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CG News: रायपुर में शुरू हुई समर्पित ब्रेस्ट केयर क्लिनिक, ₹1,499 में मिलेगी स्तन स्वास्थ्य जांच की सुविधा

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रायपुर। स्तन संबंधी बीमारियों की समय पर पहचान और बेहतर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट ने रायपुर में समर्पित ‘ब्रेस्ट केयर क्लिनिक’ की शुरुआत की है। यहां महिलाओं को ब्रेस्ट सर्जरी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी से जुड़ी विशेषज्ञ सेवाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी।

क्लिनिक का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर और रायपुर स्थित RUSH Fitness की संस्थापक आकांक्षा मिश्रा ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस अवसर पर रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स के मेडिकल एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे, वरिष्ठ चिकित्सक, ब्रेस्ट कैंसर से उबर चुकी महिलाएं और अन्य अतिथि मौजूद रहे।

₹1,499 में ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग पैकेज

महिलाओं को स्तन स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए अस्पताल की ओर से ₹1,499 का ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग पैकेज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन, सोनामैमोग्राफी और स्त्री रोग विशेषज्ञ या कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श शामिल है।

जांच और इमेजिंग की आवश्यकता महिला की उम्र, लक्षणों, व्यक्तिगत जोखिम और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर तय की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।

‘पिंक टॉक्स’ में स्तन में गांठ की जांच पर चर्चा

क्लिनिक के शुभारंभ के अवसर पर रायपुर ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी (ROGS) और रायपुर मेनोपॉज सोसाइटी के सहयोग से ‘पिंक टॉक्स’ पैनल चर्चा आयोजित की गई।

इसका विषय ‘ट्रिपल असेसमेंट ऑफ ब्रेस्ट लम्प्स’ यानी स्तन में गांठ की तीन चरणों में समग्र जांच और निदान था। विशेषज्ञों ने क्लिनिकल परीक्षण, उपयुक्त ब्रेस्ट इमेजिंग और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी के महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम में डॉ. मौ रॉय, डॉ. गौरव गुप्ता और डॉ. रवि जायसवाल सहित चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए।

ब्रेस्ट कैंसर का मतलब पूरी ब्रेस्ट निकालना नहीं

संस्थान की क्लिनिकल डायरेक्टर एवं सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मौ रॉय ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर का निदान होने पर हर मरीज की पूरी ब्रेस्ट निकालना जरूरी नहीं होता। उपयुक्त मरीजों में ब्रेस्ट कंजर्वेशन और ऑनकोप्लास्टिक सर्जरी के जरिए कैंसर का उपचार करते हुए स्तन के आकार को सुरक्षित रखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जिन मरीजों के लिए मास्टेक्टॉमी यानी पूरी ब्रेस्ट निकालने की सर्जरी आवश्यक हो, उनके साथ ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन के विकल्पों पर भी चर्चा की जानी चाहिए। हालांकि, सर्जरी का चुनाव बीमारी की प्रकृति और मरीज की चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार किया जाता है।

22 वर्षों के अनुभव के साथ उन्नत उपचार सुविधाएं

रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, ब्रेस्ट ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में 22 वर्षों के अनुभव के आधार पर यहां विभिन्न आधुनिक उपचार प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। इनमें शामिल हैं:

ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी

वायर-गाइडेड ब्रेस्ट सर्जरी

सेंटिनल लिम्फ नोड मैपिंग

ऑनकोप्लास्टिक ब्रेस्ट सर्जरी

ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन

जोखिम कम करने के उद्देश्य से की जाने वाली ब्रेस्ट सर्जरी

इन प्रक्रियाओं का चयन मरीज की बीमारी और उपचार की जरूरत के अनुसार किया जाता है।

महिलाओं को शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देने की सलाह

डॉक्टरों ने महिलाओं को स्तन और बगल में नई गांठ, त्वचा में गड्ढा पड़ने, निप्पल में बदलाव या असामान्य स्राव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी। ऐसे बदलावों में दर्द न होने पर भी चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।

ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है, लेकिन कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी हो सकती है। इसलिए स्क्रीनिंग और आगे की जांच का निर्णय व्यक्तिगत जोखिम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिया जाना चाहिए।

‘समय पर सलाह लेना डर नहीं, साहस की निशानी’

क्लिनिक के उद्घाटन अवसर पर आकांक्षा मिश्रा ने कहा कि महिलाओं को फिट और सक्रिय रहने के साथ अपने शरीर में होने वाले बदलावों को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि डर या सामाजिक झिझक के कारण स्तन संबंधी समस्याओं को छिपाना नहीं चाहिए और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स के मेडिकल एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे ने कहा कि जागरूकता, निदान और उपचार के बीच की बाधाओं को दूर करना जरूरी है। महिलाओं को ऐसी व्यवस्था मिलनी चाहिए, जहां वे बिना अनावश्यक देरी के विशेषज्ञों से परामर्श और समन्वित चिकित्सा सेवाएं प्राप्त कर सकें।

मेडिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की विशेषज्ञ सेवाएं

सीनियर मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रवि जायसवाल ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर के उपचार की योजना ट्यूमर की विशेषताओं, बीमारी के चरण और मरीज के समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। उपचार के संभावित दुष्प्रभावों और निर्धारित चिकित्सा को पूरा करने के महत्व के बारे में मरीजों को स्पष्ट जानकारी देना भी जरूरी है।

वहीं, सीनियर रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. गौरव गुप्ता के अनुसार, संस्थान में एक्टिव ब्रीद कोऑर्डिनेटर (ABC) तकनीक का उपयोग किया जाता है। उपयुक्त मरीजों, विशेषकर बाईं ओर के स्तन कैंसर के मामलों में, नियंत्रित सांस रोकने की तकनीक रेडिएशन के दौरान हृदय पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती है।

ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर्स ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में ब्रेस्ट कैंसर से उबर चुकी दो महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बीमारी के दौरान परिवार के सहयोग, समय पर निदान और उपचार के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।

उनके अनुभवों के जरिए महिलाओं को यह संदेश दिया गया कि स्तन संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।