कही-सुनी (22 MARCH-2026) : छत्तीसगढ़ के राजनीतिक राज्यपालों की इच्छाएं

रवि भोई की कलम से
पिछले 25-26 सालों में आईएएस-आईपीएस, सेना अधिकारी और राजनेता सभी तरह के विशिष्टजन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बने हैं। देखा गया है कि सक्रिय राजनीति से लोकभवन में आने वाले विशिष्टजन अपने रिश्तेदारों को भी राजनीति में उतारने की इच्छा रखते हैं। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रहे स्व बलरामदास जी टंडन अपने बेटे को सक्रिय राजनीति में लाने में लगे रहे, उनका बेटा चंडीगढ़ भाजपा के अध्यक्ष रहे। बताते हैं कि स्व. टंडन जी अपने पुत्र को चुनाव में भाजपा की टिकट दिलाने में लगे रहे। स्व. टंडन जी जनसंघ के जमाने के नेता थे। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रहे विश्वभूषण हरिचंदन अपने पुत्र को ओडिशा विधानसभा चुनाव की टिकट दिलाने में सफल रहे। श्री हरिचंदन के पुत्र चुनाव जीते और अभी मोहन चरण माझी के कैबिनेट में मंत्री हैं। बताते हैं छत्तीसगढ़ के वर्तमान राज्यपाल रमेन डेका अपनी बेटी को इस बार असम विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट दिलवाना चाहते थे, पर पार्टी ने उनकी बेटी को उम्मीदवार नहीं बनाया। खबर है कि रमेन डेका पलासबारी विधानसभा सीट से अपनी बेटी की उम्मीदवारी चाहते थे, पर भाजपा ने वहां हिमांशु शेखर बैश्य को टिकट दे दिया।
कौन होगा नया जनसंपर्क आयुक्त ?
राज्य के जनसंपर्क आयुक्त डॉ रवि मित्तल के प्रधानमंत्री कार्यालय में उप सचिव बनाए जाने की खबर के बाद नए जनसंपर्क आयुक्त के लिए कयासबाजी शुरू हो गई है। जनसंपर्क विभाग सरकार का चेहरा चमकाने के साथ मुख्यमंत्री की छवि निखारने के साथ कई भूमिका में होता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को अपने करीब 27 माह के कार्यकाल में तीसरा जनसंपर्क आयुक्त नियुक्त करना पड़ेगा। साय सरकार ने पहले आईपीएस मयंक श्रीवास्तव को जनसंपर्क आयुक्त बनाया। इसके बाद 2016 बैच के आईएएस डॉ रवि मित्तल को जनसंपर्क आयुक्त के तौर पर लाया गया। डॉ मित्तल पीएमओ में जाने वाले हैं ऐसे में साय सरकार को नए जनसंपर्क आयुक्त की नियुक्ति करनी पड़ेगी। नए जनसंपर्क आयुक्त के लिए 2009 बैच के आईएएस अवनीश शरण, 2012 बैच के आईएएस रजत बंसल और 2013 बैच के आईएएस और रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह का नाम चर्चा में है। मुख्यमंत्री रहते भूपेश बघेल ने 2006 बैच के आईएएस एस भारतीदासन को रायपुर कलेक्टर के पद से तबादला कर जनसंपर्क आयुक्त बनाया था।
रवि मित्तल पीएमओ में छत्तीसगढ़ कैडर के तीसरे अधिकारी
अमित अग्रवाल, डॉ रोहित यादव के बाद डॉ रवि मित्तल पीएमओ में पदस्थ होने वाले तीसरे आईएएस अधिकारी है। 1993 बैच के आईएएस अमित अग्रवाल जुलाई 2004 से नवंबर 2012 के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में रहे। वे पीएमओ में उप सचिव के रूप में गए थे। संयुक्त सचिव भी रहे। 2002 बैच के आईएएस अधिकारी रोहित यादव फरवरी 2020 से जुलाई 2023 तक पीएमओ में संयुक्त सचिव रहे। अब छत्तीसगढ़ कैडर के 2016 बैच के आईएएस रवि मित्तल पीएमओ में उप सचिव पदस्थ किए गए हैं। बताते है रवि मित्तल पीएमओ में मंत्रियों से समन्वय,महत्वपूर्ण योजनाओं की मॉनिटरिंग अन्य काम देखेंगे। रवि मित्तल छत्तीसगढ़ में जनसंपर्क आयुक्त के साथ मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव हैं। माना जा रहा है कि पीएमओ में पोस्टिंग से रवि मित्तल को काम करने का बड़ा कैनवास मिलेगा। चर्चा है कि पीएमओ में नियुक्ति के छत्तीसगढ़ के दो अफसरों का नाम था, जिसमें रवि मित्तल का चयन किया गया।
