते हैं कि सर्च कमेटी ने तीन मार्च को कुलपति पद के तकरीबन 16 दावेदारों का इंटरव्यू लिया था। खबर है कि डॉ बंश गोपाल सिंह ने भी इंटरव्यू दिया। दावेदारों के इंटरव्यू के बाद सर्च कमेटी ने अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति पद के लिए चार लोगों के नामों का पैनल तैयार कर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को सौंप दिया है।अब अंतिम निर्णय राज्यपाल को लेना है। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति पद के लिए इंटरव्यू में शामिल होने से डॉ बंश गोपाल सिंह सुर्ख़ियों में हैं। एक वे दो बार कुलपति रह चुके हैं, फिर 65 की उम्र पार भी कर चुके हैं। वैसे छत्तीसगढ़ के सरकारी विश्वविद्यालयों में 70 साल की उम्र तक कुलपति रह सकते हैं। डॉ बंश गोपाल सिंह पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर में मनोविज्ञान विभाग में प्रोफ़ेसर रहे हैं और मूलतः वे उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं, उनकी प्रारंभिक व उच्च शिक्षा गोरखपुर (उत्तरप्रदेश ) में हुई। वे 1985 में पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर में एडल्ट एजुकेशन में प्रोजेक्ट ऑफिसर के रूप में नियुक्त हुए थे। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति ए डी एन वाजपेयी का कार्यकाल इस साल 22 फ़रवरी को समाप्त हो गया। 69 वर्ष के वाजपेयी फिलहाल इस विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। स्व.नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ ललित कुमार पटेरिया का भी कार्यकाल समाप्त हो चुका है। सर्च कमेटी ने यहां के लिए पिछले साल नवंबर में ही पांच लोगों के नामों का पैनल राज्यपाल को सौंप दिया था। बताते हैं स्थायी कुलपति नियुक्त करने के लिए राज्यपाल के पास छह माह का समय होता है। अभी स्व.नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय के अस्थायी कुलपति डॉ ललित कुमार पटेरिया ही हैं। माना जा रहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद किसी को स्व.नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त कर दिया जाएगा।
विजय शर्मा को बिहार का पर्यवेक्षक बनाने के मायने
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को बिहार में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी का पर्यवेक्षक बनाया गया है। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होना है और पांचों सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार की जीत उन्हें सुनिश्चित करना है। बिहार में राज्य सभा की पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां राजद ने भी अपना प्रत्याशी खड़ा किया है। बिहार के कोटे से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को राज्य सभा जाना है, तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी। चुनाव के नजरिये से बिहार को संवेदनशील राज्य माना जा रहा है, ऐसे में विजय शर्मा को वहां का पर्यवेक्षक बनाए जाने को उनके कद में इजाफे के रूप में देखा जा रहा है। विजय शर्मा प्रदेश भाजयुमो के अध्यक्ष रहे है और प्रदेश भाजपा के महामंत्री भी। बिहार नितिन नवीन का गृह राज्य है और वहां के पर्यवेक्षक विजय शर्मा को बनाए जाने के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। विजय शर्मा युवा हैं और भाजपा के हिंदुत्व चेहरा भी। माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ से भाजपा के किसी युवा चेहरे को नितिन नवीन की टीम में जगह मिल सकती है। अब देखते हैं किसको यह अवसर मिलता है। कहते हैं छत्तीसगढ़ के कुछ भाजपा नेताओं को पहले भी राष्ट्रीय राजनीति में जाने का अवसर मिला था, पर वे राज्य की राजनीति का मोह छोड़ नहीं पाए और अब पार्टी में अपने स्थान के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती ने मचाया बवंडर
‘धान के कटोरे’ कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती ने राजनीतिक बवंडर खड़ा कर दिया है। अफीम की खेती दुर्ग संभाग से निकलकर सरगुजा संभाग तक जा पहुंची है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक पखवाड़े में सर्वे का फरमान जारी किया है। इसके बाद ही तस्वीर साफ़ होगी । छत्तीसगढ़ में एक कहावत बड़ा प्रचलन में है “अमीर धरती के गरीब लोग”। राज्य में जिस तरह बलरामपुर इलाके में अफीम की खेती पकड़ी गई, उससे साफ़ है कि छत्तीसगढ़ में सबकुछ पैदा हो सकता है। अफीम के लिए मध्यप्रदेश का मंदसौर-नीमच और राजस्थान का कुछ इलाका प्रसिद्ध है। दुर्ग में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार का मामला उजागर होने के बाद छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती की कहानी परत-दर-परत खुल रही है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में सरकारें किसानों को अफीम की खेती का लायसेंस देती है और एग्रीमेंट करती है। अफीम सूखे नशे की श्रेणी में आता है। जानकार बताते हैं कि इसका कोई भी हिस्सा बेकार नहीं जाता। राज्य में कई जगह अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद लोग मजाक में इसे फसल चक्र परिवर्तन कहने लगे हैं, तो कुछ समृद्धि का रास्ता। एक बात तो साफ़ है कि अफीम की खेती राज्य में चर्चा का विषय बन गया है और राजनीतिक मुद्दा भी। छत्तीसगढ़ में किसानों का धान सरकार खरीदती है और समर्थन मूल्य के साथ बोनस या कहें अतिरिक्त राशि भी देती है। इससे किसानों की आर्थिक हालात काफी सुधरे हैं। कई गांवों में किसान दो पहिये से चार पहिये वाहन में आ गए हैं। राज्य की विष्णुदेव साय सरकार भी किसानों का धान प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से खरीद रही है और प्रति क्विंटल 3100 रुपए भुगतान भी कर रही है। इससे धान की फसल किसानों के लिए काफी मुनाफे का सौदा हो गया है।
के के कटारे को राहत
कहते हैं फर्जी जाति मामले में उलझे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के मुख्य अभियंता के के कटारे को हाईकोर्ट से तीन हफ्ते की राहत मिल गई है। पिछले दिनों राज्य के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने के के कटारे की जाति प्रमाणपत्र को गलत ठहराया था। बताते हैं इसके खिलाफ के के कटारे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट गए। कहा जा रहा है कि तकनीकी आधार पर कटारे को तीन हफ्ते की राहत दे दी है, पर कटारे के ऊपर मंडरा रहे संकट के बादल छटे नहीं हैं। कटारे की जाति को लेकर अधिवक्ता विजय मिश्रा ने शिकायत की थी। अब देखते हैं तीन हफ्ते बाद क्या होता है।
सटोरिये की होली पार्टी
कहते हैं पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के एक बड़े सटोरिये ने अपने फार्म हाउस में बड़ी पार्टी रखी थी।इसमें छोटे सटोरियों के अलावा शहर के कुछ नामी लोग भी गए थे। बताते हैं बड़ा सटोरिया हर साल होली की पार्टी देता है, पर साल का पार्टी कुछ ख़ास था। रायपुर में आईपीएल के दो मैच होने हैं। अभी तारीख का ऐलान नहीं हुआ है, पर रायपुर में करीब 10 साल बाद आईपीएल के मैच होंगे, ऐसे में लोगों का क्रेज है और आईपीएल के जरिए दांव लगाने वाले भी उत्साहित हैं। चर्चा है कि मैच से पहले ही गोटियां बिछ गईं हैं।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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