KTU में ‘दीक्षारम्भ’ : संस्थानों में आंतरिक पीआर और पारदर्शिता बेहद जरूरी- प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल

० जनसंपर्क और सृजनात्मकता से ही तय होगी युवाओं की सफलता- प्रशांत तिवारी
रायपुर। नव प्रवेशित पत्रकारिता-मीडिया विद्यार्थियों के ‘दीक्षारम्भ’ का विषय ‘वर्तमान परिदृश्य में जनसंपर्क की भूमिका’ विषय पर हुआ। कार्यक्रम में जनसंपर्क विशेषज्ञ प्रशांत तिवारी मुख्य वक्ता और कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने अध्यक्षता की। विद्यार्थियों शिक्षा चाहे जहाँ से भी प्राप्त करें, यदि आपके भीतर आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति और क्षमता है, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने पीआर के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला। पीआर क्षेत्र में पहचान बनाना और संवाद स्थापित करना सबसे महत्वपूर्ण है। जनसंपर्क अधिकारी को सुनना और समझना जरूरी है, लेकिन कभी भी अति-प्रचार या बनावटी पब्लिसिटी नहीं करनी चाहिए।
कुलपति प्रो. दयाल ने कहा कि आज का समय गति से ज्यादा सटीकता का है। संस्थानों के लिए बाहरी प्रचार से अधिक आंतरिक जनसंपर्क जरूरी होता है। किसी भी संस्थान में मीडिया से संवाद के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ होना चाहिए।
संवादहीनता ही अधिकांश समस्याओं की जड़ है, इसलिए सकारात्मक खबरों को बढ़ावा दें और सही दिशा में संवाद जारी रखें।
भिलाई इस्पात संयंत्र के पूर्व महाप्रबंधक (जनसंपर्क) प्रशांत तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी बेहद प्रतिभाशाली है और आने वाले समय में कुछ बेहतरीन और रचनात्मक कार्य करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा कभी भ्रमित नहीं होता, बल्कि उसे केवल अनुभव और धैर्य की आवश्यकता होती है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के बदलते दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में न्यूज क्रिएशन और मीडिया के तकनीकी बदलावों को समझना अनिवार्य है। उन्होंने अपने पत्रकारीय दिनों के संघर्षों को साझा करते हुए छात्रों को सलाह दी कि जीवन में किसी भी छोटे काम से पीछे न हटें, क्योंकि कब किस्मत का दरवाजा खुल जाए, यह कोई नहीं जानता। एक बेहतरीन जनसंपर्क कर्मी बनने के लिए शारीरिक भाषा, शब्दों के चयन और संवाद कौशल पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र खंडेलवाल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थियों को कुशल बनाने और जनसंपर्क के क्षेत्र में करियर की संभावनाएं तलाशने के लिए ‘दीक्षारम्भ’ मार्गदर्शक साबित होते हैं।
कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने आभार व्यक्त करते कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों को अपनी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी, जिसके लिए ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोच जरूरी है। संवाद के दौरान पिच, टोन और बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान देने के साथ-साथ बोलने से पहले परिणाम के बारे में सोचना आवश्यक है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. आशुतोष मांडवी, संचालन डॉ. केशव सिंह राठौर तथा अतिथि परिचय गुंजन यादव ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ पंकज नयन पांडे, डॉ नृपेन्द्र शर्मा, डॉ राजेन्द्र मोहन्ती, समस्त अतिथि व्याख्याता और बड़ी संख्या में नव-प्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे।





