Raipur News: ‘भाषाई अलगाववाद से टूटेगा देश’, रघु ठाकुर ने केंद्र सरकार से महाराष्ट्र पर भी कार्रवाई की मांग की

रायपुर। भाषाओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच समाजवादी चिंतक और जननेता रघु ठाकुर ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों के लिए समान नीति अपनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाषा के नाम पर वर्चस्व और अलगाव की भावना देश की एकता-अखंडता के लिए नुकसानदायक है। महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई और गैर-मराठी ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए। रघु ठाकुर रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित ‘भाषायी विवाद और भारत का भविष्य’ विषयक परिचर्चा में अध्यक्षीय संबोधन दे रहे थे।
महाराष्ट्र और तमिलनाडु के मामलों में समान नीति की मांग
रघु ठाकुर ने कहा कि हिंदी विरोध के मुद्दे पर केंद्र सरकार को बिना भेदभाव के कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने तमिलनाडु में अनुदान राशि रोके जाने और महाराष्ट्र में हिंदी की पढ़ाई से जुड़े फैसलों पर केंद्र की कथित अलग-अलग प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि दोनों मामलों में एक समान नीति क्यों नहीं अपनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई बंद करने और तीन लाख गैर-मराठी ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा का प्रमाण-पत्र अनिवार्य करने जैसे फैसले क्षेत्रीयता की भावना को बढ़ावा दे सकते हैं। उनके मुताबिक, भाषा के आधार पर भय और वैमनस्य का माहौल बनने से रोकना जरूरी है।
बांग्लादेश का उदाहरण देकर किया आगाह
रघु ठाकुर ने भाषाई अलगाववाद के संदर्भ में बांग्लादेश के इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के तत्कालीन नेतृत्व द्वारा बंगाली भाषा पर उर्दू थोपने के प्रयासों ने असंतोष को बढ़ाया और अंततः बांग्लादेश एक अलग राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया।
उन्होंने आशंका जताई कि वैश्विक कॉरपोरेट ताकतें भी भारत में भाषाई मतभेदों का लाभ उठाने की कोशिश कर सकती हैं। रघु ठाकुर ने कहा कि भाषा को कट्टरता और वर्चस्व का माध्यम बनाने के बजाय संवाद तथा आपसी समझ का आधार बनाया जाना चाहिए।
हिंदी और भारतीय भाषाओं के बीच सौहार्द पर जोर
रघु ठाकुर ने महात्मा गांधी, डॉ. राममनोहर लोहिया, लोकमान्य तिलक और काका कालेलकर जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विचारकों ने अंग्रेजी के वर्चस्व से मुक्ति और भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
उन्होंने कहा कि हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला, लेकिन आज भारतीय भाषाओं के बीच सौहार्द विकसित करने की चुनौती सामने है। देश की एकता मजबूत करने के लिए हर नागरिक को कम से कम एक अन्य भारतीय भाषा सीखने और अलग-अलग राज्यों के लोगों के साथ मित्रता बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।
लोहिया और पेरियार के संवाद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की भाषा सीखने पर सहमति जताई थी। उनके अनुसार, यह प्रसंग बताता है कि किसी भाषा का विरोध करने के बजाय किसी भी भाषा के वर्चस्व को थोपने का विरोध किया जाना चाहिए।
संवाद से ही सुलझेगा भाषाई विवाद: रामकुमार तिवारी
साहित्यकार रामकुमार तिवारी ने कहा कि छोटी-छोटी अस्मिताओं को व्यापक राष्ट्रीय पहचान के साथ जोड़ने से ही देश मजबूत बनते हैं। उन्होंने भारतीय भाषाओं के बीच विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि संवाद के माध्यम से इसका समाधान तलाशने की जरूरत है।
तिवारी ने कहा कि भारत में उत्तर से दक्षिण तक संवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव की परंपरा रही है। विविधता के बीच एकता बनाए रखने के लिए आपसी बातचीत और समझ को बढ़ावा देना आवश्यक है।
भाषा को राजनीति और श्रेष्ठता की भावना से दूर रखने की अपील
पत्रकार रवि भोई ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच विवाद को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि इस दिशा में संवाद की पहल को व्यापक समर्थन मिलना चाहिए।
वहीं, पत्रकार प्रफुल्ल ठाकुर ने भाषा को संप्रेषण का माध्यम बताते हुए कहा कि इसे भय, श्रेष्ठता और संकीर्ण अस्मिता की भावना से दूर रखते हुए सहज रूप से विकसित होने देना चाहिए।
बुद्धिजीवियों की मौजूदगी में हुई परिचर्चा
कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी और डॉ. राममनोहर लोहिया के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुआ। वरिष्ठ पत्रकार जयंत सिंह तोमर ने परिचर्चा का संचालन किया और विषय की पृष्ठभूमि रखी। अतिथियों का स्वागत मातामणि तिवारी ने किया, जबकि लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अशोक पंडा ने आभार व्यक्त किया।
आयोजन में श्याम सुंदर सिंह और जावेद उस्मानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। परिचर्चा में रायपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी और नागरिक शामिल हुए। उपस्थित लोगों में रामसिंह क्षत्रिय, नरसिंह साहू, सोमनाथ साहू, शिव नेताम बंजारे, रामगुलाम ठाकुर, गिरीश पंकज, गिरीश बोरा, वीरेंद्र पांडे और योगेश सहित अन्य लोग मौजूद रहे।





