#संपादकीय

कही-सुनी (30 NOV-25) : छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य महकमे में उलटफेर

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रवि भोई की कलम से

सरकार ने कमिश्नर हेल्थ डॉ प्रियंका शुक्ला और कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन शिखा राजपूत तिवारी को दूसरे विभागों में भेजकर स्वास्थ्य विभाग में बड़ा उलटफेर कर दिया। चर्चा है कि 2008 बैच की आईएएस शिखा राजपूत तिवारी की कार्यशैली से कई मेडिकल कालेज के डीन असहज महसूस कर रहे थे और पटरी नहीं बैठ पा रही थी। 2008 बैच की आईएएस शिखा राजपूत तिवारी को सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग का सचिव बना दिया है। बिलासपुर और सरगुजा संभाग की कमिश्नर रही शिखा राजपूत तिवारी के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव के पद पर पोस्टिंग को पनिशमेंट माना जा रहा है, क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग में अभी ऐसा कोई इवेंट नहीं होना है, जिसके लिए वहां कोई सीनियर आईएएस की जरुरत पड़े। राज्य निर्वाचन में शिखा की पोस्टिंग के मायने तलाशे जा रहे हैं और तरह-तरह का कयास भी लगाया जा रहा है। शिखा अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी भी रह चुकी हैं। उनके पास अभी कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन के साथ आयुक्त आयुष का भी एडिशनल चार्ज था। विष्णुदेव साय की सरकार ने शिखा को फारेस्ट सेक्रेटरी के पद से हटाकर हेल्थ में भेजा था। सरकार ने कुछ दिनों पहले मेडिकल एजुकेशन के एडिशनल डायरेक्टर के पद से डॉ पुनीत गुप्ता को भी हटा दिया था। डॉ पुनीत गुप्ता भूपेश बघेल के राज में सरकार के निशाने पर थे। डॉ पुनीत गुप्ता को रायपुर मेडिकल कालेज में अटैच कर दिया गया है। खबर है कि 2009 बैच की आईएएस कमिश्नर हेल्थ डॉ प्रियंका शुक्ला और स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल का तालमेल ठीक नहीं चल रहा था। डॉ प्रियंका शुक्ला के पास हेल्थ में दो चार्ज था, उसके बदले उन्हें आयुक्त समग्र शिक्षा और प्रबंध संचालक पाठ्य पुस्तक निगम बना दिया गया है। सरकार ने आईएएस संजीव कुमार झा और संतन देवी जांगड़े को हेल्थ विभाग में लाने के साथ स्वास्थ्य विभाग में रितेश अग्रवाल की जिम्मेदारी बढ़ाई है। अब देखते हैं स्वास्थ्य महकमे में कितना सुधार होता है।

भाजपा की महिला नेत्री को खरी-खरी

कहते हैं कि पिछले दिनों भाजपा के एक कार्यक्रम में संगठन के एक पदाधिकारी ने महिला नेत्री को खरी-खरी बात कह दी। संगठन के पदाधिकारी की बात से मंच में सन्नाटा छा गया और लोग औचक रह गए। खबर है कि भाजपा नेत्री राजधानी के पड़ोसी जिले के एक विधानसभा से पिछले चुनाव लड़ी थी और कुछ सौ वोटों से चुनाव हार गईं। इस समय वे प्रदेश भाजपा में पदाधिकारी हैं। बताते हैं संगठन के पदाधिकारी ने महिला नेत्री से सख्त लहजे में कह दिया कि लोगों से मिलते-जुलते रहती और सक्रिय रहती तो चुनाव नहीं हारती और आज महिला एवं बाल विकास मंत्री रहतीं। हिदायत देने वाले संगठन के बड़े पदाधिकारी थे, तो उनके सामने महिला नेत्री का मुँह नहीं खुला और ना ही दूसरे कुछ कह पाए, पर बात कइयों को घायल कर गई।

रायपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की पसंद फेल

कहते हैं कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सुबोध हरितवाल को रायपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनवाना चाहते थे, पर ऐसा नहीं हो पाया। श्रीकुमार मेनन की लाटरी लग गई और वे रायपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष बन गए। बताते हैं कि श्रीकुमार मेनन का बायोडाटा तो मजबूत था ही,केरल कनेक्शन भी काम आ गया। चर्चा है कि श्रीकुमार मेनन को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महामंत्री के सी वेणुगोपाल का भी आशीर्वाद मिल गया। खबर है कि अलग-अलग वार्ड से तीन बार पार्षद रहे मेनन के लिए पूर्व मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण शर्मा ने भी दांव चला। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर दूसरे बड़े नेता अपने-अपने इलाकों में अपनी पसंद के लोगों को जिला अध्यक्ष बनवाने में तो कामयाब रहे, पर क्षेत्र से बाहर हाईकमान ने अपनी चलाई। टीएस सिंहदेव अंबिकापुर में बालकृष्ण पाठक को फिर से जिला अध्यक्ष बनवाने में कामयाब रहे, पर बलरामपुर में केपी सिंह को नहीं बनवा पाए। बताते हैं रायशुमारी में ही केपी सिंह का विरोध हो गया था। सूरजपुर की जिला अध्यक्ष बनी शशि सिंह को भले टीएस सिंहदेव का समर्थन था, पर वह जिला अध्यक्ष बनी है राहुल गाँधी की टीम की सदस्य होने के कारण। नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत अपने विधानसभा क्षेत्र सक्ती में रश्मि गभेल को जिला अध्यक्ष बनवाने में सफल रहे। कोंडागांव में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम के खासमखास रवि घोष जिला अध्यक्ष बने हैं। मोहन मरकाम के कार्यकाल में रवि घोष प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री संगठन थे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृह जिले दुर्ग में धीरज बाकलीवाल शहर जिला अध्यक्ष बने हैं। धीरज बाकलीवाल दुर्ग के महापौर रहे हैं। कभी वोरा समर्थक रहे धीरज बाकलीवाल अब भूपेश बघेल के पाले में बताए जाते हैं। दुर्ग ग्रामीण के अध्यक्ष बने राकेश ठाकुर और भिलाई शहर के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर भी भूपेश बघेल के कोटे से माने जा रहे हैं।

मंत्री के विशेष सहायक का हटना चर्चा में

वैसे तो मंत्री के स्टाफ में किसी का हटना और आना रुटीन प्रक्रिया है। लेकिन राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के विशेष सहायक दुर्गेश कुमार वर्मा का हटना चर्चा का विषय बन गया है। दुर्गेश वर्मा का हटना राजनीति के साथ प्रशासनिक महकमे में भी सुर्ख़ियों में है। दुर्गेश वर्मा डिप्टी कलेक्टर हैं। बताया जाता है दुर्गेश वर्मा बलौदाबाजार जिले के ही रहने वाले हैं। मंत्री टंकराम वर्मा बलौदाबाजार से विधायक हैं। खबर है कि विशेष सहायक दुर्गेश कुमार वर्मा मंत्री जी के राइट हैंड थे। कुछ लोग दुर्गेश वर्मा को मंत्री जी का रिश्तेदार भी बता रहे हैं। डिप्टी कलेक्टर होने के कारण दुर्गेश वर्मा राजस्व का काम देखते थे।

मंत्रियों का निज सहायक प्रेम

बताते हैं कि एक मंत्री जी गंभीर शिकायतों के बाद भी अपने निज सहायक को हटाना नहीं चाहते ,तो एक मंत्री जी अपने पुराने ड्राइवर से निज सहायक का काम ले रहे हैं। मजेदार बात है कि दोनों नेता पहली बार विधायक और मंत्री बने हैं। खबर है कि गंभीर शिकायत वाले निज सहायक मंत्री जी के आँख और कान है। मंत्री जी के प्रतिनिधि के तौर बड़ी-बड़ी कंपनियों से बातचीत और डीलिंग निज सहायक ही करते हैं। सुनने में आ रहा है कि निज सहायक अफसरों की पोस्टिंग में भी ख़ासा दखल रखते हैं । चर्चा है कि निज सहायक लिखने-पढ़ने वाले के तौर पर मंत्री जी से जुड़े और देखते ही देखते मंत्री जी का अति विश्वासपात्र बन गए । मंत्री जी और निज सहायक एक ही इलाके के बताए जाते हैं। ड्राइवर को निज सहायक के रूप में रखने वाले मंत्री जी को सरकारी आदेश की चिंता नहीं है। मंत्री जी भाजपा में आने से पहले कांग्रेस में थे। बताते हैं भाजपा में उनके कोई विश्वासपात्र नहीं बन पाए हैं, इसलिए सालों से गाड़ी चलाने वाले पर भरोसा करना उनकी मजबूरी है। अब मंत्री के रूप में मिले विभागों की गाड़ी भी तो चलानी पड़ेगी।

