धर्मांतरण पर नंदकुमार साय का बड़ा बयान: “सुनियोजित साजिश बर्दाश्त नहीं, कानून करेगा सख्त कार्रवाई”

० आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ते धर्म परिवर्तन पर जताई चिंता, बोले- धर्मांतरण कराने वालों का किया जाएगा विरोध
रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर जारी बहस के बीच वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने बड़ा बयान देकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण कराया जा रहा है और इसमें केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि अन्य समुदायों के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।
नंदकुमार साय ने कहा कि आदिवासी समाज के साथ-साथ साहू समाज समेत कई अन्य वर्गों के लोगों का भी बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग धर्मांतरण कराने में शामिल हैं, उनके प्रयासों का विरोध किया जाएगा और कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या धोखे से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।
क्या कहता है छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून?
छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जिसका उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव या दबाव डालकर धर्म परिवर्तन कराने पर रोक लगाना है। कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना दंडनीय अपराध है।
हालांकि, यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा और स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है। कानून का मूल उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और जबरन या कपटपूर्ण धर्मांतरण को रोकना है।धर्मांतरण के मुद्दे पर नंदकुमार साय के इस बयान के बाद प्रदेश में एक बार फिर इस संवेदनशील विषय पर चर्चा तेज हो गई है।




