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Chhattisgarh News: 112 साल का इंतजार खत्म! रावघाट पहुंची पहली पैसेंजर ट्रेन, अब सीधे रायपुर से जुड़ेगा बस्तर का दुर्गम इलाका

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के रेल इतिहास में 20 अक्टूबर 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया। आजादी के बाद पहली बार बस्तर के दुर्गम क्षेत्र रावघाट तक पैसेंजर ट्रेन सेवा शुरू हुई। करीब 112 साल पहले, वर्ष 1914 में इस रेललाइन के लिए सर्वे की शुरुआत हुई थी। अब ताड़ोकी-रावघाट रेलखंड पर ट्रेन परिचालन शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को रायपुर तक रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नई रेललाइन का लोकार्पण किया। वहीं, रायपुर रेलवे स्टेशन पर आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

रायपुर से रावघाट तक चलेगी पैसेंजर ट्रेन

ताड़ोकी-रायपुर के बीच पहले से संचालित पैसेंजर ट्रेन सेवा का विस्तार अब रावघाट तक कर दिया गया है। निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार, ट्रेन रायपुर से दोपहर 1:20 बजे रवाना होगी और दोपहर 2:30 बजे दुर्ग पहुंचेगी। दुर्ग से यह ट्रेन 2:40 बजे रवाना होकर शाम 7 बजे रावघाट पहुंचेगी।

वहीं, रावघाट से चलने वाली ट्रेन सुबह 11:40 बजे रायपुर पहुंचेगी। इससे बस्तर के दूरस्थ इलाके के यात्रियों को राजधानी तक आने-जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

महिला लोको पायलट ने संभाली ट्रेन की कमान

रावघाट तक शुरू हुई ट्रेन सेवा के उद्घाटन दिवस पर महिला लोको पायलट प्रतिभा बंसोड़ ने ट्रेन की कमान संभाली। इस रेल सेवा को क्षेत्र में आवागमन की सुविधा बढ़ाने और दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा की कनेक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

1914 में हुआ था पहला सर्वे, 1,628 करोड़ रुपये की लागत

रावघाट रेललाइन का इतिहास एक सदी से भी अधिक पुराना है। अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1914 में इस क्षेत्र तक रेललाइन पहुंचाने के लिए पहला सर्वे किया गया था। परियोजना को पूरा होने में लंबा समय लगा।

दल्लीराजहरा से रावघाट के बीच करीब 95 किलोमीटर लंबी नई रेललाइन का निर्माण लगभग 1,628 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसमें ताड़ोकी से रावघाट के बीच का 17.5 किलोमीटर लंबा अंतिम खंड भी शामिल है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चुनौतियों के बीच हुआ निर्माण

रेललाइन का बड़ा हिस्सा दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र से गुजरता है। निर्माण के दौरान सुरक्षा बड़ी चुनौती रही। दी गई जानकारी के अनुसार, नक्सली खतरे को देखते हुए हर पांच किलोमीटर पर सुरक्षा कैंप बनाए गए थे। सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य के लिए प्रतिदिन केवल पांच से छह घंटे का समय मिल पाता था।

इन चुनौतियों के बीच रेलखंड का पूरा होना क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में अहम उपलब्धि है।

अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और मेमू सेवा भी शुरू

रायपुर में आयोजित समारोह के दौरान अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और रायपुर-कुरूद नई यात्री ट्रेन यानी मेमू सेवा का भी शुभारंभ किया गया। इन सेवाओं से संबंधित क्षेत्रों में रेल आवागमन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रावघाट तक रेल पहुंचना विकास की नई संभावनाओं का रास्ता: सीएम साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रावघाट तक ट्रेन सेवा शुरू होने को दक्षिण छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का नया ऐतिहासिक अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि रावघाट तक रेल की सीटी गूंजना केवल नई यात्रा की शुरुआत नहीं, बल्कि बस्तर अंचल में विकास, जनता के विश्वास और नई संभावनाओं के नए युग का प्रारंभ है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक रेललाइन पहुंचने से केवल आवागमन की सुविधा नहीं बढ़ेगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। इस रेल सेवा से स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।