क्या एजी की नियुक्ति में डॉ रमन की चली

चर्चा है कि नए महाधिवक्ता विवेक शर्मा की नियुक्ति में विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह की चली। डॉ रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में विवेक शर्मा उप महाधिवक्ता थे और विष्णुदेव साय के राज में अतिरिक्त महाधिवक्ता बन गए थे। विवेक शर्मा का पूरा परिवार न्यायपालिका से जुड़ा है। सुनने में आ रहा है कि राज्य के एक मंत्री से अनबन के चलते प्रफुल्ल भारत ने महाधिवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। वैसे भूपेश बघेल के राज में पहले कनक तिवारी को महाधिवक्ता बनाया गया, फिर उनसे इस्तीफा दिलवाकर सतीशचंद्र वर्मा को महाधिवक्ता बना दिया गया। पिछली भाजपा सरकार में जुगल किशोर गिल्डा करीब साढ़े चार साल महाधिवक्ता रहे। उनका लिंक नागपुर से बताया जाता था।

कलेक्टर से दुखी उद्योगपति

कहते हैं छत्तीसगढ़ के एक जिला कलेक्टर से उद्योगपति बड़े दुखी हैं। यह जिला राजधानी से सटा है। कुछ उद्योगपति राज्य सरकार के एक आला अफसर से मिलकर कलेक्टर की शिकायत भी की ,पर उद्योगपतियों की समस्या का अब तक समाधान नहीं हुआ है। अब छह फ़रवरी के बाद उद्योगपतियों की इच्छा पूरी हो तो हो। कहा जा रहा है कि एसआईआर के चलते राज्य में कलेक्टरों के ट्रांसफर छह फ़रवरी तक तो नहीं होने हैं। चर्चा है कि कलेक्टर साहब सेवा भी लेते हैं और गुर्राते भी हैं। बताते हैं कलेक्टर साहब फैक्टरियों के मालिकों को भी नहीं बख्शते हैं। उद्योगपति इस बात से दुखी हैं कि कलेक्टर साहब उनसे ठीक से पेश नहीं आते।

रायपुर में डीजीपी कांफ्रेंस से छत्तीसगढ़ का बढ़ा मान

राज्य बनने के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ को डीजीपी कांफ्रेंस की मेजबानी का मौका मिला। इस कांफ्रेंस से देश में छत्तीसगढ़ चर्चा में आ गया और छत्तीसगढ़ का मान भी बढ़ा। छत्तीसगढ़ इस साल रजत जयंती भी मना रहा है। रजत जयंती वर्ष में राज्य की राजधानी में राष्ट्रीय स्तर के आयोजन और प्रधानमंत्री की तीन दिन तक राज्य में मौजूदगी प्रदेश के महत्व को रेखांकित करता है। छत्तीसगढ़ को नक्सल समस्या विरासत मिली थी। इसके कारण राज्य के बाहर छत्तीसगढ़ की छवि अच्छी नहीं बन पा रही थी। अब राज्य से नक्सलवाद का सफाया होने लगा है। बड़े नक्सली नेता सरेंडर कर रहे हैं या मारे जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक राज्य से नक्सलियों के खात्मे का टारगेट तय किया है। डीजीपी कांफ्रेंस में नक्सलवाद के साथ आंतरिक सुरक्षा,आतंकवाद, तस्करी और अन्य मुद्दों पर भी चर्चा कर रणनीति बनाई जाएगी। डीजीपी कांफ्रेंस में जो भी प्रस्ताव पारित किया जाएगा और रणनीति बनाई जाएगी, उसे रायपुर की बैठक के नाम से ही जाना जाएगा। इसलिए आने वाले वर्षों तक देश की पुलिस और पैरा मिलिट्री फ़ोर्स के लिए रायपुर महत्व रखेगा।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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