मंत्रालय और जिलों में बड़े बदलाव की चर्चा
विधानसभा का बजट सत्र निपटने के बाद मंत्रालय और जिलों में बड़े बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है। उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते बड़ा बदलाव हो जाएगा। चर्चा है कि जिलों से ज्यादा मंत्रालय में बदलाव होगा। माना जा रहा है कि जिन अफसरों के पास काम का बोझ ज्यादा है, उन्हें हल्का किया जाएगा और जिनके पास वर्कलोड कम है, उन्हें कुछ अतिरिक्त विभाग दिए जाएंगे। खबर है कि दो साल से एक ही विभाग में पदस्थ अफसरों में उलटफेर हो सकता है। 2011 बैच के आईएएस और कांकेर कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले हैं। अब तक कलेक्टर रहते राज्य के कई अफसर भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जा चुके हैं। 2008 के बाद प्रतिनियुक्ति नियमों में बदलाव के कारण राज्य के कई अफसर भारत सरकार की तरफ रुख करने लगे हैं। बताते हैं 2006 बैच के आईएएस अंकित आनंद, 2010 बैच के आईएएस सारांश मित्तर और कुछ अन्य अधिकारी भी भारत सरकार में डेपुटेशन पर जाना चाहते हैं, लेकिन राज्य सरकार से अनुमति नहीं मिलने के कारण अटके हैं।
चुनाव ड्यूटी निरस्त कराने में कामयाब अफसर
पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव में राज्य के कई आईएएस-आईपीएस और एलाइड सर्विस के अफसरों की ड्यूटी लगी है। कुछ अफसर अलग -अलग विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच गए हैं, तो कुछ अफसरों को चुनाव आयोग रिजर्व में रखा है। विधानसभा चुनाव ड्यूटी को लेकर कई अफसर परेशान भी रहे और हैं भी। पर राज्य के अफसर ऐसे भी निकले जिन्होंने अपनी चुनाव ड्यूटी निरस्त करवा ली। इस अफसर के पास चुनाव आयोग से चुनाव ड्यूटी कैंसल होने का पत्र भी आ गया। अब चुनाव ड्यूटी से परेशान अफसर इस अधिकारी की पहुँच और संपर्क का पता लगाने में लगे हैं। यह अफसर कई साल भारत सरकार में पदस्थ रहे और महत्वपूर्ण जगह पर, तो इतना तो बनता ही है। यह अफसर राज्य में कई विभागों के सचिव और भी कुछ महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ हैं।
सदन में आक्रामक दिखे महंत
विधानसभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत के तेवर कुछ आक्रामक दिखे। स्थगन प्रस्ताव और सवालों के माध्यम से सरकार को घेरा। इस बार विधानसभा में कांग्रेस को कई मुद्दे भी मिले। धान खरीदी तो बड़ा मुद्दा था ही, लाखों रुपये के धान चूहे खा जाने की घटना, राज्य में अफीम की खेती और उसमें एक भाजपा नेता की संलिप्तता, बीजापुर के पोटा कैबिन में तीन छात्राओं के गर्भवती होने का मामला और रसोई गैस की कीमतों में 60 रुपए की वृद्धि जैसे कई और मुद्दे भी सरकार पर हमले के लिए कांग्रेस को मिल गए। कांग्रेस ने कई मौकों पर सदन के गर्भगृह में जाकर अपनी ताकत दिखाई, तो कई बार बहिर्गमन भी किया। विधानसभा की पिछली कार्यवाहियों में सत्ता पक्ष के विधायक अजय चंद्राकर ही छाये दिखते थे, पर इस बार कांग्रेस के उमेश पटेल, रामकुमार यादव जैसे विधायकों ने भी अपनी उपस्थिति दिखाई। पहले संभावना जताई जा रही थी कि विधानसभा सत्र निर्धारित समय से पहले समाप्त हो जाएगा, पर तय समय तक ही चला। यह भी विपक्ष के लिए अच्छा रहा।
