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बारिश में खुले गड्ढे बने बच्चों की जान के दुश्मन, बाल आयोग ने सरकार को जारी की सख्त अनुशंसा

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० 7 जुलाई तक मांगी कार्रवाई रिपोर्ट, निर्माण स्थलों और खुली नालियों को तत्काल सुरक्षित करने के निर्देश

रायपुर। बारिश के मौसम में खुले गड्ढों, निर्माणाधीन स्थलों और खुली नालियों से बच्चों की जान को बढ़ते खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नगरीय प्रशासन विभाग और सभी नगरीय निकायों को सख्त निर्देश जारी करने की अनुशंसा की है। आयोग ने कहा है कि ऐसी लापरवाही बच्चों के जीवन के अधिकार के साथ खिलवाड़ है और इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि हाल के समय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कॉलोनियों के निर्माणाधीन गड्ढों, सड़कों पर खुले गड्ढों या बारिश के पानी से ढकी नालियों में गिरने से बच्चों की मौत हो चुकी है। इसे गंभीर और चिंताजनक बताते हुए आयोग ने तत्काल प्रभाव से रोकथाम के उपाय करने की आवश्यकता जताई है।

बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13 एवं धारा 15 के तहत जारी अनुशंसा में कहा गया है कि सभी नगरीय क्षेत्रों में विशेष सर्वे अभियान चलाकर खुले गड्ढों, नालियों और निर्माणाधीन स्थलों की पहचान की जाए। जहां संभव हो, गड्ढों को तुरंत भर दिया जाए और जहां यह संभव न हो, वहां मजबूत बैरिकेडिंग या सुरक्षा घेरा बनाकर बच्चों की पहुंच पूरी तरह रोकी जाए।

आयोग ने सभी निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और आवासीय कॉलोनियों को निर्देशित करने की अनुशंसा की है कि निर्माण कार्य के लिए खोदे गए गड्ढों और नींव स्थलों के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। संवेदनशील निर्माण स्थलों पर चौकीदार या सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए जाएं, ताकि बच्चों को दुर्घटना से बचाया जा सके।

आयोग ने यह भी कहा कि बारिश के दौरान छोटे और गहरे गड्ढों में अंतर समझ पाना बच्चों के लिए आसान नहीं होता। स्कूल आने-जाने या खेलते समय वे अनजाने में हादसे का शिकार हो सकते हैं। इसलिए इस विषय को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए राज्य स्तर से व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं और जिला कलेक्टरों तथा नगरीय निकायों के अधिकारियों को नियमित रूप से इसकी समीक्षा करने के निर्देश दिए जाएं।

आयोग ने नगरीय प्रशासन विभाग, जिला कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों से 7 जुलाई 2026 तक इस संबंध में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।