CG News: खैर लकड़ी तस्करी सिंडिकेट पर महासमुंद पुलिस का बड़ा एक्शन, हिमाचल से कारोबारी गिरफ्तार; ₹1.70 करोड़ नकद जब्त

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी की तस्करी और फर्जी बिलिंग नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से शिव ट्रेडर्स के संचालक सतपाल सिंह (67) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस कार्रवाई में 1 करोड़ 70 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं। वहीं, विभिन्न राज्यों में छापेमारी के दौरान अब तक करीब 70 टन अवैध खैर लकड़ी बरामद की जा चुकी है।
हिमाचल प्रदेश में दबिश, 1.70 करोड़ रुपये जब्त
महासमुंद पुलिस की विशेष टीम ने हिमाचल प्रदेश में उन ठिकानों पर छापेमारी की, जहां कथित तौर पर खैर लकड़ी की तस्करी से अर्जित रकम को खपाने में मदद की जा रही थी। पुलिस ने मनीष अग्रवाल और संजय छाबड़िया से जुड़े कारोबार के संबंध में 1.70 करोड़ रुपये नकद बरामद कर जब्त किए।
इससे पहले 7 सितंबर 2026 को आरोपी मनीष अग्रवाल के ग्राम मुड़पार, थाना सरसींवा स्थित मकान पर कार्रवाई के दौरान 81 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे।
हरियाणा के गोदाम से मिली 15 टन खैर लकड़ी
पुलिस ने 10 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम जिले की पटौदी तहसील के बहोड़ा कलां गांव स्थित श्री बालाजी ट्रेडिंग फर्म के गोदाम की तलाशी ली थी। यह फर्म आरोपी मनीष अग्रवाल से संबंधित बताई गई है। तलाशी में करीब 15 टन खैर लकड़ी बरामद हुई, जिसे जब्त कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में की गई कार्रवाइयों में अब तक लगभग 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की जा चुकी है।
शिव ट्रेडर्स का संचालक गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने 12 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब से सतपाल सिंह को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उन्हें स्थानीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड हासिल किया और महासमुंद लेकर आई। अब उन्हें न्यायिक रिमांड के लिए संबंधित अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया बताई गई है।
फर्जी बिलिंग और ट्रांजिट पास के इस्तेमाल का आरोप
पुलिस की जांच के अनुसार, सतपाल सिंह ने अपनी फर्म शिव ट्रेडर्स के माध्यम से अखिलेश सिंघल, पारितोष मिश्रा, मनीष अग्रवाल, संजय छाबड़िया और अन्य लोगों के साथ कथित तौर पर आपराधिक साजिश की। आरोप है कि वास्तविक खैर लकड़ी की आपूर्ति किए बिना विभिन्न फर्मों के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए गए।
पुलिस का दावा है कि इन बिलों को वैध दिखाने के लिए वन विभाग के फर्जी ट्रांजिट पास बनाए गए और एचएसएन कोड का दुरुपयोग किया गया। जांच में पिछले तीन वर्षों के दौरान बैंक खातों के जरिए कई बार करोड़ों रुपये के लेन-देन की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इन भुगतानों और कथित नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
जुलाई में दर्ज हुआ था फर्जी एनओसी का मामला
मामले की शुरुआत वन परिक्षेत्र अधिकारी, पिथौरा की शिकायत से हुई थी। शिकायत में 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल की गई एनटीपीएस एनओसी में कूटरचना और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था।
इस आधार पर 9 जुलाई 2026 को पिथौरा थाने में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और भारतीय वन अधिनियम, 1927 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
पहले भी दो आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
महासमुंद पुलिस इस प्रकरण में इससे पहले 14 सितंबर 2026 को पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल को गिरफ्तार कर चुकी है। पारितोष मिश्रा को पीयूष इंटरप्राइजेस और अखिलेश सिंघल को सिंघल इंटरप्राइजेस से जुड़ा बताया गया है।
पुलिस अब कथित फर्जी बिलिंग नेटवर्क, बैंक खातों में हुए लेन-देन, अन्य संदिग्धों और अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों की जांच कर रही है।
अवैध कमाई की कुर्की की तैयारी
पुलिस के मुताबिक, अपराध से अर्जित नकदी और संपत्ति की कुर्की तथा आरोपियों को कथित अवैध आर्थिक लाभ से वंचित करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 107 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
महासमुंद पुलिस का कहना है कि वन संपदा की तस्करी, फर्जी दस्तावेजों और अंतरराज्यीय धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और खुलासे होने की संभावना है।