नए पीसीसीएफ मई के बाद
चर्चा है कि राज्य को नया पीसीसीएफ और वन बल प्रमुख इस साल मई के बाद मिलेगा। वर्तमान पीसीसीएफ और वन बल प्रमुख वी श्रीनिवासराव 31 मई को रिटायर हो जाएंगे। माना जा रहा है कि इसके बाद वन विभाग के मुखिया की जिम्मेदारी अरुण पांडे को मिलेगी। अरुण पांडे अभी पीसीसीएफ वन्य प्राणी हैं। अरुण पांडे मई में वन बल प्रमुख बनते हैं, तो उन्हें एक साल से कुछ अधिक समय काम करने का मौका मिलेगा। वैसे श्रीनिवासराव के रिटायरमेंट के बाद अरुण पांडे से वरिष्ठ तपेश झा और अनिल साहू सेवा में रहेंगे, पर तपेश झा इस साल जून में और अनिल साहू इस साल जुलाई में रिटायर हो जाएंगे। तपेश झा तो श्रीनिवासराव से भी वरिष्ठ हैं और अनिल साहू उनके बैच के हैं। अब श्रीनिवासराव के रिटायरमेंट के बाद अनिल साहू को वन बल प्रमुख का स्केल मिलता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। अनिल साहू अभी राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग जूनियर अफसरों के भरोसे
कहते हैं स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी और डीपीआई ऋतुराज रघुवंशी के चुनाव ड्यूटी में जाने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग में चार मई तक तो कोई नीतिगत निर्णय नहीं होना है। खबर है कि ऋतुराज रघुवंशी डीपीआई के अलावा शिक्षा विभाग से सबद्ध अन्य संस्थाओं के भी मुखिया हैं। इन संस्थाओं का चालू प्रभार मातहतों को सौंप दिया गया, पर उन्हें निर्णय लेने का अधिकार नहीं होगा। डीपीआई का चार्ज सहायक संचालक स्तर के एक अफसर को सौंपे जाने की खबर है। डीपीआई में सीनियर के रहते जूनियर को डीपीआई का कामकाज सौंपे जाने को लेकर भी कानाफूसी हो रही है। शिक्षा सत्र के पहले बड़े अफसरों की गैरहाजिरी से विभाग का कामकाज कैसे चलेगा, यह बड़ा सवाल है।
पुलिस कमिश्नरी सिस्टम और रायपुर
राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हुए करीब दो महीने हो गए। इस दो महीने में न तो अपराध में कोई कमी दिखाई दी और न ही ट्रैफिक सुधार दिखा। चाकूबाजी और गोलीबारी की घटनाएं वैसी ही हैं। नशे की चीजें भी धड़ल्ले से बिक रही हैं। कहते हैं राजधानी में कमिश्नरी सिस्टम से ऊपर स्तर पर तो अधिकारी बढ़ गए। नीचे का स्टाफ नहीं बढ़ा। रायपुर ग्रामीण जिला और कमिश्नरी सिस्टम लागू होने से स्टाफ का बंटवारा हो गया। पुलिस कमिश्नर,एसीपी,डीसीपी और दूसरे अफसरों के बैठने की व्यवस्था जैसे तैसे हो गई है। रायपुर ग्रामीण एसपी का आफिस कम ही लोगों को मालूम है। अब सरकार बिलासपुर और दुर्ग में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की सोच रही है, तो व्यवस्था पहले करे,तभी पुलिस कमिश्नर सिस्टम का फायदा लोगों को मिलेगा और अच्छे नतीजे भी सामने आएंगे।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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