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नगर के सभी जल ग्रहण स्रोतों पर हो गया अवैध कब्जा जल संकट गहराने का एक बड़ा कारण

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0 आम जनताओं के साथ ही नगरपालिका भी पीछे नहीं अतिक्रमण करने में
0 महल बांध में ही 3.50 लाख वर्गफुट से अधिक कब्जा

दिलीप गुप्ता ,सरायपाली।नगर में पिछले कई वर्षों से नगरवासी भीषण पेयजल व निस्तारी की समस्याओं से जूझ रहे हैं । नगर का हो भूजल लेबल आज 600 फिट से भी नीचे चला गया है जिसके कारण नगर में भीषण पेयजल की समस्या उत्पन्न हो चुकी है । वहीं आम लोगों को निस्तारी की समस्याओ से भी जूझना पड़ रहा है । नगर मे लगातार उत्पन्न हो रहे पेयजल संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण जमीन से पानी का दोहन करना है जबकि जमीन में पानी जाने की कोई योजना व प्रयास नहीं किए जा रहे है जिससे भूजल में कमी आ रही है । शासन का इसके बचाव हेतु सभी नवनिर्मित भवनों में आवश्यक रूप में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाना है तभी उन्हें भवन निर्माण की अनुमति मिलती है पर संभवतः इस नियम व आदेश का पालन नगरपालिका नहीं कर रही है । नगर मे शायद ही किसी भी भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा हो फिर अनुमति क्यों मिल रही है । यह जांच व संज्ञान में लिए जाने का विषय है । नगरपालिका को भी इसे गंभीरता से लेते हुवे दिए गए नक्शों की जांच करनी चाहिए ।

वहीं नगर में जहां जहां भी जल ग्रहण श्रोत थे उन सभी को पाट दिया गया है तो कही कही पर अतिक्रमण कर भवन निर्माण कर लिया गया है । नगर मे अनेक छोटे छोटे जल ग्रहण क्षमता वाले जल श्रोत थे जिसे डबरी कहा जाता है यहां हमेशा पानी रहता था पर कुछ लोगों द्वारा इसे भी नहीं छोड़ा जा है । आम जनता तो इन जल ग्रहण स्रोतों में अतिक्रमण कर ही रही है पर इस कार्य में शासकीय विभाग भी पीछे नहीं है । जिन्हें अतिक्रमणकारियो व अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए वे ही लोग अतिक्रमण कर भवन निर्माण कर लिए हैं । इन छोटे छोटे जल ग्रहण डबरियों का संरक्षण व संवर्धन किए जाने के बजाय अपने निजी स्वार्थ के चलते इसे उल्टा बढ़ावा दिया जा रहा है । आज महल बांध में 2016 के रिकॉर्ड के अनुसार 3.5 लाख वर्गफिट बांध को अतिक्रमण कर सैकड़ों की संख्या में घरों का निर्माण कर लिया गया है जिससे बांध की जल ग्रहण क्षमता आधी से भी कम रह गई है ।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार नगरीय क्षेत्र में एक बांध व छोटे बड़े सिर्फ 5-6 तालाब ही ही बचे है । इनमें वर्षों पुरानी 5-6 डबरिया भी थी जिनमें हमेशा पानी भरा रहता था । पहले ओड़िया पारा , बनिया पारा , झिलमिला नायक पारा स्थित डबरी तथा जगन्नाथ पेट्रोल पंप के ठीक सामने डबरिया थी । ओड़िया पारा व जगन्नाथ पेट्रोल पम्प के सामने स्थित डबरी को नगरपालिका द्वारा ही पाट कर टाउन हाल व सामुदायिक भवन बना दिया गया । बनिया पारा की डबरी को अतिक्रमण कर अनेक लोगों द्वारा मकाने बना ली गई तो वहीं नायक पारा स्थित डबरी को पास ही के एक निजी भूमि स्वामी द्वारा पाट दिए जाने की जानकारी दी गई है । जानकारी के अनुसार अन्य भू स्वामियों ने बताया कि खसरा नंबर 149/1 व 149/2 शासकीय भूमि है जहां वर्षों से डबरी थी । इसी डबरी व शासकीय भूमि को पीछे जाने के लिए आम रास्ता बनाए जाने का खेल जनप्रतिनिधियों से मिली भगत कर किया जा रहा है जबकि वार्डवासी यहां सामुदायिक भवन व सार्वजनिक प्रशासन केंद्र की मांग कर रहे हैं ।
इस तरह नगर के 4 डबरियों की यह दुर्गति हो चुकी है ।

इसी तरह नगर में वर्तमान में महल बांध , शंकर मुडा, रानी सागर , बड़ा तालाब , जोगी तालाब , कल्लू तालाब व झिलमिला कुल 7 शासकीय तालाब है जिनमें रानी सागर निजी है । महल बाघ 1962 में निर्माण किया गया था । 1985 के आसपास यहां अतिक्रमण कर लोग छोटे रूप में घर बना कर रहने लगे धीरे धीरे यह 2016 की स्थिति में 131 घर सर्वे में मिला । जल संसाधन द्वारा सभी को नोटिस कई बार दिया गया । एसडीएम , तहसीलदार , नगरपालिका व विद्युत विभाग को कब्जाधारियों से कब्जा खाली कराए जाने हेतु 16 बार पत्र लिखा गया पर कार्यवाही शून्य । 2016 की स्थिति में विभागीय आंकड़ों के अनुसार 3.5 लाख वर्गफुट पर अतिक्रमण कारियो द्वारा बांध के जल ग्रहण क्षेत्र में कब्जा कर जल ग्रहण क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया गया । आज 2026 में यह आंकड़ा कितना पहुंच गया होगा इसका सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है । प्रशासन व नगरपालिका की लापरवाही व नेताओ के राजनैतिक स्वार्थ के चलते महल बांध में लगातार अतिक्रमण बढ़ते जा रहा है व महल बांध का क्षेत्रफल दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है ।

इसी तरह बड़ा तालाब जहां पानी हमेशा भरा रहता है नगरपालिका व नपाध्यक्षों के त्रुटिपूर्ण वी दोषपूर्ण योजनाओं व सौंदर्यीकरण के नाम से एक ओर भारी भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया तो वहीं तालाब के जल ग्रहण क्षमता को भी काफी कम कर दिया गया । जोगी तालाब में स्वयं नगरपालिका द्वारा अतिक्रमण कर कार्यालय बना दिया गया है निर्माण के समय विरोध व आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी पर सत्तासीन होने के नाते कोई सुनवाई व कार्यवाही नहीं हो सकी । शेष तालाब अभी अतिक्रमण से बचे हुवे हैं । एक और जल क्षमता का केंद्र पुराने जमाने के कुएं जिनमें पर्याप्त मात्राओं में पानी रहा करता था अब लगभग अधिकांश कुंवें लुप्तप्राय हो गए हैं ।

इस तरह भू जल ग्रहण की क्षमता बढ़ाने वाले बांध , तालाब , डबरिया व कुओं के अतिक्रमण किए जाने के कारण वाटर लेबल 600 से नीचे चला गया है जो नगर में पेयजल को प्रभावित करने के साथ ही चिंता का विषय बन गया है ।जब तक इन जल श्रोतों को अतिक्रमन से सुरक्षित व संरक्षित नहीं किया जायेगा साथ ही भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य नहीं किया जाएगा तब तक नगर पेयजल समस्या से नहीं उबर पाएगा । इसके लिए संबंधित प्रशासन व नगरपालिका को गंभीरता से मंथन करना होगा ।