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Chhattisgarh Handloom: कोसा और हस्तशिल्प को मिलेगा ग्लोबल बाजार, निर्यात और डिजाइन विकास पर रायपुर में बड़ी कार्यशाला

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ शासन के ग्रामोद्योग विभाग की ओर से रायपुर के न्यू सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में ‘हैण्डलूम/हैण्डीक्राफ्ट सेक्टर में निर्यात संवर्धन एवं डिजाइन विकास’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला का फोकस राज्य के पारंपरिक हथकरघा, हस्तशिल्प और परिधान उत्पादों को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने, निर्यात प्रक्रिया की जानकारी देने तथा डिजाइन, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने पर रहा।

‘परंपरा से डिजाइन, डिजाइन से उद्यम और उद्यम से निर्यात’

कार्यक्रम में विभागीय सचिव राजेश सिंह राणा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास कोसा, पारंपरिक बुनाई, हथकरघा वस्त्र और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत है। जरूरत इस बात की है कि इस पारंपरिक कौशल को आधुनिक डिजाइन, बेहतर गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार की मांग से जोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि ‘परंपरा से डिजाइन, डिजाइन से उद्यम और उद्यम से निर्यात’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य के बुनकरों और शिल्पकारों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ना विभाग की प्राथमिकता है।

DGFT ने समझाई निर्यात की प्रक्रिया

कार्यशाला में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), नागपुर के विशेषज्ञों ने हथकरघा, हस्तशिल्प और apparel क्षेत्र में निर्यात की संभावनाओं की जानकारी दी। प्रतिभागियों को निर्यात के लिए जरूरी प्रक्रियाओं, औपचारिकताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया।

वहीं, Export Credit Guarantee Corporation of India (ECGC) ने निर्यातकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भुगतान और ऋण जोखिम के प्रबंधन की जानकारी दी। इससे उद्यमियों को विदेशी खरीदारों के साथ व्यापार के दौरान संभावित जोखिमों को समझने में मदद मिली।

MSME योजनाओं और सरकारी सुविधाओं की जानकारी

उद्योग विभाग, छत्तीसगढ़ शासन की ओर से राज्य की विभिन्न योजनाओं के तहत उपलब्ध सहायता और सुविधाओं की जानकारी दी गई। भारत सरकार के MSME मंत्रालय ने भी हथकरघा, हस्तशिल्प और apparel क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए उपलब्ध योजनाओं, सहायता और अवसरों पर जानकारी साझा की।

NIFT ने बताया कैसे परंपरा बनेगी आधुनिक डिजाइन

कार्यशाला के डिजाइन सत्र में NIFT रायपुर की ओर से ‘Design Innovations for Sustainable Handloom & Handicrafts’ विषय पर प्रस्तुति दी गई। विशेषज्ञों ने पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने, sustainable design और नए उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

अंतिम तकनीकी सत्र में ‘Traditional Motifs to Contemporary Designs’ विषय पर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और motifs को आधुनिक परिधान, lifestyle products और अन्य उत्पादों में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

वैश्विक बाजार के लिए तैयार होंगे स्थानीय उत्पाद

कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और विरासत को संरक्षित रखते हुए उसे contemporary design और global consumer preferences के अनुरूप विकसित किया जाए।

विभाग के अनुसार, राज्य के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को वैश्विक बाजार में स्थापित करने के लिए निर्यात सुविधा, डिजाइन विकास, उद्यमिता, गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। कार्यशाला से मिले सुझावों और उद्यमियों की जरूरतों के आधार पर आगे भी handholding और क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम में हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े उद्यमी, बुनकर, शिल्पकार, संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों और संस्थानों के अधिकारी मौजूद रहे।