#प्रदेश #राष्ट्रीय

केरल में राजनीतिक बदलाव: वीडी सतीशन बने नए मुख्यमंत्री, तिरुवनंतपुरम में हुआ शपथ ग्रहण ,60 साल में पहली बार पूरी कैबिनेट की शपथ

Advertisement Carousel

 

तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण समारोह तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में भव्य रूप से आयोजित किया गया।

इस मौके पर कांग्रेस के शीर्ष नेता Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra, Mallikarjun Kharge समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। साथ ही कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी समारोह में हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री के साथ ही नई कैबिनेट के 20 मंत्रियों ने भी एक साथ शपथ ली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे, जो राज्य के विभिन्न हिस्सों से राजधानी पहुंचे थे।

यूडीएफ की बड़ी जीत का दावा

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि करीब 60 साल बाद यूडीएफ की पूरी कैबिनेट ने एक साथ शपथ ली है। जानकारी के अनुसार, केरल विधानसभा की 140 सीटों में से यूडीएफ ने 102 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि एलडीएफ को 35 और भाजपा को 3 सीटें मिली हैं।

नई कैबिनेट में ये प्रमुख चेहरे शामिल

नई सरकार में कांग्रेस, आईयूएमएल, केरल कांग्रेस, आरएसपी और सीएमपी के नेताओं को शामिल किया गया है। कुल 20 मंत्रियों की सूची में कई वरिष्ठ और युवा चेहरों को जगह दी गई है।

विभागों के बंटवारे की संभावना

हालांकि विभागों का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रमेश चेन्नीथला को गृह और विजिलेंस विभाग, एपी अनिल कुमार को स्वास्थ्य, एम लिजू को राजस्व, और एन शम्सुद्दीन को शिक्षा मंत्रालय मिल सकता है।

वीडी सतीशन का राजनीतिक सफर

वदस्सेरी दामोदरन सतीशन (वीडी सतीशन) का जन्म 31 मई 1964 को कोच्चि के नेट्टूर में हुआ था। उन्होंने कानून और सामाजिक कार्य की पढ़ाई की और लंबे समय तक वकालत भी की। छात्र राजनीति से शुरुआत करते हुए वे एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव रहे और बाद में कांग्रेस संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।

1996 में उन्होंने पहली बार परावूर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि जीत 2001 में हासिल हुई। इसके बाद वे लगातार राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे और कांग्रेस संगठन में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे।