हरेली पर दिल्ली में छत्तीसगढ़ की अनूठी पहल,माँ के नाम लगा पौधा, प्रकृति के नाम लिया संकल्प

नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व हरेली तिहार की हरियाली आज राजधानी दिल्ली में भी नजर आई। नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन में हरेली के अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन कर्मचारी संघ द्वारा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। छत्तीसगढ़ भवन के अधिकारी और कर्मचारियों ने उत्साह के साथ पौधे लगाए और उन्हें वृक्ष बनने तक संभालने का संकल्प लिया।
हरेली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की उस जीवनशैली का प्रतीक है जिसमें खेती, मिट्टी, पानी, पेड़ और प्रकृति के प्रति सम्मान रचा-बसा है। ऐसे अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के साथ पौधारोपण ने पर्व की भावना को और गहरा कर दिया। दिल्ली में बसे छत्तीसगढ़ के लोगों ने अपने पारंपरिक पर्व को प्रकृति संरक्षण के संदेश से जोड़कर यह बताया कि संस्कृति की जड़ें जहां भी जाती हैं, वहां अपनी मिट्टी की खुशबू साथ ले जाती हैं।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर की थी। इसका मूल विचार बेहद सरल और भावनात्मक है—अपनी माँ के सम्मान में एक पेड़ लगाना और उसी के साथ धरती माँ की रक्षा का संकल्प लेना। इस अभियान ने पौधारोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम न रखकर लोगों की व्यक्तिगत भावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया। देशभर में अभियान को व्यापक जनभागीदारी मिली और सितंबर 2024 तक 80 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा हुआ। (Press Information Bureau)
छत्तीसगढ़ भवन में हुआ आयोजन इसी भावना का एक छोटा लेकिन अर्थपूर्ण उदाहरण बना। यहां लगाया गया प्रत्येक पौधा किसी के लिए केवल एक पौधा नहीं था। वह माँ के प्रति प्रेम, धरती के प्रति कृतज्ञता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक था। जिस तरह एक माँ अपने बच्चे को समय, स्नेह और सुरक्षा देकर बड़ा करती है, उसी तरह एक पौधे को भी वृक्ष बनने के लिए निरंतर देखभाल की जरूरत होती है।
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि पौधा लगाना शुरुआत है, जिम्मेदारी वहीं से शुरू होती है। उसकी नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल ही यह तय करेगी कि आज लगाया गया पौधा आने वाले वर्षों में एक छायादार वृक्ष बनेगा। यही सोच ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को एक दिन के आयोजन से आगे बढ़ाकर जीवन से जुड़ी पहल बनाती है।
हरेली के दिन छत्तीसगढ़ भवन में हुआ यह पौधारोपण इसलिए भी खास रहा कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा और देश के पर्यावरण अभियान का यहां सुंदर संगम दिखाई दिया। हरेली की हरियाली और माँ के नाम लगाए गए पौधे ने दिल्ली की धरती पर छत्तीसगढ़ की उस सोच को जीवंत किया, जिसमें प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार और माँ के समान सम्मान दिया जाता है।
आज लगाए गए ये पौधे आने वाले वर्षों में शायद उन लोगों को याद दिलाएंगे जिन्होंने इन्हें लगाया था कि किसी खास दिन की एक छोटी-सी पहल भी भविष्य के लिए बड़ी विरासत बन सकती है। माँ के नाम लगाया गया एक पेड़—आज एक पौधा है, कल किसी के लिए छाया होगा, किसी के लिए शुद्ध हवा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति का उपहार।





